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UP के मदरसों में कामिल और फाजिल की डिग्री नहीं मिलेगी, योगी सरकार ने ऐक्ट में संशोधन को मंजूरी दी

सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मदरसा शिक्षा परिषद ऐक्ट 2004 में संशोधन को मंजूरी दी गई। लखनऊ: यूपी के मदरसों में कामिल और फाजिल की डिग्री नहीं मिलेगी। इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की…

navbharattimes.indiatimes.com के अनुसार5 अगस्त 2026 को 02:18 pm बजे
UP के मदरसों में कामिल और फाजिल की डिग्री नहीं मिलेगी, योगी सरकार ने ऐक्ट में संशोधन को मंजूरी दी

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com

सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मदरसा शिक्षा परिषद ऐक्ट 2004 में संशोधन को मंजूरी दी गई।

लखनऊ: यूपी के मदरसों में कामिल और फाजिल की डिग्री नहीं मिलेगी। इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मदरसा शिक्षा परिषद ऐक्ट 2004 में संशोधन को मंजूरी दी गई। ये कोर्स ग्रैजुएशन और पोस्ट ग्रैजुएशन के समकक्ष हुआ करते थे। मदरसा बोर्ड के जरिए प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक की डिग्रियां दी जा रही थीं।

साल 2022 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बोर्ड को ही असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बाद नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इसकी संवैधानिकता तो बरकरार रखी, लेकिन यह भी कहा कि मदरसा बोर्ड उच्च शिक्षा की डिग्री नहीं दे सकता। अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश अंसारी ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद से नए सत्र से इन कोर्सों में प्रवेश बंद कर दिया गया था। अब ऐक्ट में संशोधन कर ये कोर्स हटाए जाएंगे। वहीं, जिनके दाखिले कोर्ट के आदेश से पहले हुए थे, उनकी डिग्री की वैधता पर असर नहीं पड़ेगा।

लखनऊ में बनेगा यू हब

कैबिनेट ने लखनऊ और नोएडा में डीप टेक हब (यू-हब) बनाने पर भी सहमति दी। लखनऊ में बनने वाला हब एप्लिकेशन आधारित एआई, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल एआई, कृषि जैव प्रौद्योगिकी और डायग्नोस्टिक्स जैसे सेक्टर पर केंद्रित होगा। पहले चरण में 25 हजार वर्ग फुट में को-वर्किंग स्पेस, प्रोटोटाइपिंग सुविधाए और निवेशकों के लिए इफ्रास्ट्रचर विकसित किए जाएंगे। बाद में दो लाख वर्ग फुट फुट तक इसका विस्तार होगा।

कैबिनेट की बैठक में जेवर लिंक एक्सप्रेस-वे की निर्माण लागत को भी हरी झंडी दे दी गई। जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेस-वे को जोड़ने वाले इस 74.467 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर करीब 8,585,51 करोड़ रुपये खर्च होंगे। छह लेन का यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे भविष्य में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। इस प्रॉजेक्ट से गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर समेत गंग एक्सप्रेस वे से जुड़े क्षेत्रों का जेवर एयरपोर्ट से संपर्क तेज होगा।

लेखक के बारे मेंपवन नौटियालपवन नौटियाल नवभारत टाइम्स में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सेक्शन के लिए बतौर कंसलटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का व्यापक पत्रकारीय अनुभव है। मूल रूप से उत्तराखंड (उत्तरकाशी) के रहने वाले पवन को दोनों राज्यों की राजनीति, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, क्राइम और यूटिलिटी खबरों की गहरी समझ है।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2012 में देहरादून से एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के साथ की, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग और कई एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए। उन्होंने 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा की भी क्रेडिबल ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इसके बाद, उन्होंने 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में 5 वर्षों तक डेस्क और फील्ड की दोहरी जिम्मेदारी संभाली। डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए उन्होंने वनइंडिया-डेलीहंट के साथ करीब 5 साल काम किया, जहां उन्होंने उत्तरकाशी के ऐतिहासिक सिलक्यारा टनल हादसे और धराली आपदा जैसी बड़ी घटनाओं को मौके पर जाकर कवर किया। दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले पवन विज्ञान के छात्र रहे हैं, जिससे उनकी खबरों में तार्किक और डेटा-आधारित सटीकता दिखती है।मुख्य विशेषज्ञता (Areas of Expertise)क्षेत्रीय कवरेज: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति, समसामयिक मुद्दे और सामाजिक सरोकार।बीट्स: पॉलिटिकल एनालिसिस, क्राइम, हेल्थ, यूटिलिटी न्यूज और ग्राउंड डिजास्टर रिपोर्टिंग।अनुभव: 14+ वर्ष (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)।पेशेवर यात्रा (Professional Experience)करियर की शुरुआत (2012): देहरादून में न्यूज चैनल से शुरुआत; उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और केदारनाथ आपदा (2013) की लाइव कवरेज। 'लोकस्वामी' मैगजीन के लिए अहम कवर स्टोरीज।प्रिंट मीडिया (5 वर्ष): 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर/रिपोर्टर डेस्क और फील्ड रिपोर्टर के तौर पर काम।डिजिटल मीडिया (5 वर्ष): 'वनइंडिया-डेलीहंट' में यूपी-उत्तराखंड के चुनाव और बड़ी घटनाओं की कमान। उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल रेस्क्यू और धराली आपदा की ग्राउंड रिपोर्टिंग।शिक्षा और क्रेडेंशियल (Education & Credentials)पोस्ट ग्रेजुएशन: मास कम्युनिकेशन (नई दिल्ली)।ग्रेजुएशन: साइंस स्ट्रीम (जो उनकी खबरों को एक विश्लेषणात्मक और सटीक दृष्टिकोण देता है)।स्थानीय जुड़ाव: मूल निवासी उत्तरकाशी (उत्तराखंड), जिससे उन्हें पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों की स्वाभाविक और प्रामाणिक समझ है।... और पढ़ें

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