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लखनऊ: खुले गड्ढे में गिरे 3 मासूम, 5 साल के बच्चे ने तोड़ा दम

लखनऊ: खुले गड्ढे में गिरे 3 मासूम, 5 साल के बच्चे ने तोड़ा दम परिजन आनन-फानन में हर्षित को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंचे. वहां से उसे लोहिया अस्पताल ले जाया गया, परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने…

ABP News के अनुसार6 सितंबर 2026 को 05:31 am बजे
लखनऊ: खुले गड्ढे में गिरे 3 मासूम, 5 साल के बच्चे ने तोड़ा दम

सौजन्य से:- ABP News

लखनऊ: खुले गड्ढे में गिरे 3 मासूम, 5 साल के बच्चे ने तोड़ा दम

परिजन आनन-फानन में हर्षित को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंचे. वहां से उसे लोहिया अस्पताल ले जाया गया, परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने बच्चे को देखने से इनकार कर दिया.

लखनऊ के जुग्गौर गांव स्थित डीह कॉलोनी के बीच बने करीब पांच फीट गहरे नाले के गड्ढे में खेल रहे तीन मासूम गिर गए. इस दौरान 5 वर्षीय हर्षित चौरसिया की जान चली गई. हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि स्थानीय लोगों में खुले गड्ढे को लेकर नाराजगी है.

शनिवार (5 सितंबर) की शाम करीब चार बजे पड़ोस में सत्यनारायण भगवान की कथा चल रही थी. इसी दौरान हर्षित अपने पांच वर्षीय साथी नंदीश तिवारी के साथ शौचालय जाने के लिए निकला था. इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गहरे गड्ढे में जा गिरा.

हर्षित को गड्ढे में गिरता देखकर नंदीश ने शोर मचाया और परिजनों को जानकारी दी. इसके बाद हर्षित के बड़े भाई उज्ज्वल ने किसी तरह उसे गड्ढे से बाहर निकाला, उस समय बच्चा अचेत था.

सीएचसी के बाद लोहिया अस्पताल ले गए परिजन

परिजन आनन-फानन में हर्षित को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंचे. वहां से उसे लोहिया अस्पताल ले जाया गया. परिजनों का आरोप है कि लोहिया अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्चे को देखने से इनकार कर दिया. इसके बाद परिजन हर्षित को शहीद पथ स्थित मातृ एवं शिशु अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया.

पिता दुबई में, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

इस हादसे के वक्त बच्चे के पिता बृजेश चौरसिया दुबई में हैं. वह मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं. बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

वहीं, स्थानीय लोगों ने कॉलोनी के बीच खुले पड़े गड्ढे को लेकर सवाल उठाए हैं. लोगों का कहना है कि अगर गड्ढे को सुरक्षित किया गया होता या उसके आसपास बैरिकेडिंग होती तो हादसे को टाला जा सकता था. घटना के बाद स्थानीय लोगों में जिम्मेदार विभाग के खिलाफ नाराजगी है.

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