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केंद्र में साथ-यूपी में अलग राह; NDA के सहयोगी दल क्यों बढ़ा रहे BJP की चुनावी चुनौती

केंद्र में साथ-यूपी में अलग राह; NDA के सहयोगी दल क्यों बढ़ा रहे BJP की चुनावी चुनौती सवाल यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ चलने वाले सहयोगी दल उत्तर प्रदेश में अधिक राजनीतिक स्पेस क्यों चाहते हैं? By ETV Bharat Uttar P…

ETV Bharat के अनुसार6 अगस्त 2026 को 07:18 am बजे
केंद्र में साथ-यूपी में अलग राह; NDA के सहयोगी दल क्यों बढ़ा रहे BJP की चुनावी चुनौती

सौजन्य से:- ETV Bharat

केंद्र में साथ-यूपी में अलग राह; NDA के सहयोगी दल क्यों बढ़ा रहे BJP की चुनावी चुनौती

सवाल यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ चलने वाले सहयोगी दल उत्तर प्रदेश में अधिक राजनीतिक स्पेस क्यों चाहते हैं?

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 6, 2026 at 8:10 AM IST

लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की आहट से प्रदेश की राजनीति में समीकरण बदलने लगे हैं. एक तरफ सपा-कांग्रेस के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट है. वहीं, दूसरी तरल एनडीए में शामिल दल भी सीट बंटवारे को लेकर दावे ठोंकने लगे हैं. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल दल एक तरह से भाजपा के साथ राजनैतिक सौदेबाजी के रास्ते पर हैं. ज्यादातर दल पिछले चुनाव से ज्यादा सीटों पर दावा कर रहे हैं. ऐसे में प्रदेश के राजनैतिक शतरंज पर मोहरों का खेल दिलचस्प हो गया है. लखनऊ से वरिष्ठ संवदातादाता अखिलेश्वर पांडेय की रिपोर्ट.

यूपी विधानसभा चुनाव में शामिल होने के लिए केंद्र में भाजपा की सहयोगी पार्टियां भी तैयार हैं. बिहार की जनता दल यूनाइटेड हो या लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) या फिर महाराष्ट्र की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) यूपी में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सक्रिय हो गए हैं. इन दलों के शीर्ष नेताओं ने न सिर्फ राज्य में संगठनात्मक गतिविधियां तेज की हैं, बल्कि बीजेपी के सामने सीटों की दावेदारी भी रखनी शुरू कर दी है.

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ चलने वाले सहयोगी दल उत्तर प्रदेश में अधिक राजनीतिक स्पेस क्यों चाहते हैं? और इसका भाजपा की चुनावी रणनीति पर क्या असर पड़ सकता है? यह भी तय है कि चुनाव से पहले कोई सामंजस्य बन जाए, लेकिन मौजूदा हालात में दावों की अनदेखी भी नहीं की जा सकती.

उत्तर प्रदेश में एनडीए के पहले से हीं कई साथी हैं, जिनकी डिमांड भी कम नहीं है. अपना दल (एस) से लेकर निषाद पार्टी, रालोद और सुभासपा जैसी पार्टियां पिछले विधानसभा चुनाव से ज्यादा सीटों की डिमांड करने ही लगे हैं. जिन दलों से अभी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को सीटों की डिमांड को लेकर कोई फिक्र नहीं थी, अब वह भी मैदान में हैं, जिसने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

दूसरे राज्यों के राजनीतिक पार्टियां भी यूपी में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए ताल ठोंकने लगे हैं. इनमें बिहार की जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और महाराष्ट्र की आरपीआई मुख्य हैं. यह तीनों पार्टियां केंद्र में एनडीए के साथ हैं, लेकिन अब उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक पारी खेलने के लिए बीजेपी से सीटों की डिमांड करने लगे हैं.

चिराग ने अपनाई प्रेशर पॉलिटिक्स: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्र की मोदी सरकार में राज्यमंत्री चिराग पासवान ने तो यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया है. पिछले महीने राजधानी लखनऊ में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन हुआ. इसमें चिराग पासवान ने शिरकत की थी.

इस दौरान चिराग ने पार्टी के नेताओं से संगठन मजबूत करने के साथ ही सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करने को कहा था. पार्टी ने एक नारा भी दिया था 'क्यों मांगे उधार, जब अपना नेता है तैयार'. चिराग ने स्पष्ट कर दिया था कि यूपी में सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे.

ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के सामने यह संकट खड़ा हो गया है कि चिराग पासवान की पार्टी अगर यूपी में चुनाव लड़ी तो दलित वोट बैंक में सेंध लग सकती है. भाजपा को इसका घाटा उठाना पड़ सकता है.

हालांकि, अभी चिराग पासवान के इस कदम को प्रेशर पॉलिटिक्स के रूप में देखा जा रहा है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पूर्वी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष राजीव पासवान कहते हैं कि विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सभी कार्यकर्ता बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में जुट गए हैं.

अब पासी-पासवान समाज को किसी दूसरे नेता की ओर देखने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके सुख-दुख में अब लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान खड़े हैं. राजीव पासवान का कहना है कि उत्तर प्रदेश की 403 में से 105 विधानसभा सीटों पर पासी-पासवान समाज हार-जीत तय कर सकता है.

जेडीयू की कम से कम 50 सीटों की मांग:केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के साथ ही बिहार में भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ताल ठोंकने को पूरी तरह तैयार है. बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री और जेडीयू के उत्तर प्रदेश प्रभारी श्रवण कुमार लगातार उत्तर प्रदेश में दौरे कर रहे हैं.

पिछले दिनों वह लखनऊ में आयोजित पार्टी के प्रादेशिक सम्मेलन में शिरकत करने आए थे. उन्होंने सभी सीटों पर संगठन को मजबूत करने के साथ ही चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा था. उत्तर प्रदेश में जनता दल यूनाइटेड भारतीय जनता पार्टी से 50 सीटों तक की डिमांड रखने के लिए तैयार है.

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल का कहना है कि हमारा प्रदेश भर में संगठन मजबूत है. बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड एक दूसरे के बिहार से लेकर केंद्र तक सहयोगी हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी हम साथी रहें. इसके लिए हम साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.

पार्टी की तरफ से भारतीय जनता पार्टी से 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए 50 सीटों की डिमांड की जाएगी. बात बनती है तो ठीक, नहीं तो नेतृत्व की तरफ से फैसला लिया जाएगा.

आरपीआई ने की 25 सीटों की डिमांड:उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मियों के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचे रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, केंद्र की मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने बड़ा एलान कर दिया है.

उन्होंने कहा कि वह 2027 में होने जा रहे यूपी विधानसभा चुनाव में 25 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे. उनकी पहली कोशिश यही है कि यूपी में बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा जाए. अगर उनकी 25 सीटों की मांग नहीं मानी जाती तो फिर उनकी पार्टी अकेले ही मैदान में उतरेगी.

उनका दावा है कि पार्टी का प्रदेश में संगठन मजबूत है. 25 सीटों पर अकेले दम चुनाव लड़कर कई सीटों पर जीत हासिल कर सकते हैं और कई सीटों पर जीत हार में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

आरपीआई के प्रदेश अध्यक्ष पवन गुप्ता का कहना है कि हम 25 सीटों पर काफी मजबूत स्थिति में हैं. संगठन लगातार इन सीटों पर सक्रिय है. हमारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी से 25 सीटों की डिमांड कर रही है. अगर बीजेपी ने इतनी सीटें नहीं दीं तो पार्टी अकेले ही विधानसभा चुनाव में ताल ठोकेगी.

यूपी में यह है बीजेपी के सहयोगी दल:राष्ट्रीय लोक दल ने भारतीय जनता पार्टी गठबंधन में अपनी मजबूत स्थिति का हवाला देते हुए 33 से ज्यादा सीटों चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश की है. इन सीटों पर संगठन को मजबूत करने की कवायद भी शुरू हो गई है, जबकि बीजेपी राष्ट्रीय लोकदल को 20 से 25 सीटें देने पर सहमत हो सकती है.

पार्टी अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बाहर निकलकर राज्य के अन्य हिस्सों में भी अपनी दावेदारी पेश कर रही है. दरअसल, 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था.

पार्टी ने 33 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें आरएलडी को 8 सीटों पर जीत मिली थी. लगभग 15 सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी. पार्टी ने करीब तीन फीसदी वोट शेयर हासिल किया था.

आरएलडी के नेताओं का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसका सामाजिक आधार मजबूत है, जिसका फायदा गठबंधन को चुनाव में मिल सकता है. पार्टी अब सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती.

पार्टी पूर्वांचल में भी अपनी सियासी जमीन तलाश रही है. आरएलडी वाराणसी, जौनपुर, बलिया और मिर्जापुर समेत कई जिलों में संगठन विस्तार और संभावित उम्मीदवारों के लिए सीटों की डिमांड कर रही है.

आरएलडी के प्रदेश अध्यक्ष अनुपम मिश्रा का कहना है कि राष्ट्रीय लोकदल का संगठन सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे प्रदेश में मजबूत है. आरएलडी बीजेपी का सहयोगी दल है. एनडीए में हम उत्तर प्रदेश के साथ ही केंद्र में भी पार्टनर हैं.

अब यूपी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ मिलकर लड़ेंगे. जहां तक सीटों की बात है यह तो राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को देखते हुए इस बार सीटों की डिमांड ज्यादा जरूर होगी.

लोकसभा चुनाव में किस दल को कितनी सीटें मिलीं:लोकसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी के 75 सीटों पर उम्मीदवार खड़े हुए थे. दो-दो सीटें राष्ट्रीय लोक दल और अपना दल (सोनेलाल) और एक-एक सीट सुभासपा और निषाद पार्टी के खाते में गई थी.

निषाद पार्टी की तरफ से अरविंद निषाद भाजपा के सिंबल पर चुनावी मैदान में उतरे थे. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जनता दल यूनाइटेड और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया की लोकसभा चुनाव में कोई दावेदारी नहीं थी.

बीजेपी पर बढ़ सकता है सीटों का दबाव: यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा ने 403 में से 370 सीटों पर लड़ा था. बीजेपी ने 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी. 2017 में भाजपा ने 312 सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि, पार्टी लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापस आई.

2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की कोशिश 350 से अधिक सीटों पर ताल ठोंकने की होगी. हालांकि, इस बार अन्य सहयोगी दलों के बढ़ने से सीटों की संख्या में हेरफेर भी करना पड़ सकता है.

अपना दल को दी थीं 17 सीटें:अपना दल (सोनेलाल) लोकसभा चुनाव 2014 से ही भाजपा की सहयोगी है. विधानसभा चुनाव 2022 में अपना दल (एस) को गठबंधन के तहत भाजपा ने 17 सीटें दी थीं. 12 सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार जीत हासिल करने में सफल हुए थे.

निषाद पार्टी को 16 सीटें मिली थीं: योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद की पार्टी अधिक सीटों पर दावे कर रही है. यूपी चुनाव 2022 में निषाद पार्टी को गठबंधन के तहत 16 सीटें मिली थीं. पार्टी के 6 उम्मीदवार भाजपा के सिंबल पर चुनावी मैदान में उतरे थे. पार्टी ने 6 सीटों पर जीत हासिल की थी. इस बार पार्टी की उम्मीद कुछ सीटें बढ़ने की है.

8 सीटों की डिमांड कर सकते हैं राजभर: यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी एनडीए के बैनर तले एक बार फिर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. यूपी चुनाव 2017 में सुभासपा भाजपा के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरी थी.

उस समय एनडीए के सहयोगी सुभासपा को 8 सीटें मिली थीं. पार्टी ने 4 सीट पर जीत दर्ज की थी. 2022 में सुभासपा समाजवादी पार्टी गठबंधन का हिस्सा थी. पार्टी को गठबंधन के तहत 18 सीटें मिली थीं. 6 सीटों पर पार्टी को जीत मिली थी.

सुभासपा एक बार फिर कम से 18 सीटों पर अपना दावा ठोक सकती है. हालांकि, इस बारे में जब सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से बात की गई तो उनका कहना है कि अभी चुनाव में थोड़ा समय है. पास आने पर सीटों को लेकर बात की जाएगी.

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