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आगरा पुलिस कमिश्नर की हाजिरी माफी की अर्जी नामंजूर, हाईकोर्ट में तलब, डीजीपी को तलब करने की चेतावनी

आगरा पुलिस कमिश्नर की हाजिरी माफी की अर्जी नामंजूर, हाईकोर्ट में तलब, डीजीपी को तलब करने की चेतावनी कोर्ट ने उन्हें एक और मौका देते हुए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है. By ETV Bharat Utta…

ETV Bharat के अनुसार21 अगस्त 2026 को 06:55 pm बजे
आगरा पुलिस कमिश्नर की हाजिरी माफी की अर्जी नामंजूर, हाईकोर्ट में तलब, डीजीपी को तलब करने की चेतावनी

सौजन्य से:- ETV Bharat

आगरा पुलिस कमिश्नर की हाजिरी माफी की अर्जी नामंजूर, हाईकोर्ट में तलब, डीजीपी को तलब करने की चेतावनी

कोर्ट ने उन्हें एक और मौका देते हुए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 21, 2026 at 11:10 PM IST

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में निर्देशों का अनुपालन करने में देरी और अदालत में उचित सहयोग नहीं करने पर आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की ओर से दाखिल माफी आवेदन को फिलहाल खारिज कर दिया है. कोर्ट ने उन्हें एक और मौका देते हुए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई आठ सितंबर 2026 को होगी.

न्यायमूर्ति हरवीर सिंह ने श्याम बाबू व तीन अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 18 अगस्त 2025 के आदेश के बावजूद पुलिस कमिश्नर ने संबंधित रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखने में करीब एक वर्ष लगा दिया. अपर महाधिवक्ता ने कमिश्नर की ओर से 3 अक्तूबर 2025 को सरकारी अधिवक्ता को लिखे पत्र को रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महज पत्र को स्वतंत्र रिपोर्ट नहीं माना जा सकता.

कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वह अदालत में वास्तविक रिपोर्ट पेश करें. साथ ही जांच करने वाले अधिकारी का नाम और पद तथा जांच के लिए अधिकारी को अधिकृत अथवा नामित करने संबंधी आदेश भी रिकॉर्ड पर रखें. सुनवाई के दौरान अपर पुलिस आयुक्त सचिंद्र पटेल और एसीपी गौरव सिंह ने अदालत के सवालों पर बताया कि वे मामले के तथ्यों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं और न ही इस मामले से जुड़े रहे हैं. इस पर कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से स्पष्टीकरण मांगा कि ऐसे अधिकारियों को अदालत में क्यों भेजा गया, जो मामले से परिचित ही नहीं थे.

कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना मामले की जानकारी वाले अधिकारियों को अदालत भेजना राज्य मशीनरी के उचित उपयोग के विपरीत और अनावश्यक कवायद है. अदालत ने ऐसे अधिकारियों को प्रयागराज आने के लिए यात्रा भत्ता या अन्य सुविधा देने से भी इनकार कर दिया और उनकी अदालत यात्रा को नियमित ड्यूटी माना. कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस कमिश्नर अगली तारीख पर उपस्थित नहीं होते हैं तो अदालत पुलिस महानिदेशक को उचित सहायता के लिए तलब करने के लिए बाध्य होगी. अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी के विशेष अनुरोध पर मामले को आठ सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है.

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