कौन हैं विश्वभूषण मिश्रा? काशी विश्वनाथ मंदिर CEO से हटाए गए; मां ने कहा था- कुछ बड़ा बन जाना तो बताना
कौन हैं विश्वभूषण मिश्रा? डॉ. विश्वभूषण मिश्रा 2012 बैच के उत्तर प्रदेश पीसीएस अधिकारी हैं। 18 जनवरी 1984 को उनका जन्म हुआ था। यूपी पीसीएस अधिकारी के तौर पर उनकी नियुक्ति 15 सितंबर 2012 को हुई थी। अभी वे काशी विश्वनाथ मं…

सौजन्य से:- Navbharat Times
कौन हैं विश्वभूषण मिश्रा?
डॉ. विश्वभूषण मिश्रा 2012 बैच के उत्तर प्रदेश पीसीएस अधिकारी हैं। 18 जनवरी 1984 को उनका जन्म हुआ था। यूपी पीसीएस अधिकारी के तौर पर उनकी नियुक्ति 15 सितंबर 2012 को हुई थी। अभी वे काशी विश्वनाथ मंदिर एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण वाराणसी में सीईओ का पद संभाल रहे थे। पीसीएस अधिकारी बनने के बाद उनकी ट्रेनिंग गाजीपुर डिप्टी कलेक्टर के तौर पर हुई थी।डॉ. मिश्रा ने इससे पहले वाराणसी एडिशनल कमिश्नर, नागर विमानन विभाग में प्रभारी अतिरिक्त निदेशक लखनऊ, एडीएम लखनऊ, कृषि विभाग में उप निदेशक, प्रयागराज सिटी मजिस्ट्रेट, एलडीए में नजुल अफसर, खेल विभाग में सहायक निदेशक, मथुरा डिप्टी कलेक्टर का पद संभाला है।
बचपन में उठा पिता का साया
विश्वभूषण मिश्रा के पिता सरकारी स्कूल में गणित के शिक्षक थे। उनकी वजह से उन्हें कभी भी गणित से डर नहीं लगा। हालांकि, स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया। उनका बचपन अयोध्या के गांव की गलियों में बीता। शुरुआती दौर में उन्होंने अपना लक्ष्य कभी भी प्रशासनिक सेवा को नहीं रखा था। दोस्तों के बीच एक शर्त लगी और वह पीसीएस परीक्षा क्लियर कर डिप्टी कलेक्टर बन गए।दरअसल, वर्ष 2007 में 27 दिसंबर की शाम लखनऊ यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई कर रहे विश्वभूषण मिश्रा दोस्तों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान आईएएस और पीसीएस को लेकर उन्होंने कहा कि यह बनना उतना भी मुश्किल नहीं है। इस पर उनके एक दोस्त ने उन्हें चुनौती दे दी कि अगर उन्हें आसान लगता है तो वह क्यों नहीं बन जाते। इसे उन्होंने चुनौती के रूप में अपने दिल पर ले लिया।
2008 में भरा फॉर्म, करने लगे नौकरी
विश्वभूषण मिश्रा ने तैयारी शुरू की। 2008 में यूपीपीएससी पीसीएस का फॉर्म भरा। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में सफलता मिल गई। 2009 में इंटरव्यू भी दे दिया। उन्हें रिजल्ट का इंतजार था। इसी दौरान उन्होंने यूपीएससी पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया। एलएलएम की पढ़ाई के दौरान उनका चयन भारत सरकार की एक नवरत्न कंपनी में लीगल अफसर के पद पर हुआ। वह नौकरी करने कुल्लू चले गए। नौकरी के दौरान वे छुट्टियों में दिल्ली आते और अपनी परीक्षा की तैयारी को आगे बढ़ते रहे।विश्वभूषण मिश्रा को इसी दौरान यूपीएससी परीक्षा में भी सफलता मिली। उनका चयन पार्लियामेंट्री अफसर के रूप में हो गया। इसके बाद वे कुल्लू से दिल्ली आ गए। दिल्ली में नौकरी के दौरान एक बार वह छुट्टी लेकर अयोध्या आए हुए थे। घर पर उन्हें फोन आया कि आपका यूपीपीएससी पीसीएस में सेलेक्शन हो गया है। उन्होंने इस परीक्षा में तीसरा रैंक हासिल किया था।
मां की अलग थी प्रतिक्रिया
यूपीपीएससी का रिजल्ट सुनते ही विश्वभूषण मिश्रा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह भाग कर अपनी मां के पास पहुंचे। उस समय उनकी मां अपने पड़ोस की महिलाओं के साथ बातचीत में व्यस्त थीं। उन्होंने मां का पैर छुए और कहा, मैं डिप्टी कलेक्टर बन गया हूं। मां को तब बात समझ नहीं आई ।उन्होंने कहा कि हां जाओ, कुछ बड़ा बन जाना, तब बताना। विश्वभूषण मिश्रा उस समय केवल मुस्कुरा सके।अगले दिन अखबार में विश्वभूषण मिश्रा की खबर छपी। इसके बाद उनके घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। मां को इसके बाद बेटे की सफलता का अहसास हुआ। विश्वभूषण मिश्रा के पास इसके बाद दिल्ली में रहकर नौकरी करने या जनता के बीच काम करने का चुनाव करना था। उन्होंने एसडीएम बनने का फैसला लिया और दिल्ली छोड़कर पीसीएस अधिकारी का पद स्वीकार कर लिया।
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