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वाराणसी आ रहा 308 पहियों वाला ट्रक: 180 टन वजनी शुगर मिल वेसल लदा है, लखीमपुर की चीनी मिल में लगेगा; बेल्जियम से मंगाया गया - Varanasi News

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bhaskar.com के अनुसार26 सितंबर 2026 को 10:04 am बजे
वाराणसी आ रहा 308 पहियों वाला ट्रक:  180 टन वजनी शुगर मिल वेसल लदा है, लखीमपुर की चीनी मिल में लगेगा; बेल्जियम से मंगाया गया - Varanasi News

सौजन्य से:- bhaskar.com

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वाराणसी आ रहा 308 पहियों वाला ट्रक:180 टन वजनी शुगर मिल वेसल लदा है, लखीमपुर की चीनी मिल में लगेगा; बेल्जियम से मंगाया गया

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वाराणसी में 308 पहियों का ट्रक आने को है। बलरामपुर चीनी मिल यूनिट और एथेनॉल प्लांट के लिए मंगाया गया वेसल बेल्जियम से चलकर यूपी पहुंच गया है। यह वेसल वाराणसी से होकर लखीमपुरखीरी के कुंभी गांव स्थित बलरामपुर चीनी मिल की यूनिट पहुंचेगा।

इस ट्रक पर मौजूद 180 टन का यह वेसल लोगों के बीच चर्चा में है। शुक्रवार को यह चंदौली से वाराणसी के लिए रवाना हुआ था। उस समय चंदौली में बड़ी संख्या में लोग हाइवे पर इसे देखने के लिए उमड़ पड़े। आज शाम तक इसके वाराणसी पहुंचने का अनुमान है।

3 तस्वीर देखिए…

बिहार के कैमूर के रस्ते यूपी के चंदौली पहुंचा

वेसल को समुद्री रास्ते से ओडिशा के बंदरगाह पर मंगाया गया। वहां के पाराद्वीप से इसे पहले झारखंड होते हुए बिहार पहुंचा। बिहार में रोहतास, गया, औरंगाबाद, सासराम के रास्ते कैमूर पहुंचाया गया। अब यह चंदौली के रास्ते यूपी में प्रवेश कर चुका है। आज वाराणसी से गुजरेगा।

ऐसे में NHAI ने खास इंतजाम किए हैं। वाराणसी में गुजरने पर कई फुट ओवरब्रिज हैं। जिन्हे अस्थायी रूप से कुछ हिस्सा हटाने की कवायद भी की जा रही है। इसके अलावा डाफी टोल प्लाजा पर अलग से लेन बनाई गई है।

308 चक्कों का है ट्रक

इस ट्रक में 308 चक्के हैं। ट्रक 24 घंटे में महज 8 से 10 किलोमीटर ही चल रहा है। जब यह बड़ा ट्रक हाईवे से गुजरता है, तो राहगीर और आसपास के लोग कुछ देर के लिए रुक जाते हैं। लोग अपने मोबाइल फोन से इसकी तस्वीरें और वीडियो बनाते दिख रहे हैं।

बताया गया है कि इस वेसल को लखीमपुर खीरी के कुंभी गांव स्थित बलरामपुर चीनी मिल यूनिट में लगाया जाना है। लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ तहसील क्षेत्र के कुंभी (Kumbhi) में स्थित Balrampur Chini Mills Ltd. की कुंभी चीनी मिल एक प्रमुख चीनी उत्पादक इकाई है।

लॉजिस्टिक्स कंपनी जेएम बक्सी हैवी को जिम्मेदारी

मशीन और ट्रेलर का कुल वजन 200 टन से भी ज्यादा होने की वजह से यह काफिला बहुत ही धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। लॉजिस्टिक्स कंपनी जेएम बक्सी हैवी की निगरानी में चल रहा यह महा-ट्रक पूरे दिन में केवल 8 से 10 किलोमीटर का सफर ही तय कर पाता है।

पूरे रास्ते में पड़ने वाले पुलों की भार क्षमता, तीखे मोड़ों और ओवरहेड बिजली तारों की पहले से ही पूरी इंजीनियरिंग जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके।

3 महीने पहले उड़ीसा से चला, एक महीने बाद लखीमपुर पहुंचेगा

उड़ीसा के पाराद्वीप से लखीमपुर की दूरी करीब 1200 किमी है। यह ट्रक 3 महीने पहले वहां से चला था। अब तक 800 किमी की दूरी तय कर चुका है। बताया जा रहा है कि अभी भी लखीमपुर पहुंचने में करीब 1 महीने का समय लगेगा।

अब जानिए क्या होता है वेसल

- गन्ने से चीनी या एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली एक विशालकाय, भारी-भरकम बेलनाकार टंकी है।

- यह लोहे और विशेष मजबूत मिश्र धातुओं (Alloys) से बनी एक बड़ी औद्योगिक टंकी होती है।

- इसे वैक्यूम पैन वेसल या साइक्लाइजेशन रिएक्टर भी कहा जाता है।

- इसका उपयोग शुगर मिलों में गन्ने के रस से चीनी के क्रिस्टल बनाने या एथेनॉल प्लांट के काम के लिए किया जाता है।

- ये वेसल इतने बड़े और भारी होते हैं। इनका वजन औसतन लगभग 180 से 200 टन या उससे अधिक होता है।

- इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए सैकड़ों पहियों वाले विशेष हाइड्रोलिक ट्रेलर्स (जैसे 308 पहियों वाले ट्रक) की जरूरत पड़ती है।

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