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यूपी की 10 MLC सीटों के चुनाव में परखी जाएगी विधायकों की निष्ठा, सपा-BJP में अतिरिक्त सीटों के लिए होगी जंग

यूपी चुनाव से पहले विधायकों की निष्ठा का एक और इम्तेहान होना अभी बाकी है। एमएलसी की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव में अतिरिक्त सीटें साधने के लिए सपा-बीजेपी को अतिरिक्त प्रयास करना होगा। लखनऊ: यूपी में विधानसभा चुनाव 2027…

Navbharat Times के अनुसार25 सितंबर 2026 को 01:04 am बजे
यूपी की 10 MLC सीटों के चुनाव में परखी जाएगी विधायकों की निष्ठा, सपा-BJP में अतिरिक्त सीटों के लिए होगी जंग

सौजन्य से:- Navbharat Times

यूपी चुनाव से पहले विधायकों की निष्ठा का एक और इम्तेहान होना अभी बाकी है। एमएलसी की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव में अतिरिक्त सीटें साधने के लिए सपा-बीजेपी को अतिरिक्त प्रयास करना होगा।

लखनऊ: यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 की आचार संहिता लागू होने के पहले विधायकों की निष्ठा का एक और इम्तेहान होगा। विधान परिषद की 10 सीटों पर कार्यकाल अगले साल 30 जनवरी को खत्म हो रहा है। इनका चुनाव विधायकों के वोट से होना है।

ऐसे में अतिरिक्त सीटें साधने के लिए पक्ष-विपक्ष को अतिरिक्त प्रयास करना होगा। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले होने वाली इस जोर-आजमाइश में विधायक भी टिकट और सियासी भविष्य का समीकरण साधते नजर आ सकते हैं।

परिषद की 10 सीटें हो रहीं खाली

परिषद की खाली होने वाली 10 सीटों में 9 बीजेपी और एक सपा के खाते में हैं। बीजेपी से कुंवर मानवेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, स्वतंत्र देव सिंह, अरविंद कुमार शर्मा, अश्विनी त्यागी, गोविंद नारायण शुक्ला, धर्मवीर प्रजापति, सलिल विश्ननोई और सुरेंद्र चौधरी का कार्यकाल समाप्त होगा। वहीं, सपा से राजेंद्र चौधरी का नाम कार्यकाल खत्म होने वालों की सूची में शामिल है। इन सीटों के लिए नवंबर या दिसंबर में चुनाव होने के आसार हैं।

ऐसे तय होता है कोटा

विधानसभा में 7 सीटें खाली हैं। ऐसे में 396 विधायक ही वोटर लिस्ट का हिस्सा होंगे। विधान परिषद में एक सीट का कोटा (कुल वैध वोट ÷ सीट + 1) +1 के आधार पर निकाला जाता है। फ्लोर वैल्यू में दशमलव को जोड़ा नहीं जाता। ऐसे में एक सीट जीतने के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी।

बीजेपी के लिए क्या है 8वीं सीट की गणित

सत्तारूढ़ बीजेपी के पास इस समय 255 विधायक हैं। सहयोगी दलों के 33 सदस्य हैं। तीन असंबद्ध सदस्य भी बीजेपी के पाले में हैं। राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक भी अपने दो विधायकों का वोट बीजेपी को दिलाती रही है। ऐसे में सदस्य संख्या 293 पहुंचती है। इस तरह सात सीटों पर बीजेपी की जीत तय है और 8वीं के लिए उसके पास 34 अतिरिक्त वोट बचेंगे। अगर सुभासपा के दो विधायक पहले की तरह पाला बदलते हैं तो बीजेपी की गणित सपा के बागी विधायकों से सधेगी।

बीजेपी का झंडा लगाकर घूम रहे विनोद चतुर्वेदी

सपा के खाते में गिने जाने वाले विनोद चतुर्वेदी बीजेपी का झंडा लगाकर घूम रहे हैं। पूजा पाल पार्टी की पदाधिकारी ही बन चुकी है। ऐसे में 8वीं सीट के लिए आवश्यक संख्या तक एनडीए पहुंचता नजर आ रहा है। कमी की भरपाई दूसरे वरीयता के वोट से हो सकती है। इन हालात में पक्ष या विपक्ष से अतिरिक्त उम्मीदवार आने पर सेंधमारी का खेल दिख सकता है।

अतिरिक्त की दावेदारी कर पाएगी सपा ?

विधानसभा में इस समय सपा के पास 101 विधायक हैं। एक सीट के लिए 37 विधायकों की जरूरत होगी। ऐसे में 74 विधायकों से उसकी दो सीटें पक्की हो जाएंगी। वहीं, तीसरी सीट के लिए 27 वोट अतिरिक्त बचेंगे। कांग्रेस के पास दो विधायक है। फिलहाल दोनों दल इंडी गठबंधन का हिस्सा हैं। कांग्रेस का साथ मिलने पर 29 अतिरिक्त वोट हो जाएंगे। सुभासपा के दो विधायक पहले से सपा का झंडा लगाकर घूम रहे हैं। इनका साथ मिला तो आंकड़ा 31 पर पहुंच सकता है। इसमें किसी ने पाला नहीं बदला तो भी 6 अतिरिक्त वोट की जरूरत होगी। समस्या यह है कि सपा के खाते में गिने जा रहे, आशुतोष मौर्य, विनोद चतुर्वेदी, पूजा पाल और महाराजी प्रजापति ने बीजेपी उम्मीदवार को वोट दिया था।

लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें

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