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1 घंटे की बारिश में पानी-पानी हुआ लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, ड्रेनेज सिस्टम की खुली पोल

1 घंटे की बारिश में पानी-पानी हुआ लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, ड्रेनेज सिस्टम की खुली पोल कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में हुई लापरवाही आए दिन सामने आ रही है। सड़क धंसने के अलावा ड्रेनेज सिस्टम की भी पोल खुल रही है। रव…

Hindustan के अनुसार10 अगस्त 2026 को 02:18 am बजे
1 घंटे की बारिश में पानी-पानी हुआ लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, ड्रेनेज सिस्टम की खुली पोल

सौजन्य से:- Hindustan

1 घंटे की बारिश में पानी-पानी हुआ लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, ड्रेनेज सिस्टम की खुली पोल

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण में हुई लापरवाही आए दिन सामने आ रही है। सड़क धंसने के अलावा ड्रेनेज सिस्टम की भी पोल खुल रही है। रविवार को करीब एक घंटे की झमाझम बारिश में ही पानी-पानी हो गया। सड़क किनारे कई स्थानों पर लबालब पानी भर गया।

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की आए दिन पोल खुल रही है। सड़क धंसने के अलावा ड्रेनेज सिस्टम भी दगा दे रहा है। रविवार को करीब एक घंटे की झमाझम बारिश में ही पानी-पानी हो गया। सड़क किनारे कई स्थानों पर लबालब पानी भर गया। कुछ स्थानों पर इतना ज्यादा पानी भर गया कि तेज रफ्तार वाहनों के गुजरने पर कई फीट ऊपर तक उछलता नजर आया। वहीं मरम्मत कार्य के चलते कई जगह डायवर्जन किया गया है। किलोमीटर 29.9 से 30.7 किमी तक तीनों लेन बंद रहीं। ऐसे में लोगों को बारिश के बीच रांग साइड से निकलना पड़ा। सबसे ज्यादा खतरनाक एक्सप्रेसवे पर धड़ाधड़ गुजर रहे दोपहिया और तीन पहिया वाहन हैं।

एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 13 दिन बाद से ही सड़क के टूटने और धंसने की शिकायतें सामने आने लगी थीं। फिलहाल किलोमीटर 30.3, 28.8, 50.4, 49.7 और 39.7 समेत कई हिस्सों में मरम्मत का काम चल रहा है। रविवार को हुई बारिश ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए। इससे पहले एक्सप्रेसवे की जांच करने पहुंची आईआईटी खड़गपुर की टीम ने भी निर्माण और जल निकासी व्यवस्था पर असंतोष जताया था। किलोमीटर 32.4 के पास सोख्ता तकनीक से बनी सड़क पटरी की जांच के लिए टीम ने करीब ढाई वर्गफीट का गड्ढा खुदवाया। इसमें टैंकर से पानी डाला गया और करीब 10 मिनट तक निकासी का इंतजार किया गया, लेकिन पानी अपेक्षित तरीके से दूसरी ओर नहीं निकल सका। इसके बाद 500 लीटर पानी सड़क पर डालकर भी परीक्षण किया गया। पानी बाहर निकलने के बजाय सड़क के एक हिस्से में जमा हो गया।

जांच के दौरान टीम को जल निकासी के साथ निर्माण कार्य में भी खामियां मिली थीं। बेगमखेड़ा गांव के पास सड़क की खुदाई कर डामर-गिट्टी की मोटाई, नीचे डाले गए बोल्डर और कंक्रीट की परत की जांच की गई थी। इसमें भी निर्माण कार्य में लापरवाही के संकेत मिले थे। रविवार की बारिश ने एक बार फिर इन आशंकाओं को सही साबित कर दिया। किलोमीटर 47.2 पर करीब 60 मीटर हिस्से में बारिश थमने के करीब एक घंटे बाद तक पानी जमा रहा। जलभराव के चलते साफ हो गया कि एक्सप्रेसवे की जल निकासी व्यवस्था अभी भी पूरी तरह कारगर नहीं है।

जलभराव की जानकारी मरम्मत में जुटे कर्मचारियों ने अधिकारियों को दी, जिसके बाद पंपिंग सेट लगाकर पानी बाहर निकाला गया। वहीं, बारिश के दौरान नए किए गए पैचवर्क को पानी से बचाने के लिए कई स्थानों पर तिरपाल डालकर ढक दिया गया। कर्मचारियों को आशंका थी कि पानी भरने से नया डाला गया डामर बह सकता है और सड़क दोबारा क्षतिग्रस्त हो सकती है।

लेखक के बारे में

Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।

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