होमराजनीतिखतरे में धरोहरें: राष्ट्रीय महत्व के 414 संरक्षित स्थल अतिक्रमण के शिकार, सबसे आगे उत्तर प्रदेश - 414 ancient monuments encroached in india up leads list
राजनीति

खतरे में धरोहरें: राष्ट्रीय महत्व के 414 संरक्षित स्थल अतिक्रमण के शिकार, सबसे आगे उत्तर प्रदेश - 414 ancient monuments encroached in india up leads list

खतरे में धरोहरें: राष्ट्रीय महत्व के 414 संरक्षित स्थल अतिक्रमण के शिकार, सबसे आगे उत्तर प्रदेश देश में कुल 3,688 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों में से 414 पर अतिक्रमण की सूचना मिली है, जिसमें उत्तर प्रदेश 75 स्थलों के साथ…

Jagran के अनुसार16 अगस्त 2026 को 04:55 pm बजे
खतरे में धरोहरें: राष्ट्रीय महत्व के 414 संरक्षित स्थल अतिक्रमण के शिकार, सबसे आगे उत्तर प्रदेश
 - 414 ancient monuments encroached in india up leads list

सौजन्य से:- Jagran

खतरे में धरोहरें: राष्ट्रीय महत्व के 414 संरक्षित स्थल अतिक्रमण के शिकार, सबसे आगे उत्तर प्रदेश

देश में कुल 3,688 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों में से 414 पर अतिक्रमण की सूचना मिली है, जिसमें उत्तर प्रदेश 75 स्थलों के साथ सबसे आगे है।

HighLights

- देश के 414 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों पर अतिक्रमण।

- उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 75 स्थलों पर अवैध कब्जा।

- सरकार और एएसआई अतिक्रमण हटाने को कर रहे कार्रवाई।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में कुल 3,688 प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के रूप में घोषित किए गए हैं। इनमें से उत्तर प्रदेश के 75 कब्जाए स्थलों समेत देश में कुल 414 स्थलों पर अतिक्रमण की सूचना मिली है।

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा को जानकारी दी है कि सरकार ने इन अतिक्रमणों का संज्ञान लिया है और एएसआई ने विभिन्न स्थलों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

हालांकि, देश में ऐसे स्थलों पर सबसे अधिक अतिक्रमण की घटनाएं उत्तर प्रदेश में ही दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, तमिलनाडु दूसरे स्थान पर है जहां 74 स्मारकों पर अवैध कब्जा है। कर्नाटक में 48 ऐतिहासिक स्मारकों में अतिक्रमण की पुष्टि हुई है।

जबकि देश की राजधानी दिल्ली भी इन स्मारकों के संरक्षित होने के बावजूद उन्हें अतिक्रमण से मुक्त नहीं कर पाई है। दिल्ली में 40 स्मारकों पर अवैध कब्जा या अवैध निर्माण किया गया है। महाराष्ट्र में 31 स्मारक और राजस्थान में ऐसे बीस स्मारकों पर अतिक्रमण की रिपोर्ट है।

कानूनी प्रविधान और उपायप्राचीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों और अवशेष अधिनियम, 1958 (एएमएएसआर अधिनियम, 1958) के प्रविधानों के तहत किसी स्मारक की सुरक्षा के लिए उस भूमि का अधिग्रहण या स्वामित्व अनिवार्य नहीं है, जिस पर स्मारक स्थित है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का मुख्य उद्देश्य एएमएएसआर अधिनियम, 1958 और संबंधित नियमों के अनुसार संरक्षित स्मारकों का संरक्षण और रखरखाव करना है।

जहां भी अतिक्रमण या अनधिकृत गतिविधियां देखी जाती है, वहां उचित कार्रवाई की जाती है। स्मारकों की सीमाओं को निर्धारित करने के लिए स्थानीय राजस्व अधिकारियों के साथ समन्वय में एक संयुक्त सर्वेक्षण किया जाता है ताकि स्मारकों और स्थलों की संरक्षित सीमाओं की सुरक्षा की जा सके।

भुवन पोर्टल पर अपलोड किया डिजिटलीकरण

एएसआई ने संरक्षित स्मारकों व स्थलों की सीमाओं का सर्वेक्षण, भू-रेफरेंसिंग और डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है और इन्हें भुवन पोर्टल पर अपलोड किया गया है। संबंधित राज्य सरकारों और राजस्व अधिकारियों के साथ समन्वय में ऐसे डाटा का एकीकरण राज्य भूमि अभिलेखों के साथ किया जाता है।

एएसआई के भुवन पोर्टल के सैटेलाइट डाटा को उत्तर प्रदेश के स्थानीय राजस्व रिकार्ड और भू-अभिलेखों के साथ मिलाया जा रहा है ताकि सही सीमाओं का पता लगाकर अवैध निर्माणों को तुरंत ढहाया जा सके।(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें