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'हमारे विधायक होते तो मस्जिद में ही लेट जाते, पर गिरने नहीं देते', सहारनपुर में AIMIM का बड़ा बयान

AIMIM के प्रवक्ता और अधिवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। शादाब चौहान ने कहा कि आज ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का एक डेलिगेशन सहारनपुर पहुंचा है। ज…

Navbharat Times के अनुसार10 सितंबर 2026 को 11:04 am बजे
'हमारे विधायक होते तो मस्जिद में ही लेट जाते, पर गिरने नहीं देते', सहारनपुर में AIMIM का बड़ा बयान

सौजन्य से:- Navbharat Times

AIMIM के प्रवक्ता और अधिवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। शादाब चौहान ने कहा कि आज ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का एक डेलिगेशन सहारनपुर पहुंचा है। जिसमें वकील शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सहारनपुर की मस्जिद का डिमोलिशन किया गया, वह पूरी तरीके से दुर्भावना में की गई कार्रवाई प्रतीत होती है।

आदेश में कहीं भी डिमोलिशन का जिक्र नहीं था

AIMIM प्रवक्ता ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यहां के जनप्रतिनिधि नाकाम रहे। जो मुसलमानों का वोट लेते हैं, वे भी मस्जिद की रक्षा करने में नाकाम रहे। शादाब चौहान ने कहा कि आपने सांसद और विधायक की बात की, लेकिन यहां सांसद भी हैं और दो विधायक भी हैं। इसके बावजूद मैं कह रहा हूं कि यह उनकी नाकामी है। उन्होंने कहा कि अगर वह मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के विधायक और सांसद होते तो मस्जिद में लेट जाते, क्योंकि कोई आदेश ही नहीं था।शादाब चौहान ने कहा कि जो आदेश था, उसमें कहीं भी डिमोलिशन का जिक्र नहीं था। दूसरी बात, जो समय दिया जाना चाहिए था, जो मिनिमम 15 से 90 दिन तक की प्रक्रिया का जिक्र है, वह नहीं किया गया। उनके मुताबिक यह पूरी तरह से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत यानी Principles of Natural Justice का उल्लंघन है।

उन्होंने कहा कि इसमें कानून के आखिरी उपाय तक जाने का अवसर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई इतिहास नहीं है कि जिला अदालत में किसी व्यक्ति को सजा-ए-मौत दी गई हो और वह तुरंत अमल में आ गई हो। आज तक ऐसा कोई इतिहास नहीं है। उनके मुताबिक यह भी प्रक्रिया का उल्लंघन है।

मालिकाना हक का सवाल कैसे खड़ा हो रहा

उन्होंने कहा कि वर्ष 1960 में यूनियन द्वारा मस्जिद के साथ लीज की गई थी। उन्होंने सवाल किया कि जब लीज की गई तो मालिक से ही की गई होगी, फिर मालिकाना हक का सवाल कैसे खड़ा हो रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए कानून का दुरुपयोग करना चाहती है। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार का हवाला देते हुए कहा कि कानून कितना भी अच्छा बना लिया जाए, अगर उसको लागू करवाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे तो अंत में उसका परिणाम भी खराब ही होगा।कुएं को लेकर भी सवाल

कुएं को लेकर हिंदू संगठनों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर शादाब चौहान ने कहा कि पहली बात यह है कि जो पुराना स्ट्रक्चर है, वहां कुआं होना सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि अगर कुआं है और कोई व्यक्ति उसका दावा भी कर रहा है, और दो मिनट के लिए उसके झूठे दावे को सही भी मान लिया जाए, तो क्या इससे वहां बना पूरा स्ट्रक्चर वैध हो जाएगा?उन्होंने कहा कि जो भी संभव होगा, हम लोग उसी के लिए रिसर्च करेंगे और सभी तथ्यों को लेकर जो भी कानूनी कदम उठाना होगा, उसके लिए हम यहां आए हैं। AIMIM के नेताओं और अधिवक्ताओं ने कहा कि सहारनपुर मस्जिद प्रकरण में वह मस्जिद कमेटी के साथ समन्वय कर पूरे मामले के दस्तावेज जुटाएंगे और कानूनी विकल्पों पर विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।

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