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Dainik Bhaskar के अनुसार30 जुलाई 2026 को 10:26 pm बजे
सीएम ने कहा- बांटने वालों के आदर्श बाबर और औरंगजेब:  भदोही का नाम फिर से संत रविदास नगर कराएंगे, 'समरसता संकल्प अभियान’ की हुई शुरुआत - Varanasi News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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सीएम ने कहा- बांटने वालों के आदर्श बाबर और औरंगजेब:भदोही का नाम फिर से संत रविदास नगर कराएंगे, 'समरसता संकल्प अभियान’ की हुई शुरुआत

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वाराणसी में संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर भाजपा ने बुधवार को काशी से ‘समरसता संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में सीएम योगी, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरूआत सीएम योगी ने की। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन में को भी शामिल होना था। लेकिन उनका कार्यक्रम निरस्त हो गया है।

सीएम योगी ने कहा- संतों की बात वे लोग स्वीकार नहीं करेंगे, जो समाज को बांटने का काम करते हैं। समाज को बांटने वाले वही लोग हैं, जिनके आदर्श बाबर और औरंगजेब रहे हैं। ये लोग समाज को खाई-खाई में बांटकर आपस में लड़ाने का काम करते हैं।

सीएम ने कहा-सपा सरकार के दौरान पड़ोसी जिले संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही कर दिया गया था। भाजपा सरकार संतों और महापुरुषों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है और वह मुख्यमंत्री से बातचीत कर जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर कराने का प्रयास करेंगे।

कार्यक्रम को लेकर प्रमुख चौराहों, मार्गों और कार्यक्रम स्थलों को होर्डिंग, स्वागत द्वार और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। सीरगोवर्धन स्थित संत रविदास मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। वहीं, बीएचयू गेट स्थित मालवीय प्रतिमा और आसपास के क्षेत्रों को भी आकर्षक स्वरूप दिया गया है। कार्यक्रम में एक सीएम, दो डिप्टी सीएम, एक केन्द्रीय मंत्री, 12 प्रदेश मंत्री शामिल है।

3 तस्वीरें देखिए…

कार्यक्रम से जुड़ी अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

अपडेट्स

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सावन माह की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार शाम श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की समीक्षा की। मंदिर प्रशासन ने मुख्यमंत्री को सावन के दौरान लागू की जाने वाली एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सावन में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, साफ-सफाई और यातायात प्रबंधन को लेकर सभी इंतजाम पहले से सुनिश्चित किए जाएं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शाम करीब 7:45 बजे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन कर रवाना हुए। इस दौरान उनके साथ भारत सरकार के विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद रहे।

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सीएम योगी काल भैरव मंदिर में दर्शन करने के बाद विश्वनाथ मंदिर पहुंचे हैं।

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बारिश के बीच योगी आदित्यनाथ रविदास घाट पहुंचे। उन्होंने मां गंगा का प्रणाम किया, इसके बाद वह सीधे विश्वनाथ मंदिर के लिए रवाना हो गए।

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रविदास घाट पर सीएम योगी के आने से पहले तार में आग लग गई। हालांकि वहां मौजूद फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने आग पर काबू पा लिया है।

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देशभर से आए प्रतिनिधियों को संत रविदास की जन्मस्थली से पवित्र माटी से भरे कलश सौंपे जा रहे हैं। भारत के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से पहुंचे प्रतिनिधि इन कलशों को अपने-अपने जिलों तक लेकर जाएंगे। आयोजन के तहत सबसे पहले माटी कलश संबंधित जिला मुख्यालयों तक पहुंचाए जाएंगे, जहां से इन्हें आगे हरगांव ले जाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य संत रविदास के संदेश, विचार और सामाजिक समरसता के भाव को देशभर में पहुंचाना है।

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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज इस कार्यक्रम में देशभर से ढाई सौ संत पहुंचे हैं। हम सभी का स्वागत और सम्मान करते हैं। संत रविदास की जन्मस्थली से आज जो मिट्टी जा रही है, वह देश के कोने-कोने तक पहुंचे, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार हर संभव सहयोग करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि 650वीं जयंती तक संत रविदास के आदर्शों और विचारों को जन-जन तक पहुंचाना हमारा संकल्प है, जो पूर्ववर्ती सरकारें नहीं कर सकीं।

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सीएम योगी ने कहा- एक समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम बदल दिया था। हमारी सरकार ने कन्नौज में मेडिकल कॉलेज का नाम दोबारा बाबा साहब के नाम पर किया है। कि संत रविदास जी की जयंती तक भदोही को संत रविदास नगर के रूप में स्थापित करने की दिशा में सरकार कार्रवाई आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि संत रविदास के सम्मान और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रदेश में जहां-जहां महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित हैं, वहां उनकी सुरक्षा और सम्मान के लिए छतरी लगाने का कार्य कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महापुरुषों की विरासत को संरक्षित करने और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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सीएम योगी ने कहा- संतों की बात वे लोग स्वीकार नहीं करेंगे, जो समाज को बांटने का काम करते हैं। समाज को बांटने वाले वही लोग हैं, जिनके आदर्श बाबर और औरंगजेब रहे हैं। ये लोग समाज को खाई-खाई में बांटकर आपस में लड़ाने का काम करते हैं। लेकिन समाज को जोड़ने का काम करने वालों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रविदास जी के नाम पर एयरपोर्ट का नामकरण कराया। वहीं अयोध्या में एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया, जो प्रधानमंत्री मोदी की पहल का परिणाम है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामाजिक समरसता अभियान को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने का कार्य संकल्प के साथ किया जा रहा है। हर सच्चे भारतीय का दायित्व है कि संत रविदास ने करीब 650 वर्ष पहले जो संदेश समाज को दिया था, उसे जमीनी स्तर पर उतारते हुए कर्म साधना के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। संत रविदास ने सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उनके विचार समाज को जोड़ने और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास ने बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी और मां गंगा के तट पर मानव जीवन का सार बताते हुए कहा था, “मन चंगा तो कठौती में गंगा”। यह संदेश व्यक्ति की आंतरिक पवित्रता और सदाचार के महत्व को दर्शाता है। संत रविदास के विचारों को आत्मसात कर समाज में सद्भाव, समरसता और सेवा की भावना को मजबूत किया जा सकता है। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी सहायक बनेगी।

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केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा- संत रविदास केवल एक संत नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और मानवता के महान विचारक थे। उनके बताए रास्ते पर चलने का प्रयास हम सभी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास के विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।

जब संविधान सभा में संविधान के मूल सिद्धांतों पर चर्चा हो रही थी, तब स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा जैसे शब्दों को लेकर भी व्यापक बहस हुई थी। उस दौरान डॉ. भीमराव अंबेडकर ने स्पष्ट किया था कि समानता और भाईचारे की भावना ब्रिटिश परंपरा से नहीं, बल्कि भारतीय संत परंपरा और विशेष रूप से संत रविदास के विचारों से प्रेरित है। संत रविदास ने सदियों पहले जाति-पांति और ऊंच-नीच से ऊपर उठकर ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां सभी लोगों को समान सम्मान और अवसर मिले। यही भावना भारतीय संविधान की आत्मा में भी दिखाई देती है।

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भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने कहा- संत रविदास की जन्मस्थली की पावन माटी का विधिवत पूजन कर उसे 131 कलशों में संग्रहित किया गया है। यह पवित्र माटी देशभर के 20 हजार से अधिक स्थानों तक पहुंचाई जाएगी, ताकि संत रविदास के विचारों और संदेशों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।

संत रविदास की सामाजिक समरसता, समानता और मानव कल्याण की सोच आज भी प्रासंगिक है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को उनके आदर्शों से जोड़ना और उनके विचारों को जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना है।

संत रविदास भक्ति आंदोलन के महान संत थे, जिन्होंने भक्ति की धारा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने ‘बेगमपुरा’ की ऐसी कल्पना की थी, जहां दुख, भेदभाव और असमानता के लिए कोई स्थान न हो तथा हर व्यक्ति सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जी सके।

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भाजपा अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने कहा- संत शिरोमणि गुरु रविदास ऐसे दौर में प्रकट हुए थे, जब भारतीय समाज सामाजिक विषमताओं, भेदभाव और कुरीतियों से जूझ रहा था। उन्होंने अपने सरल, विनम्र और आदर्श जीवन के साथ-साथ अपनी वाणी के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया।

संत रविदास ने स्पष्ट संदेश दिया था कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म, गुण और चरित्र से होती है। उनके विचार आज भी समाज को समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का मार्ग दिखाते हैं।

लाल सिंह आर्य ने संत रविदास की प्रसिद्ध वाणी ‘एकै माटी के सभ भांडे’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदेश समस्त मानवता की एकता और समानता का प्रतीक है। संत रविदास ने समाज को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने की प्रेरणा दी थी।

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि "रविदास जी सबके हैं और हम सब रविदास जी के हैं।" संत रविदास ने समाज को बदलने और समानता का संदेश दिया, लेकिन कुछ राजनीतिक दल केवल नारे बदलने का काम कर रहे हैं। कुछ दलों की राजनीति जाति से शुरू होती है और जाति पर ही समाप्त हो जाती है, जबकि भाजपा की राजनीति संतों के संस्कारों और उनके आदर्शों से शुरू होकर राष्ट्र निर्माण तक चलती है।

संत रविदास को जो सम्मान आज मिल रहा है, वह स्वतंत्रता के बाद ही मिल जाना चाहिए था। भाजपा सरकार ने संत रविदास के जीवन, विचारों और समाज सुधार के कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार संतों और महापुरुषों की विरासत को संरक्षित करने और उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

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उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान पड़ोसी जिले संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार संतों और महापुरुषों के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है और वह मुख्यमंत्री से बातचीत कर जिले का नाम फिर से संत रविदास नगर कराने का प्रयास करेंगे।

विपक्ष ने हमेशा संतों के सम्मान की उपेक्षा की है। भाजपा सरकार ने संत रविदास के विचारों और योगदान को सम्मान देने का काम किया है। जिस स्थान पर कार्यक्रम आयोजित किया गया, वहां पहले समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों का कब्जा था। भाजपा सरकार ने उस भूमि को कब्जामुक्त कराकर वहां संत रविदास की भव्य प्रतिमा स्थापित कराई है।

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उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- सबका साथ, सबका विकास” का मूल भाव संत रविदास की शिक्षाओं में निहित है। यदि संत रविदास के संदेशों का निष्कर्ष निकाला जाए तो समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की प्रेरणा मिलती है। संत रविदास ने सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का संदेश दिया था। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रही हैं। मैं इस मंच से कह सकता हूं कि विपक्ष का एजेंडा हमेशा अधूरा रहेगा।

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संत निरंजन दास से मुलाकात करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे हैं। उनके साथ प्रदेश मंत्री असीम अरुण, उनके सलाहकार अवनीश अवस्थी मौजूद है। योगी आदित्यनाथ ने सभी से परिचय कराया। इसके अलावा उन्होंने कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी दी।

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सीएम योगी आदित्यनाथ संत रविदास मंदिर पहुंच गए हैं।

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मंदिर के अंदर प्रवेश के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। लिस्ट में जिसका नाम है, उनको ही मंदिर के अंदर प्रवेश मिल रहा है।

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मंच पर महिलाएं कलश लेकर पहुंचने लगी हैं। करीब 131 कलशों में संत रविदास जी की जन्मस्थली की पावन माटी को संग्रहित किया गया है। यह माटी देश के 20 हजार से अधिक स्थानों तक पहुंचेंगी।

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कार्यक्रम में सीएम योगी के पहुंचने से पहले BDS (बम खोज एवं निष्क्रियकरण दस्ता) टीम पहुंची। टीम ने मंच, पंडाल और आसपास के क्षेत्र की जांच की। इस दौरान डॉग स्क्वॉड भी मौजूद रहा।

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130 गाड़ियों में कलश को रखा गया है। जिसको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन हरी झंडी दिखाकर कार्यक्रम स्थल से रवाना करेंगे।

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संत रविदास जी के 650वीं जयंती वर्ष पर 'समरसता संकल्प अभियान' कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था की कमान पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने संभाली। उन्होंने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। रूट डायवर्जन को भी देखा। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी लोग अलर्ट मोड पर रहें।

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कार्यक्रम में शामिल होने के लिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी विमान से वाराणसी पहुंचे। एयरपोर्ट पर क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया, प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल समेत कई कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया।

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भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने कहा- संत रविदास जी की जन्मस्थली की पावन माटी का पूजन कर उसे 131 कलशों में संग्रहित किया गया है। यह माटी देश के 20 हजार से अधिक स्थानों तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की सामाजिक समरसता, समानता और मानव कल्याण की सोच जन-जन तक पहुंचे और लोग उसे अपने जीवन में आत्मसात करें, यही अभियान का मूल उद्देश्य है।

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तरुण चुग ने कहा- बुधवार 29 जुलाई को दोपहर 2 बजे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की उपस्थिति में 27 राज्यों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र माटी से भरे कलश सौंपे जाएंगे। इसके बाद प्रतिनिधि इन कलशों को लेकर अपने-अपने राज्यों के लिए रवाना होंगे और संत रविदास के विचारों तथा सामाजिक समरसता के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाएंगे।

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रविदास मंदिर से 2 किलोमीटर दूर रविदास पार्क को भी सजाया गया है। यहां शाम 6 बजे एक साथ 11000 दीप जगमग आएंगे इसको लेकर तैयारियां की गई है। यह आयोजन गंगा घाट के किनारे आयोजित किया जा रहा है जिसमें 27 राज्यों से आए प्रतिनिधि और काशी के भाजपा कार्यकर्ता शामिल होंगे।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वाराणसी दौरे पर रहेंगे। उनके आगमन, भ्रमण और सीरगोवर्धन स्थित रविदास मंदिर में प्रस्तावित जनसभा के मद्देनजर रूट डायवर्जन लागू रहेगा। जनसभा स्थल के आसपास वाहनों के आवागमन और लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रूट डायवर्जन के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले वाहनों के लिए विशेष पार्किंग स्थल भी निर्धारित किए गए हैं।

एडीसीपी यातायात अंशुमान मिश्रा ने बताया कि सेवापुरी, रोहनिया, कैंट, चंदौली, भदोही और मिर्जापुर से आने वाली बसें रिंग रोड से रखौना और एनएच-19 डाफी टोल प्लाजा पार कर सर्विस लेन से लौटूबीर अंडरपास मैदान में पार्क की जाएंगी। पिंडरा, अजगरा, शिवपुर, कैंट, जौनपुर और गाजीपुर से आने वाली बसें तथा अन्य वाहन भिखारीपुर से नरिया तिराहा, बीएचयू नरिया गेट, एनसीसी तिराहा और केंद्रीय विद्यालय के सामने से रेडियस-7 तथा रेडियस-7 कट होते हुए सेमी सर्किल-1 सड़क के किनारे खड़े किए जाएंगे।

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