वाराणसी में साइबर ठगी का बढ़ता "जाल"; ढाई साल में करोड़ों की ठगी, 11 करोड़ रुपये कराये गये होल्ड
वाराणसी में साइबर ठगी का बढ़ता "जाल"; ढाई साल में करोड़ों की ठगी, 11 करोड़ रुपये कराये गये होल्ड वाराणसी साइबर सेल के एडीसीपी नृपेंद्र वर्मा ने ईटीवी भारत की टीम से की बातचीत. By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Published :…

सौजन्य से:- ETV Bharat
वाराणसी में साइबर ठगी का बढ़ता "जाल"; ढाई साल में करोड़ों की ठगी, 11 करोड़ रुपये कराये गये होल्ड
वाराणसी साइबर सेल के एडीसीपी नृपेंद्र वर्मा ने ईटीवी भारत की टीम से की बातचीत.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 6, 2026 at 11:34 PM IST
वाराणसी : यदि आपके फोन में बिजली, पानी, वाई-फाई, एटीएम ब्लाॅक, हाउस टैक्स या अन्य किसी तरीके का टैक्स जमा करने का मैसेज या काॅल आए तो बहुत सावधान रहने की जरूरत है. साइबर ठग लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर उनके अकाउंट को अपना निशाना बना रहे हैं. साइबर क्रिमिनल अलग-अलग फेक पेज के जरिए लोगों से हेल्प के लिए डोनेशन मांगकर ठगी कर रहे हैं.
साइबर अपराधियों ने करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है. बीते ढाई साल में साइबर सेल की ओर से अब तक 11 करोड़ रुपयों को होल्ड कराया गया है. वहीं, 130 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. पुलिस की जांच में पता चला है कि इन साइबर ठगों का नेटवर्क बनारस तक की सीमित नहीं है, बल्कि इनके तार विदेशों तक फैले हुए हैं.
पुलिस के अनुसार, ये गिरोह तीन स्तरों पर संगठित तरीके से काम करते हैं. गिरोह में हाईटेक तकनीकी की जानकारी रखने वाले, बैंकिंग और डिजिटल सिस्टम की समझ रखने वाले, साथ ही स्थानीय सहयोगी भी शामिल होते हैं. मोबाइल नेटवर्क के जरिए यह किसी भी कोने से जुड़कर ठगी की घटना को अंजाम दे रहे हैं. आखिर यह नेटवर्क कैसे काम करता है, अपराधी किस तरह लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं और पुलिस इन पर शिकंजा कसने के लिए क्या रणनीति अपना रही है, कैसे लोगों को सुरक्षित रखा जाए? इन तमाम विषयों को लेकर ईटीवी भारत की टीम ने वाराणसी साइबर सेल के एडीसीपी नृपेंद्र वर्मा से खास बातचीत की.
एडीसीपी नृपेंद्र वर्मा ने बताया कि साइबर ठगी के अपराध करने का तरीका समय के साथ बदल रहा है. इसमें अपराधियों को पकड़ने के लिए साइबर बज्र अभियान भी चलाया जा रहा है. पहले जहां यह लोग एपीके फाइल के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे, वहीं अब इनकी तकनीक बदल गई है. अब यह लोग फिजिकल भी इंवॉल्व हो रहे हैं, लोगों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. वाराणसी में घटित घटनाएं इसका उदाहरण भी है.
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही विभागों के टैक्स जमा करने के लिंक, कॉल सेंटर, डेटिंग एप, ऑनलाइन गेम्स, सट्टेबाजी, आपदा में मदद के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं. कई बार साइबर ठग बैंक खाते की जानकारी को अपडेट करने को लेकर कॉल करते हैं. जिसके बाद लोगों के पैसे कट जाते हैं.
उन्होंने बताया कि कई बार ऐसे मामले भी सामने आए हैं कि तकनीकी दिक्कत की वजह से बैंक का ऐप काम नहीं करता है. ऐसे में लोग गूगल पर जाकर बैंक का नाम डाल करके सर्च करते हैं. सबसे ऊपर जो एप्लीकेशन दिखता है उसको क्लिक कर देते हैं. क्लिक करने के बाद कई बार जो स्कैमर होता है, वह अपनी वेबसाइट को प्रमोट करके टॉप पर ले आता है.
उन्होंने बताया कि एक मामला सामने आया था, जिसमें पीड़ित ने इस तरीके के लिंक पर क्लिक किया और उसके मोबाइल का हैंडलिंग स्कैमर के हाथ में चला गया, जहां उसने उसके अकाउंट से ढाई लाख रुपये ले लिए थे. जिसके बाद इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया और स्कैमर को पकड़ा गया था.
उन्होंने बताया कि इसमें कई लेयर में काम किया जाता है. पहला लेयर जहां आधार डाटा सब जानकारी इकट्ठा किया जाता है, इसमें गरीब लोगों को थोड़ी धनराशि देकर उनका पूरा किट लिया जाता है और फिर सेकेंड लेयर को भेजा जाता है, जहां स्कैमर रकम भेजते हैं और उसके बाद फिर उसको अलग-अलग जगह ट्रांसफर किया जाता है.
उन्होंने बताया कि इन दिनों साइबर ठगी में बड़ा योगदान म्यूल खातों का भी है, जहां यह साइबर ठग गरीब जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके खातों को लेते हैं और साइबर ठगी के पैसे को भेजते हैं, जिन्हें ट्रेस करना भी मुश्किल होता है. उन्होंने बताया कि इस साइबर ठगी में काम करने वाले गिरोह में अलग-अलग स्तर के सदस्य हैं.
उन्होंने बताया कि वाराणसी पुलिस ने इस तरीके का कई मामलों का भंडाफोड़ किया है. कई लोगों को जेल भी भेजा गया है. उन्होंने बताया कि इसे रोकने के लिए हर थाने पर साइबर सेल है, जहां कंप्लेन आती हैं. पोर्टल पर भी कंप्लेन आती है. हमारी जो टीम है, साइबर सेल की 24 घंटे सक्रिय रहती है. कोई भी कंप्लेन आती है, उस पर त्वरित कार्रवाई की जाती है. प्रयास किया जाता है कि जो भी पीड़ित की धनराशि है, उसे तत्काल होल्ड कर दिया जाए और जल्दी से जल्दी वापस किया जा सके.
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार होता है तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले जितना जल्दी हो सके उसे 1930 पर कॉल करना है और कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करानी है. अपना डिटेल देना है, जहां पुलिस सबसे पहले उसके अकाउंट से कटे पैसे को होल्ड करने की कोशिश करती है, ताकि उसे आर्थिक क्षति न पहुंचे और उसके बाद उस मामले पर कार्रवाई करती है.
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही लोगों को किसी भी तरीके के अंजान लिंक को क्लिक करने से, अनजान एप्लीकेशन को अपने फोन में इंस्टॉल करने से बचना चाहिए. यदि आपसे कोई, किसी भी तरीके की जानकारी मांगता है तो उसे बिल्कुल ना दें. क्योंकि साइबर अपराध से बचने का सबसे सहज और आसान तरीका आपकी सतर्कता है.
उन्होंने बताया कि युवा पीढ़ी इससे ज्यादा प्रभावित हो रही है. ऐसे में हम स्कूलों में कैंपेनिंग चलाकर बच्चों को जागरूक कर रहे हैं. इसके तहत हम अलग-अलग स्कूलों में जाते हैं, बच्चों को साइबर अपराध से जुड़ी हुई जानकारी बताते हैं और उन्हें समझाते हैं कि किस तरीके से साइबर अपराधी उन्हें ठगी का शिकार बनाते हैं.
यह भी पढ़ें : सात समंदर पार, ठगी का कारोबार: यूपी में ग्लोबल CYBER ATTACK
उन्होंने बताया कि इसका फायदा यह होता है कि बच्चे जागरुक होते हैं और उन्हें यह बात समझ आती है कि यदि उनके घर में या उनके साथ किसी तरीके की फ्रॉड की घटना हो तो वह डरे नहीं बल्कि तुरंत पुलिस से कंप्लेन करें. उन्होंने बताया कि हमारे यहां 24 घंटे साइबर सेल में पुलिस काम करती है और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाती हैं. उन्होंने कहा कि हमारी आम जनमानस से अपील है कि वह सतर्क रहें और यदि किसी तरीके की साइबर ठगी की घटना होती है तो बिना किसी देर के तत्काल पुलिस को सूचित करें.
अगर केसों की बात करें तो, बीते दिनों सिगरा थाना पुलिस और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने 'Cy-Vazra' अभियान के तहत साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया था. पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था. पुलिस का दावा था कि आरोपी लोगों को धन का लालच देकर फर्जी आधारकार्ड के जरिए बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को बैंक खाता बेचने का काम करते थे. पुलिस के अनुसार, इन बैंक खातों से देशभर में 21 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ीं थीं, जिनमें 76,44,476.97 रुपये की धोखाधड़ी हुई थी.
मई माह में साइबर सेल ने ऑनलाइन कंपनी पर फर्जी विज्ञापन देकर करोड़ों की ठगी करने वाले शातिर नागराजू को गिरफ्तार किया था. आरोपी नागराजू आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले का रहने वाला है. ठग महंगे सामान के नाम पर एडवांस पैसे लेकर गेमिंग ऐप्स के जरिए रकम ठिकाने लगाता था. देशभर में आरोपी के खिलाफ 73 शिकायतें दर्ज हैं और अब तक 1.25 करोड़ के फ्रॉड का खुलासा हुआ है. सिगरा स्थित होटल से पकड़े गए आरोपी के पास से पुलिस ने कैश, एटीएम और क्यूआर कोड बरामद किए हैं.
बीते फरवरी माह में साइबर सेल टीम ने 42 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी के मामले में खुलासा किया था. पुलिस ने गिरोह के पांच सदस्यों को झारखंड से गिरफ्तार किया था. पुलिस का दावा था कि आरोपी एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक कर लेते थे. पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल, एक कार, 66 हजार रुपये नकद समेत कई सामान बरामद किया था. वाराणसी साइबर सेल टीम की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया था कि पकड़े गए युवक एपीके फाइल भेजकर ठगी कर रहे थे. चौबेपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले मदन मोहन मिश्रा ने 8 दिसंबर को उनके साथ हुई ठगी के बारे में साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी.
बीते साल मई माह में साइबर ठगी के मामले में सीबीआई ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत हरियाणा के 19 ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की थी. सीबीआई ने वाराणसी में छापा मारकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. ये आरोपी कॉल सेंटर के जरिए जापान में वायरस भेज कर साइबर सिक्योरिटी के नाम पर ठगी करते थे. सीबीआई ने यूपी में बनारस के साथ अयोध्या में ऑपरेशन चक्र-वी के तहत (Operation Chakra-V) कार्रवाई की थी. इसके साथ ही दिल्ली और हरियाणा के पानीपत में छापे मारे थे. वाराणसी में नई दिल्ली से आई सीबीआई टीम ने महमूरगंज स्थित एक कॉल सेंटर पर छापामारा. जहां 12 घंटे तक सीबीआई की टीम जांच पड़ताल करती रही थी. उसके बाद यहां से कई लैपटॉप वह अन्य जरूरी दस्तावेजों को सील किया गया था. इसके साथ ही कॉल सेंटर के कर्मचारियों के बारे में सीबीआई टीम ने जानकारी की थी.
वर्ष 2024 में शहर के साइबर थाने की पुलिस को रिटायर्ड शिक्षिका से 3 करोड़ 55 लाख की साइबर ठगी के मामले में बड़ी सफलता मिली थी. इस पूरे मामले में शामिल हाउस अरेस्टिंग गैंग का अन्तर्राष्ट्रीय सरगना टाइगर व उसके साथियों को गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी. पुलिस ने पकड़े गए अभियुक्तों के पास से भारी मात्रा में एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल, चेक बुक, नगदी बरामद किया था.
वहीं बीते महीनों वाराणसी के महमूरगंज स्थित एक बहु मंजिला इमारत में कॉल सेंटर पर भी छापेमारी की गई थी, जहां बनारस में बैठकर लोग ठगी कर रहे थे. इस दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इस ठगी में लोग पीड़ित के सिस्टम तक पहुंच बनाकर उसके बैंक खातों से रुपये निकाल लेते थे और इस मामले में लगभग 19 ठिकानों पर छापेमारी भी की थी.
इसी क्रम में बीते दिनों वाराणसी में एक साइबर ठग गिरोह का खुलासा हुआ था, जिसने करोड़ों की साइबर ठगी की थी और इस मामले में वाराणसी के सिगरा क्षेत्र में साइबर सेल की टीम ने उसे गिरफ्तार किया था. पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि ठगी की रकम वह सीधे बैंक खातों में न लेकर गेमिंग एप के क्यूआर कोड का सहारा लेते थे. ग्राहक जैसे रुपये भेजते थे उसे अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते थे. उसके ऊपर 73 मामले दर्ज थे.
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

तेज रफ्तार कार ने बाइक सवारों को टक्कर मारी: वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर दुर्घटना,दो घायल अस्पताल में भर्ती - Rajatalab News

CM योगी का ऐलान- नई यूथ पॉलिसी जल्द लाएगी सरकार; इनोवेशन-एजुकेशन पर फोकस

उपद्रव प्रदेश से UP अब उत्सव प्रदेश, विकसित भारत के लिए विकसित यूपी जरूरी : योगी आदित्यनाथ - up is now state of celebration from state of updrav developed up is essential for a developed india yogi adityanath


