प्रयागराज में आस्था के साथ आधुनिकता का संगम; इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और सुशासन से विकास की नई तस्वीर रच रहा जिला - prayagraj modern development green energy good governance
प्रयागराज में आस्था के साथ आधुनिकता का संगम; इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और सुशासन से विकास की नई तस्वीर रच रहा जिला प्रयागराज अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और हरित…

सौजन्य से:- Jagran
प्रयागराज में आस्था के साथ आधुनिकता का संगम; इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और सुशासन से विकास की नई तस्वीर रच रहा जिला
प्रयागराज अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और हरित ऊर्जा से विकास की नई गाथा लिख रहा है। महाकुंभ से ...और पढ़ें
HighLights
- महाकुंभ ने प्रयागराज को दिए चौड़े रास्ते और नए फ्लाईओवर।
- माफियाराज समाप्त, गरीबों को मिले अवैध कब्जों से मुक्त आवास।
- बायो-एनर्जी प्लांट से कचरे का निस्तारण, बनी बायो-सीएनजी और खाद।
डिजिटल डेस्क, प्रयागराज। त्रिवेणी संगम की पावन धरा पर बसा प्रयागराज केवल नदियों का मिलन स्थल नहीं, बल्कि भारत की सनातन आत्मा, आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। ब्रह्मा जी के प्रथम अश्वमेध यज्ञ की भूमि और तीर्थों के राजा कहे जाने वाले प्रयागराज की पहचान अब केवल पारंपरिक धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रही है। अपनी प्राचीन परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को संजोते हुए यह शहर आज आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और हरित ऊर्जा के बल पर विकास का नया इतिहास रच रहा है।
महाकुंभ और इंफ्रास्ट्रक्चर से बदला शहर का ढांचा
प्रयागराज में बीते कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व कायाकल्प हुआ है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगभग 11 से 12 किलोमीटर लंबा घाट रोड निर्मित किया गया है, जो पूरे तटबंध को जोड़ते हुए सीधे संगम और बड़े हनुमान जी मंदिर तक सुगम आवागमन सुनिश्चित करता है। प्रयागराज से लखनऊ की दूरी जो पहले चार घंटे की थी, वह अब घटकर महज ढाई से तीन घंटे रह गई है। इसके साथ ही, गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से दिल्ली और मेरठ से प्रयागराज का सफर साढ़े पांच से छह घंटे में पूरा हो सकेगा। महाकुंभ के सुव्यवस्थित आयोजनों ने न केवल विश्व स्तर पर नया कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि आने वाले कई दशकों के लिए शहर को चौड़ी सड़कों, नए फ्लाईओवरों और आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट का उपहार भी दिया है।
माफियाराज का अंत और गरीबों को मिले अपने आशियाने
शहर की छवि को लंबे समय तक प्रभावित करने वाले संगठित अपराध और भू-माफियाओं पर सख्त नकेल कसकर कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। बाहुबल और अवैध कब्जों के साए को खत्म करने के लिए शासन स्तर पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। माफियाओं के अवैध कब्जों से खाली कराई गई जमीनों पर गरीबों और बेघर परिवारों के लिए बहुमंजिला आवास निर्मित कर अलॉट किए गए हैं। इस प्रशासनिक पहल ने आम नागरिकों के मन से भय को समाप्त कर शहर में एक सुरक्षित, भयमुक्त और शांतिपूर्ण माहौल निर्मित किया है।
कचरे से सीएनजी: ग्रीन एनर्जी और स्वच्छता का नया मॉडल
पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रयागराज में अत्याधुनिक बायो-एनर्जी प्लांट की शुरुआत की गई है। यहाँ शहर के घरों और होटलों से निकलने वाले लगभग 100 से 110 टन गीले कचरे को प्रतिदिन प्रोसेस करके बायो-सीएनजी गैस और जैविक खाद तैयार की जा रही है। उत्पादित बायो-सीएनजी का इस्तेमाल स्थानीय गाड़ियों में किया जा रहा है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है। यह संयंत्र हर साल एक एकड़ जमीन को कचरे के पहाड़ बनने से बचा रहा है, जिससे शहर की स्वच्छता और सुंदरता में बड़ा सुधार आया है।
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ज्ञान, विरासत और महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय
तीर्थराज होने के साथ-साथ प्रयागराज महर्षि भारद्वाज के आश्रम और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बदौलत 'ज्ञानराज' भी रहा है, जिसने देश को कई प्रधानमंत्री, न्यायविद और विचारक दिए हैं। अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के बलिदान की प्रतीक आजाद पार्क की माटी और खुसरो बाग का इतिहास इस शहर की विरासत को समृद्ध बनाता है। इस सांस्कृतिक परिदृश्य के बीच अब महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल देखने को मिल रही है। स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्व-सहायता माध्यमों से जुड़कर हजारों महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, जो इस बदलते प्रयागराज की सबसे मजबूत और प्रेरणादायक तस्वीर है।
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