गोमती की बाढ़ से लखनऊ को बचाने का CM योगी का महाप्लान, 2000 करोड़ से नैमिषारण्य तक बनेगा 115 KM लंबा सुरक्षा बांध
लखनऊ को बाढ़ से बचाने के लिए फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य तक 2 हजार करोड़ की लागत से 115 किमी लंबा तटबंध बनेगा। LDA व सिंचाई विभाग इसकी डीपीआर बनाएंगे। हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के उत्तरी और पश्…

सौजन्य से:- Navbharat Times
लखनऊ को बाढ़ से बचाने के लिए फैजुल्लागंज से नैमिषारण्य तक 2 हजार करोड़ की लागत से 115 किमी लंबा तटबंध बनेगा। LDA व सिंचाई विभाग इसकी डीपीआर बनाएंगे।
हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से के अलग-अलग इलाकों को गोमती नदी में आई बाढ़ से जूझना पड़ रहा है। इसे लेकर प्रदेश की योगी सरकार की ओर से विनाशकारी बाढ़ और जलभराव की सालाना त्रासदी से स्थायी राहत दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक विस्तृत सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत फैजुल्लागंज से लेकर धार्मिक तीर्थस्थल नैमिषारण्य तक करीब 115 किलोमीटर लंबा बाढ़ सुरक्षा तटबंध बनाया जाएगा।
बताया जाता है कि इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण पर करीब 2 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च होगी। प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए LDA और सिंचाई विभाग को संयुक्त जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों विभागों के इंजीनियरों की टीम ने मिलकर परियोजना की DPR तैयार करने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
स्टेट कैपिटल रीजन में शामिल करने की तैयारी
इस परियोजना को निर्बाध रफ्तार देने के लिए इसे स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) योजना का हिस्सा बनाकर चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। परियोजना के समयबद्ध पर्यवेक्षण और तकनीकी तालमेल को बनाए रखने के लिए इस पूरे प्रोजेक्ट को सिंगल नोडल एजेंसी के रूप में LDA के जरिए संचालित करने की योजना बनाई गई है। इससे निर्माण, गुणवत्ता और निगरानी का कार्य एक ही छत के नीचे पारदर्शी रूप से संचालित हो सकेगा। शासन स्तर से सिंगल-विंडो सिस्टम की मंजूरी और बजट की शुरुआती किस्त जारी होते ही टेंडर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
दो हिस्सों में बंटा निर्माण कार्य
परियोजना को कार्य संचालन की दृष्टि से दो प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है। प्रथम चरण के अंतर्गत ग्रीन कॉरिडोर से पक्का पुल तक के हिस्से के निर्माण का जिम्मा लखनऊ विकास प्राधिकरण को दिया गया है, जिस पर करीब 182 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। वहीं, दूसरे चरण में IIM रोड स्थित ग्रीन कॉरिडोर से लेकर नैमिषारण्य तक के 115 किलोमीटर लंबे नदी तट के दूसरे हिस्से की जिम्मेदारी फिलहाल सिंचाई विभाग को सौंपी गई है। सिंचाई विभाग की ओर से गोमती नदी के प्रस्तावित बहाव क्षेत्र और जमीनी स्थिति का तकनीकी सर्वे शीघ्र शुरू किया जाएगा।
तटबंध पर बनेगी 4 से 6 लेन सड़क
इस सुरक्षा बांध के धरातल पर उतरने से फैजुल्लागंज, घैला और आसपास के निचले रिहायशी इलाकों को गोमती नदी के उफनते जलस्तर से संपूर्ण सुरक्षा कवच मिलेगा। इससे न केवल सैकड़ों परिवारों के हर साल होने वाले बेघर होने और विस्थापन का संकट समाप्त होगा, बल्कि जान-माल का नुकसान भी पूरी तरह टल जाएगा। सुरक्षा के साथ-साथ इस तटबंध के शीर्ष पर 4 से 6 लेन की नई सड़क बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसे ग्रीन कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। यह सड़क आईआईएम रोड, फैजुल्लागंज, पक्का पुल और नैमिषारण्य के बीच सीधे संपर्क का नया माध्यम बनेगी, जिससे धार्मिक पर्यटन और आम आवागमन दोनों को नई गति मिलेगी।
जमीन अधिग्रहण होगा मुख्य चुनौती
इतने बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में कई तकनीकी व प्रशासनिक चुनौतियां भी सामने आएंगी। करीब 115 किलोमीटर के लंबे दायरे में हजारों किसानों की कृषि भूमि और घनी आबादी आने की स्थिति में जमीन अधिग्रहण और स्थानीय नागरिकों के पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। इसके अतिरिक्त नदी के फ्लड-प्लेन के मूल स्वरूप में बदलाव और वृक्षों की कटाई को ध्यान में रखते हुए वन एवं पर्यावरण विभाग से आवश्यक क्लीयरेंस और वैधानिक अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करने होंगे। इसके साथ ही भविष्य में तटबंध के नियमित रखरखाव, सुरक्षा बजट और नदी के दूसरे किनारे पर भी सुरक्षा बांध निर्माण की उठने वाली मांगों का संतुलन बनाना शासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।
लेखक के बारे मेंविवेक मिश्राविवेक कुमार मिश्रा (Vivek Kumar Mishra) नवभारत टाइम्स ऑनलाइन (NBT.Com) में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक-सियासी हलचल पर नजर रखते हैं। यूपी राजनीतिक विश्लेषण, उत्तर प्रदेश में हो रही घटनाओं पर नजर रखते हैं। उत्तर प्रदेश में अपराध, प्रशासन, डेवलपमेंट, यूपी सरकारी योजनाओं पर फोकस रखते हैं। उत्तराखंड की राजनीति हलचल, विश्लेषण, अपराध और घटनाक्रम पर भी विवेक कुमार मिश्रा फोकस रखते हैं।
अनुभव
यूपी के लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा और नोएडा में हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक जागरण जैसे प्रिंट मीडिया में काम कर चुके हैं। दिसंबर 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के साथ जुड़े हैं। पत्रकारिता में 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसमें डेस्क और फील्ड दोनों में काम किया है।
शिक्षा
राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) में परास्नातक किया हुआ है। विवेक कुमार मिश्रा मूल रूप से यूपी के बाराबंकी जिले के रहने वाले हैं।... और पढ़ें
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