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सपा के दिग्गज नेता और आठ बार के विधायक राम गोविंद चौधरी का निधन, लखनऊ के PGI में ली अंतिम सांस - sp leader ram govind chaudhary former lop passes away at pgi

सपा के दिग्गज नेता और आठ बार के विधायक राम गोविंद चौधरी का निधन, लखनऊ के PGI में ली अंतिम सांस सपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का लखनऊ के पीजीआई में उपचार के दौरान निध…

Jagran के अनुसार25 सितंबर 2026 को 06:04 pm बजे
सपा के दिग्गज नेता और आठ बार के विधायक राम गोविंद चौधरी का निधन, लखनऊ के PGI में ली अंतिम सांस - sp leader ram govind chaudhary former lop passes away at pgi

सौजन्य से:- Jagran

सपा के दिग्गज नेता और आठ बार के विधायक राम गोविंद चौधरी का निधन, लखनऊ के PGI में ली अंतिम सांस

सपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का लखनऊ के पीजीआई में उपचार के दौरान निधन हो गया।

HighLights

- सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन।

- लखनऊ के पीजीआई में उपचार के दौरान ली अंतिम सांस।

- आठ बार विधायक और उत्तर प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष रहे।

जागरण संवाददाता, बलिया। सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात 10. 15 बजे के करीब लखनऊ के पीजीआई में उपचार के दौरान निधन हो गया। सपा के नवागत जिला अध्यक्ष सुनील कुमार मौर्य ने बताया कि वह लखनऊ के लिए रवाना हो रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का नाम बलिया की राजनीति के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की विधानसभा की राजनीति में भी लंबे समय से जुड़ा रहा है।

छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले चौधरी ने कई दशकों तक विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। वे आठ बार विधायक रहे और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। विधानसभा के आधिकारिक रिकार्ड में उनके आठ कार्यकाल और विभिन्न महत्वपूर्ण पदों का उल्लेख है।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

राम गोविंद चौधरी का जन्म 7 सितंबर 1953 को बलिया के गोसाईपुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम स्व. द्वारिका चौधरी था। उन्होंने स्नातक के बाद एलएलबी की शिक्षा हासिल की। उत्तर प्रदेश विधानसभा के रिकार्ड में उनकी शैक्षणिक योग्यता स्नातक और एलएलबी दर्ज है। वे पेशे से अधिवक्ता रहे हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।

बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वे छात्रसंघ की राजनीति से जुड़े और बाद में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी सक्रिय रहे। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल जाना पड़ा था।

1977 में पहली बार बने विधायक

राम गोविंद चौधरी ने 1977 में चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने 1980, 1985 और 1989 में भी विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। 1991 में भी वे विधायक चुने गए। बाद के वर्षों में उन्होंने बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से चुनावी राजनीति की। विधानसभा की आधिकारिक प्रोफाइल उन्हें आठ बार निर्वाचित सदस्य के रूप में दर्ज करती है।

उनके राजनीतिक सफर में चंद्रशेखर और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं का भी प्रभाव रहा। उपलब्ध रिपोर्टों में चौधरी चंद्रशेखर को अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं।

मुलायम सिंह यादव की सरकार में रहे मंत्री

वर्ष 2002 के बाद राम गोविंद चौधरी समाजवादी राजनीति में और सक्रिय हुए। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में 2003 से 2007 तक मुलायम सिंह यादव मंत्रिमंडल में उनके रहने का उल्लेख है। इसके बाद अखिलेश यादव सरकार में भी उन्होंने मंत्री पद संभाला।

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। उनका राजनीतिक अनुभव सरकार के साथ-साथ संगठन और विधानसभा की कार्यवाही में भी इस्तेमाल हुआ।

2012 में बांसडीह से जीत दर्ज की थी

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। इसके बाद वे अखिलेश यादव सरकार में मंत्री बने। विधानसभा रिकार्ड में मार्च 2012 से मार्च 2017 तक अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में उनकी भूमिका दर्ज रही।

वर्ष 2017 में बने नेता प्रतिपक्ष

2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने विधानसभा में राम गोविंद चौधरी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक सूची में 27 मार्च 2017 से नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनका नाम दर्ज रहा।

नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभाई और सरकार की नीतियों तथा विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाए। विधानसभा रिकार्ड के अनुसार उनके नाम से 943 प्रश्न और 50 चर्चाएं दर्ज हैं।

2022 में चुनावी हार का करना पड़ा था सामना

2022 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने एक बार फिर बांसडीह सीट से सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह ने उन्हें पराजित किया था। बांसडीह में पहली बार भाजपा का खाता खुला और आठ बार विधायक रहे राम गोविंद चौधरी को हार का सामना करना पड़ा था।

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