कागज़ पर 6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, पर गांवों का सच क्या? उत्तर प्रदेश के सामाजिक विकास की इनसाइड स्टोरी
कागज़ पर 6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, पर गांवों का सच क्या? उत्तर प्रदेश के सामाजिक विकास की इनसाइड स्टोरी जानिए शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च के साथ उत्तर प्रदेश के वित्तीय संतुलन का पूरा विश…

सौजन्य से:- ETV Bharat
कागज़ पर 6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, पर गांवों का सच क्या? उत्तर प्रदेश के सामाजिक विकास की इनसाइड स्टोरी
जानिए शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च के साथ उत्तर प्रदेश के वित्तीय संतुलन का पूरा विश्लेषण.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 20, 2026 at 2:28 PM IST
लखनऊ: जब उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना विधानसभा में 9.12 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट पढ़ रहे थे, तो उसकी दो तस्वीरें थीं. एक तरफ गोरखपुर-सहारनपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर और जेवर एयरपोर्ट जैसी कंक्रीट की भव्य संरचनाएं थीं, तो दूसरी तरफ करोड़ों महिलाओं, वृद्धों और छात्रों को सीधे बैंक खातों में भेजी जाने वाली पेंशन और अनुदान की रकम. सरकार का दावा है कि इन योजनाओं ने यूपी के 6 करोड़ लोगों को गरीबी की दलदल से बाहर खींचा है.
लेकिन वित्तीय गलियारों में एक बुनियादी सवाल गूंज रहा है—क्या बिना अपने राजस्व को दोगुना किए, केंद्र की मदद पर टिकी यूपी की यह कल्याणकारी इकोनॉमी लंबे समय तक टिकी रह पाएगी? और क्या कंक्रीट की इस तेज रफ्तार के बीच सूबे के अस्पतालों, स्कूलों और कुपोषित बच्चों की तकदीर सचमुच बदल रही है? पेश है आशुतोष सहाय के संपादन में संवाददाता प्रशांत मिश्र की यूपी के सामाजिक विकास के जमीनी सच दिखाने वाली स्पेशल रिपोर्ट:
उत्तर प्रदेश का बजट और बढ़ता सामाजिक खर्च: उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार लगातार बढ़ रहा है और इसी के साथ सरकार का सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च भी बढ़ रहा है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य का बजट बढ़कर 9.12 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इसमें 6.64 लाख करोड़ रुपये राजस्व खर्च और 2.48 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए रखे गए हैं. सरकार ने 2026-27 में 64,458 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष अनुमानित किया है, जबकि राजकोषीय घाटा 1,18,481 करोड़ रुपये यानी GSDP का 3 प्रतिशत रखा गया है.
कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय अनुशासन का संतुलन: फिलहाल सरकार ने कल्याणकारी खर्च और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने का दावा किया है. लेकिन यूपी की सामाजिक विकास की तस्वीर केवल यह देखकर पूरी नहीं समझी जा सकती कि सरकार कितने करोड़ रुपये खर्च कर रही है. असली तस्वीर यह है कि इस खर्च से गरीब परिवारों, बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों, किसानों और ग्रामीण परिवारों के जीवन में कितना बदलाव आया है. क्या बढ़ती कल्याणकारी योजनाओं का खर्च भविष्य में भी राज्य की वित्तीय क्षमता के भीतर रह सकता है?
2026-27 के बजट का मुख्य ढांचा: 2026-27 में उत्तर प्रदेश सरकार ने कुल 9,12,696 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है. इसमें राजस्व व्यय 6,64,471 करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय 2,48,226 करोड़ रुपये है. सरकार ने इसी बजट में 43,565 करोड़ रुपये की नई योजनाओं का भी प्रावधान किया है. लखनऊ विश्वविद्यालय के इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट की विभागाध्यक्ष प्रो रोली मिश्रा का कहना है कि सामाजिक क्षेत्र को देखें तो सामाजिक कल्याण और पोषण के लिए करीब 42,263 करोड़ रुपये का प्रावधान है.
सामाजिक कल्याण, पेंशन और ग्रामीण विकास: इसमें वृद्धावस्था, किसान पेंशन के लिए 8,950 करोड़ रुपये और निराश्रित महिला पेंशन योजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये शामिल हैं. ग्रामीण विकास के लिए करीब 49,044 करोड़ रुपये रखे गए हैं. इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए 6,102 करोड़, मनरेगा के लिए 5,544 करोड़ और आजीविका मिशन के लिए 4,580 करोड़ रुपये शामिल हैं. सामाजिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण दो बुनियाद शिक्षा और स्वास्थ्य हैं.
शिक्षा और स्वास्थ्य बजट में भारी बढ़ोतरी: 2026-27 में शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति के लिए करीब 1,08,154 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. यह पिछले साल के संशोधित अनुमान से करीब 28 प्रतिशत ज्यादा है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 53,326 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से करीब 24 प्रतिशत अधिक है. स्वास्थ्य बजट में शहरी एलोपैथिक सेवाओं के लिए 5,793 करोड़ रुपये और ग्रामीण एलोपैथिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 6,818 करोड़ रुपये रखे गए हैं.
राज्य के राजस्व स्रोत और आत्मनिर्भरता: सरकार का सामाजिक खर्च केवल पेंशन या नकद सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आवास, पोषण और रोजगार कार्यक्रम भी इसी व्यापक सामाजिक विकास का हिस्सा हैं. प्रो एमके अग्रवाल (पूर्व एचओडी, डिपार्टमेंट आफ इकोनॉमिक्स, लविवि) के अनुसार 2026-27 में उत्तर प्रदेश की अनुमानित राजस्व प्राप्तियां 7,28,928 करोड़ रुपये हैं. इनमें राज्य की अपनी कर और गैरकर आय करीब 3,61,245 करोड़ रुपये, जबकि केंद्र से मिलने वाले संसाधन करीब 3,67,683 करोड़ रुपये हैं. यानी राज्य की राजस्व प्राप्तियों में करीब आधा हिस्सा अपने संसाधनों से और करीब आधा हिस्सा केंद्र से आने वाले कर हिस्से और अनुदान से आता है.
प्रतिबद्ध खर्चों का बढ़ता दबाव: इसका अर्थ यह नहीं है कि कल्याणकारी योजनाएं अस्थिर हैं, लेकिन लंबे समय तक इन योजनाओं को बढ़ाने के लिए राज्य को अपनी खुद की आय भी उसी अनुपात में बढ़ानी होगी. राज्य के बजट में सबसे बड़ा दबाव केवल कल्याणकारी योजनाओं का नहीं है. सरकार के लिए वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान भी बड़ा प्रतिबद्ध खर्च है. 2026-27 में इन तीन मदों पर करीब 3,53,743 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
राजस्व अधिशेष और राजकोषीय घाटे का गणित: 2026-27 में यूपी ने 64,458 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष अनुमानित किया है. इसका सीधा मतलब है कि सरकार की राजस्व प्राप्तियां उसके राजस्व खर्च से ज्यादा रहने का अनुमान है. दूसरी तरफ 1,18,481 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा है, जो GSDP का करीब 3 प्रतिशत है. राजस्व अधिशेष का होना बताता है कि सरकार अपने नियमित खर्चों को नियमित आय से पूरा कर रही है, जबकि राजकोषीय घाटा उधारी की जरूरत को दिखाता है.
मानव पूंजी और आर्थिक क्षमता का निर्माण: एमके अग्रवाल का कहना है कि कल्याणकारी योजनाओं को आर्थिक बोझ मानना सही नहीं होगा. यदि किसी गरीब परिवार को पेंशन, आवास, पोषण, शिक्षा या स्वास्थ्य सुरक्षा मिलती है तो इसका तत्काल सामाजिक लाभ होता है. लेकिन आर्थिक दृष्टि से अंतर इस बात से पड़ता है कि योजना खर्च बढ़ाती है या व्यक्ति की आर्थिक क्षमता भी बढ़ाती है. मसलन, कौशल, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला रोजगार और MSME सहायता जैसी योजनाएं भविष्य में व्यक्ति की कमाई बढ़ा सकती हैं, इसलिए यूपी के खर्च को सृजित आय और रोजगार के आधार पर देखना होगा.
गरीबी में कमी और सामाजिक असमानता की चुनौती: नीति आयोग के SDG इंडिया इंडेक्स के अनुसार भारत में बहुआयामी गरीबी 2015-16 के 24.8 प्रतिशत से घटकर 2019-21 में 14.96 प्रतिशत हुई और 2022-23 में 11.28 प्रतिशत तक आने का अनुमान है. हालांकि यह आंकड़ा पूरे भारत का है, लेकिन राज्य स्तर पर भी बुनियादी सेवाओं में सुधार दिखाई देता है. इससे यह संकेत मिलता है कि सरकारी योजनाओं और सेवाओं के विस्तार का सामाजिक असर पड़ा है. हालांकि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए जिलावार और समूहवार सामाजिक असमानता को देखना जरूरी है.
शिक्षा और पोषण योजनाओं का विशाल दायरा: भारत सरकार के UDISE+ 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार यूपी के सरकारी स्कूलों में लगभग 1.22 करोड़ विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज है. इसके अलावा PM POSHAN के आधिकारिक पोर्टल पर जुलाई 2026 में यूपी के लिए करीब 1.71 करोड़ विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज था. इससे समझा जा सकता है कि राज्य में शिक्षा और पोषण योजनाओं का पैमाना कितना बड़ा है. अब चुनौती सिर्फ बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता, सीखने के स्तर और रोजगार से शिक्षा को जोड़ने की है.
ग्रामीण स्वास्थ्य और जमीनी विकास की जरूरत: 2026-27 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 53,326 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें ग्रामीण एलोपैथिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 6,818 करोड़ रुपये शामिल हैं. यूपी जैसे विशाल राज्य में स्वास्थ्य खर्च का असली प्रभाव तभी दिखाई देगा जब इसका फायदा CHC और PHC तक पहुंचे. शहरी क्षेत्रों में बड़े मेडिकल संस्थानों का विस्तार जरूरी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टर, नर्स, दवा और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता ज्यादा सीधा पैमाना है. ग्रामीण विकास के लिए 49,044 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें मनरेगा और आजीविका मिशन मुख्य हैं.
खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत नेटवर्क: स्थायी सुधार तभी होगा जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, छोटे उद्योग और स्वयं सहायता समूह बढ़ें. कल्याणकारी योजना से सुरक्षा मिलती है, लेकिन रोजगार और आय से आत्मनिर्भरता आती है. प्रो एमके अग्रवाल का कहना है कि राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली भी सामाजिक सुरक्षा का बड़ा आधार है. AePDS पोर्टल के जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार करीब 3.33 करोड़ राशन कार्डों पर लेनदेन दर्ज हुआ और 78 हजार से अधिक राशन दुकानों का नेटवर्क सक्रिय है.
कल्याणकारी राज्य का भावी दृष्टिकोण: उत्तर प्रदेश की मौजूदा नीति में कल्याणकारी योजनाओं और आर्थिक विकास को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. एक तरफ सरकार सड़क, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और निवेश पर पैसा खर्च कर रही है, तो दूसरी तरफ शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर बड़ा खर्च हो रहा है. यह मॉडल तभी आर्थिक रूप से टिकाऊ होगा जब कल्याणकारी खर्च धीरे-धीरे मानव पूंजी और उत्पादकता बढ़ाने वाला खर्च बनता जाए. प्रो रोली मिश्रा का कहना है कि 3 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा वित्तीय स्थिति को नियंत्रित दिखाता है, लेकिन प्रतिबद्ध खर्च में 25 प्रतिशत की वृद्धि भविष्य की चुनौती भी है.
सहायता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: पेंशन खर्च में 2026-27 के लिए 43 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, इसलिए राज्य को अपनी कर आय बढ़ानी होगी. व्यापारी नेता संजय गुप्ता का कहना है कि लगातार मुफ़्त योजनाएं देना अर्थव्यवस्था के लिए उचित नहीं है, क्योंकि इससे निर्भरता बढ़ती है. व्यापारी रजनीकांत राय ने भी कहा कि अत्यधिक सब्सिडी से अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है और काम के प्रति प्रेरणा कम हो सकती है. इसलिए सरकार का अगला चरण सिर्फ सहायता देने का नहीं, बल्कि सहायता को शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और रोजगार में बदलकर लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का होना चाहिए.
क्या लंबी अवधि में टिकाऊ है यूपी का वित्तीय ढांचा:उत्तर प्रदेश की समाज कल्याण यात्रा एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है. आंकड़ों के आईने में राजकोषीय घाटे को 3% के दायरे में बांधकर सरकार ने अपनी वित्तीय बुद्धिमत्ता तो साबित की है, लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की क्रय शक्ति और जीवन स्तर केवल मुफ्त योजनाओं के सहारे हमेशा के लिए नहीं सुधारा जा सकता. जब तक स्वास्थ्य का बजट 6% से ऊपर नहीं उठेगा और प्राथमिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार नहीं होगा, तब तक मानव पूंजी का निर्माण अधूरा रहेगा. यूपी ने अपनी तिजोरी का संतुलन तो साध लिया है, अब चुनौती इस खजाने से निकलने वाली हर बूंद को जमीन पर वास्तविक खुशहाली और इंसानी तरक्की में बदलने की है.
आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि मुफ़्त राशन, पेंशन और स्मार्टफोन जैसी योजनाएं उत्तर प्रदेश को एक टिकाऊ आर्थिक महाशक्ति बना पाएंगी? क्या आपके गांव या शहर के सरकारी अस्पतालों और स्कूलों की स्थिति सुधरी है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें और इस गंभीर ग्राउंड ऑडिट को शेयर करें.
यह भी पढ़ें- $1 ट्रिलियन इकोनॉमी का 'यूपी मॉडल': क्या 2027 तक पूरा होगा मुख्यमंत्री का सबसे बड़ा सपना? देखें ग्राउंड एसेसमेंट
यह भी पढ़ें- महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु बनाम यूपी: आर्थिक महाशक्ति बनने की रेस में उत्तर प्रदेश कितना आगे, कितना पीछे?
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

गाय खरीदने को 11.80 लाख रुपये दे रही योगी सरकार, जानें क्या है मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना

बारिश रुकने का इंतजार करती रही लखनऊ, मैदान पर रिंकू सिंह ने छक्कों की बरसात कर छीन ली जीत - meerut mavericks vs lucknow falcons up t20 league 2026 rinku singh

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने 7 सीनियर नेताओं को दी ये जिम्मेदारी


