विचार: निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए तैयार उत्तर प्रदेश
{"_id":"6a6aedb723e737f23f0c0296","slug":"uttar-pradesh-kanwar-yatra-sawan-month-begins-gangajal-from-river-ganga-news-event-2026-07-30","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विचार: निर्विघ्न कांवड़ यात्र…

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a6aedb723e737f23f0c0296","slug":"uttar-pradesh-kanwar-yatra-sawan-month-begins-gangajal-from-river-ganga-news-event-2026-07-30","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विचार: निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए तैयार उत्तर प्रदेश","category":{"title":"Events Coverage","title_hn":"इवेंट कवरेज","slug":"events-coverage"}}
विचार: निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए तैयार उत्तर प्रदेश
Thu, 30 Jul 2026 11:52 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
प्रो. डॉ. कमलेश 'कौन्तेय'
प्रो. डॉ. कमलेश 'कौन्तेय'
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 30 Jul 2026 11:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सनातन धर्म में आस्था रखने वाले यह मानते हैं कि शिव कहीं बाहर नहीं, वे हर उस जीव में विद्यमान हैं जो प्रेम, त्याग और तप से जीवन को साधता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं मानती। जो शिव का ध्यान करता है, वह स्वयं शिवमय हो जाता है। सावन में जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं, तो वे केवल जल चढ़ाने नहीं जाते, वे स्वयं उस तप की जीवंत छवि बन जाते हैं जिसे शिव ने कैलाश की एकांत साधना में साकार किया था। उत्तर प्रदेश सरकार की दृष्टि में यही भाव सबसे गहरा है, कांवड़िया केवल एक श्रद्धालु नहीं, चलता-फिरता शिव का प्रतिरूप है और अब जबकि जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, उत्तर प्रदेश इन तपस्वियों के स्वागत और उन पर पुष्प वर्षा को तैयार है।
निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए योगी सरकार ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सड़कों की मरम्मत, बिजली-पानी की सुचारु व्यवस्था, चिकित्सा शिविरों की तैनाती, इन सबके पीछे यह भाव है कि किसी श्रद्धालु के पांवों में छाले न पड़ें। मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा घेरा, गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की तैनाती, ये सब उस भावना का विस्तार हैं जिसमें राज्य स्वयं को श्रद्धालु के सेवक के रूप में पाता है।
विज्ञापन
निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए योगी सरकार ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सड़कों की मरम्मत, बिजली-पानी की सुचारु व्यवस्था, चिकित्सा शिविरों की तैनाती, इन सबके पीछे यह भाव है कि किसी श्रद्धालु के पांवों में छाले न पड़ें। मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा घेरा, गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की तैनाती, ये सब उस भावना का विस्तार हैं जिसमें राज्य स्वयं को श्रद्धालु के सेवक के रूप में पाता है।
विज्ञापन
एंटी वेनम और एंटी रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, जगह-जगह शिविरों में विश्राम और पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों की नियमित सफाई और मार्ग की रोशनी, इन सबका उद्धेश्य यही है कि भक्त किसी कष्ट में न पड़े l मार्ग पर मांस और मदिरा की दुकानें बंद रखने का निर्णय, दुकानों पर संचालक का नाम प्रदर्शित करने की अनिवार्यता, यह सब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, यह पवित्रता के सम्मान का प्रश्न है। इसी सहभागिता ने डीजे की ध्वनि को निर्धारित मानकों में बांधा है। भक्ति में उल्लास स्वाभाविक है, पर यह कोलाहल नहीं बनने पाए, इसके लिए स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुगमता को केंद्र में रखते हुए ही यातायात प्रबंधन के तहत वैकल्पिक मार्ग, डायवर्जन प्वाइंट, आरक्षित पार्किंग और आपातकालीन कॉरिडोर बनाए गए हैं। इसी तरह अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर दृष्टि रखने वाली विशेष टीमें, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोरता की चेतावनी, यह दिखाती हैं कि सरकार आस्था की इस विराट धारा को किसी भी विघ्न से बचाने के लिए सतर्क है।
कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जिस तरह पूर्व अनुभवों से सीख ली गई है, वह किसी योगी की साधना-प्रक्रिया जैसी ही लगती है। प्रशासन ने बीते नौ वर्षों में यात्रा को शनैः-शनैः क्रमबद्ध ढंग से सुगम बनाया है। निरंतर सुधार की प्रक्रिया ही किसी भी बड़े जनआयोजन को सफल बनाती है, और यही प्रक्रिया कांवड़ यात्रा को साल-दर-साल अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाती जा रही है।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक प्रोफेसर डॉ. कमलेश 'कौन्तेय' महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में प्रोफेसर हैं।)
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक प्रोफेसर डॉ. कमलेश 'कौन्तेय' महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में प्रोफेसर हैं।)
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

यूपी के 20 शहरों में बारिश, अस्पताल में घुसा पानी: प्रयागराज में खुसरोबाग किले की दीवार ढही, डीसीएम पर पेड़ गिरा; 75 जिलों में अलर्ट - Uttar Pradesh News

यूपी विधानसभा में अनुपूरक बजट हुआ पास, सीएम योगी आदित्यनाथ का सपा पर हमला- ‘युवा, किसान और महिला विरोधी’

गोरखपुर में तरंग ओवरब्रिज का अनुरक्षण बना मुसीबत, 20 अगस्त तक बंद रहेगा पुल - gorakhpur tarang overbridge closure extended to aug 20


