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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सड़क 24 घंटे में 14 जगह और धंसी, उखड़ रहा पुराना पैचवर्क - lucknowkanpur expressway sinks at 14 more spots iit probe

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सड़क 24 घंटे में 14 जगह और धंसी, उखड़ रहा पुराना पैचवर्क लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर पिछले 24 घंटे में 14 और जगहों पर सड़क धंस गई है, और पुराने पैचवर्क भी उखड़ रहे हैं। ...और पढ़ें HighLights -…

Jagran के अनुसार10 अगस्त 2026 को 02:18 am बजे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सड़क 24 घंटे में 14 जगह और धंसी, उखड़ रहा पुराना पैचवर्क
 - lucknowkanpur expressway sinks at 14 more spots iit probe

सौजन्य से:- Jagran

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सड़क 24 घंटे में 14 जगह और धंसी, उखड़ रहा पुराना पैचवर्क

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर पिछले 24 घंटे में 14 और जगहों पर सड़क धंस गई है, और पुराने पैचवर्क भी उखड़ रहे हैं। ...और पढ़ें

HighLights

- 24 घंटे में एक्सप्रेसवे पर 14 और जगह सड़क धंसी।

- पुराने पैचवर्क उखड़े, मरम्मत में जल्दबाजी से समस्या बढ़ी।

- आईआईटी खड़गपुर की टीम निर्माण खामियों की जांच कर रही।

जागरण टीम, लखनऊ। पिछले 24 घंटे में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 14 और जगहों पर सड़क धंस गई। उन्नाव से लखनऊ लेन पर किमी संख्या 28.6 से लेकर 63.9 के बीच बाबा खेड़ा, अमरसस, भवानी खेड़ा, रावल, बड़ौरा, अड़ेरुवा, बेहटा नथई सिंह गांव के निकट सड़क धंसने, नालियां बनने और पानी भरने से यातायात के लिए दिक्कतें बढ़ गईं। रावल गांव के पास डिवाइडर किनारे छह फीट लंबा और चार फीट गहरा गड्ढा हो गया है।

रविवार को बारिश हुई तो समतल सड़क पर नालियां बन गईं और पानी भरा रहा। दूसरी ओर, पुरानी कमियां ढकने के लिए जहां-जहां पैचवर्क किया गया था, अब वह भी उखड़ रहा है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि सड़क बनाने में लापरवाही की ही गई, अब मरम्मत में जल्दबाजी की जा रही है। इसी वजह से समस्या घटने के बजाय बढ़ती जा रही है।

27 दिन के अंदर ही 35 बड़ी-बड़ी कमियां आईं सामने

इस बीच रविवार को एक और टीम सड़क की चौड़ाई की नाप करते मिली। उन्नाव से लखनऊ के बीच छह लेन का 63 किमी लंबा एक्सप्रेसवे 4200 करोड़ रुपये खर्च कर बना है। 13 जुलाई को उद्घाटन और 14 जुलाई से सफर की शुरुआत हुई थी। 45 किमी के ग्रीनफील्ड हिस्से में 27 दिन के अंदर ही 35 बड़ी-बड़ी कमियां सामने आ चुकी हैं।

80 से ज्यादा स्थानों पर पैचवर्क किया जा चुका है। कई अन्य स्थानों पर काम चल रहा है। 120 किमी प्रति घंटा की गति से कार चल सकने का दावा था, लेकिन गड्ढों और पैचवर्क ने राह दूभर कर रखी है। हालांकि टोल न लगने के चलते वाहन लगातार चल रहे हैं।

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लखनऊ जा रहे मोहम्मद आरिफ ने कहा कि वाहन चलाने में डर लगा रहता है। गाड़ी की स्पीड 50 से 80 किमी प्रति घंटा के बीच में ही रखते हैं। 45 मिनट के दावे के उलट लखनऊ पहुंचने में अब सवा घंटे का समय लग रहा है। उन्नाव-लखनऊ लेन पर रावल गांव के पास तीन नए पैच हैं। इसी लेन पर किमी संख्या 39.7 पर 100 मीटर दायरे में नया पैचवर्क हो रहा है।

लखनऊ से उन्नाव लेन पर इसराइल खेड़ा के पास सड़क उखड़ी है। इन तीनों स्थानों पर पहले मरम्मत हो चुकी है। सेवानिवृत्त सहायक अभियंता एके शुक्ला ने बताया कि जब तक सड़क के नीचे मिट्टी में नमी की समस्या को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक कोई भी पैचवर्क नहीं टिकेगा।

800 पन्नों के दस्तावेज खोलेंगे कमियां

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में क्या खामियां रहीं, इस सवाल का जवाब उन 800 पन्नों के दस्तावेजों में है, जिन्हें आइआइटी खड़गपुर की टीम 30 नमूनों और सात घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ ले गई। अब 12 दिन बाद प्रोफेसर केएस रेड्डी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) मुख्यालय को रिपोर्ट सौंपकर हकीकत सामने रखेंगे।

जांच के बाद टीम के सदस्य वापस लौट गए हैं। प्रो. रेड्डी ने एक्सप्रेसवे पर जांच के दौरान मौके पर कार्यदायी संस्था पीएनसी, स्वतंत्र एजेंसी व एनएचएआई अफसरों से सवाल जवाब कर वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई। इस दौरान टीम ने नमूने भी लिए हैं। इनमें से कुछ उन चार प्रमुख स्थानों से लिए, जहां सड़क ज्यादा धंसी और कुछ ग्रीन फील्ड के सामान्य स्थान से भी लिए गए।

अब टीम देखेगी कि दोनों नमूनों में क्या अंतर है? टीम ने ग्रीन फील्ड से कई सतह यानी सूखी मिट्टी, गीली और ढाई से तीन मीटर नीचे की मिट्टी के नमूने लिए हैं। टीम में दिल्ली से आए एनएचएआई के सदस्य आलोक दीपांकर ने भी कार्यदायी संस्था के सदस्यों से सवाल पूछे।

आईआईटी की टीम एक्सप्रेसवे के पूरे डिजाइन की रिपोर्ट ले गई है ताकि देखा जा सके पीएनसी ने डिजाइन में कोई परिवर्तन तो नहीं किए। एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी, लखनऊ गौतम विशाल का कहना है कि दस से 12 दिन में रिपोर्ट आने की संभावना है।

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