PNC Infratech Share Price: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी पर 3 साल का बैन, 52 हफ्ते के लो पर पहुंचा शेयर
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सड़क उद्घाटन के कुछ ही दिनों के भीतर धंस गई थी। इसमें सरकार की भी काफी किरकिरी हुई थी। अब NHAI ने इसे बनाने वाली कंपनी को 3 साल के लिए बैन कर दिया है। इससे कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई है…

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सड़क उद्घाटन के कुछ ही दिनों के भीतर धंस गई थी। इसमें सरकार की भी काफी किरकिरी हुई थी। अब NHAI ने इसे बनाने वाली कंपनी को 3 साल के लिए बैन कर दिया है। इससे कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई है।
हाइलाइट्स
NHAI ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी को बैन किया
PNC इन्फ्राटेक तीन साल तक किसी प्रोजेक्ट पर नहीं लगा सकेगी बोली
इस एक्सप्रेसवे की सड़क उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद धंस गई थी
इससे बुधवार को कंपनी का शेयर 52 हफ्ते के लो लेवल पर पहुंच गया
नई दिल्ली: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी PNC इन्फ्राटेक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इसकी सड़क उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर धंस गई थी। NHAI ने इस एक्सप्रेसवे को बनाने वाली कंपनी PNC इन्फ्राटेक पर तीन साल के लिए बैन लगा दिया है। कंपनी एनएचएआई के किसी भी प्रोजेक्ट के लिए अगले तीन साल बोली लगा सकती है। कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार यह सबसे बड़ी सजा है।
इससे मंगलवार को कंपनी के शेयरों में 20% की भारी गिरावट आई। आज भी शुरुआती कारोबार में यह करीब 15 फीसदी तक गिर गया। बीएसई पर यह पिछले सत्र में 140.40 रुपये पर बंद हुआ था और आज 130.10 रुपये पर खुला। कारोबार के दौरान यह 116.25 रुपये तक गिरा जो इसका 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर है। इसका 3 साल का उच्चतम स्तर 325.15 रुपये है। पिछले साल 17 सितंबर को यह इस स्तर पर पहुंचा था।
डिजाइन में कमी
टीओआई के अधिकारियों ने कहा था कि अवध एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में समय से पहले आई ये खराबियां डिजाइन की कमी के कारण थीं और सिर्फ पैचवर्क से काम नहीं चलेगा। IIT-खड़गपुर के एक प्रोफेसर की जांच में प्रभावित हिस्सों को पूरी तरह से दोबारा बनाने की सिफारिश की गई थी।
कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार NHAI ने 11 सितंबर को प्रतिबंध का पत्र जारी किया था। कंपनी ने यह भी साफ किया कि इस कार्रवाई का उसके मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वह इस आदेश के खिलाफ़ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। यह प्रोजेक्ट 'हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल' के तहत पूरा किया गया था, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट की अवधि के दौरान रखरखाव की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनी की होती है।
एनएचएआई को देना होगा मुआवजा
यह अपनी तरह का पहला मामला भी है जिसमें पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली रोक दी गई है। कंपनी को इस अवधि के दौरान टोल से होने वाले नुकसान की भरपाई NHAI को करनी होगी। जब तक पूरा कॉरिडोर पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक रोजाना लगभग 42 लाख रुपये का मुआवजा देने का अनुमान है।
लेखक के बारे मेंदिल प्रकाशदिल प्रकाश, नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर है। वह 20 साल से भी अधिक समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने खेल, राजनीति, संसद, विदेश, विज्ञान, रक्षा और बिजनेस जैसे कई विषयों पर रिपोर्टिंग की है। दिल प्रकाश पांच साल से भी अधिक समय से एनबीटी डिजिटल के साथ जुड़े हैं। इससे पहले वह देश की प्रमुख न्यूज एजेंसी यूनीवार्ता और बिजनेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने बीबीसी हिंदी में भी आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के रूप में कई साल काम किया है। यूनीवार्ता में कई साल तक स्पोर्ट्स डेस्क पर काम करने के बाद नेशनल ब्यूरो में कई विषयों पर रिपोर्टिंग की। इस दौरान उन्हें हॉकी वर्ल्ड कप, क्रिकेट वर्ल्ड कप और कॉमनवेल्थ गेम्स को कवर करने का मौका मिला। साथ ही उन्होंने डिफेंस करेंसपोंडेंट कोर्स भी किया है। इस दौरान उन्हें रक्षा बलों के काम करने के तरीके को करीब से देखने का मौका मिला। दिल प्रकाश ने नई दिल्ली के भारतीय विद्या भवन संस्थान से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।... और पढ़ें
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