क्या यूपी के राज्यसभा चुनाव में तीसरे प्रत्याशी का दांव चलेगी सपा? अखिलेश दलित चेहरे को बना सकते हैं अपना कैंडिडेट
यूपी के राज्यसभा चुनावों में सपा तीसरा प्रत्याशी भी मैदान में उतार सकती है। अगर ऐसा होता है तो अखिलेश यादव किसी अति पिछड़े या दलित वर्ग के चेहरे पर दांव लगा सकते हैं। लखनऊ: राज्यसभा चुनावों को दिलचस्प बनाने के लिए सपा दो…

सौजन्य से:- Navbharat Times
यूपी के राज्यसभा चुनावों में सपा तीसरा प्रत्याशी भी मैदान में उतार सकती है। अगर ऐसा होता है तो अखिलेश यादव किसी अति पिछड़े या दलित वर्ग के चेहरे पर दांव लगा सकते हैं।
लखनऊ: राज्यसभा चुनावों को दिलचस्प बनाने के लिए सपा दो सीटों तक खुद को सीमित रखने के बजाय तीसरा प्रत्याशी भी उतार सकती है। सूत्रों के मुताबिक, यदि तीसरा प्रत्याशी उतारने पर अंतिम मुहर लगती है तो सपा अति पिछड़ा या दलित वर्ग से किसी चेहरे को मैदान में उतार सकती है। दरअसल, राज्यसभा चुनावों में सपा के जितने वोट हैं, उन वोटों से दो प्रत्याशी तो आसानी से जीत जाएंगे। इसके बाद भी पार्टी के पास 25 वोट बचेंगे।
क्या है पूरा गणित
प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। मौजूदा प्रभावी विधानसभा संख्या 397 है। एक प्रत्याशी की जीत के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोटों का गणित बन रहा है। सपा के पास 101 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के दो विधायकों को जोड़ने पर विपक्षी खेमे की संख्या 103 हो सकती है। इस लिहाज से दो प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के बाद सपा के पास करीब 25 वोट बच सकते हैं। यही अतिरिक्त वोट तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की रणनीति का आधार है। हालांकि, तीसरी सीट जीतने के लिए पार्टी को अपने खेमे से बाहर भी समर्थन जुटाना पड़ेगा।
सामाजिक समीकरण भी साधेगी सपा
तीसरा प्रत्याशी उतारने की स्थिति में सपा के लिए उम्मीदवार का सामाजिक समीकरण बेहद महत्वपूर्ण होगा। पार्टी में अति पिछड़ा अथवा दलित समाज से उम्मीदवार उतारने पर विचार इसी रणनीति का हिस्सा है। सपा पिछले कुछ समय से अपने परंपरागत वोट आधार के साथ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के व्यापक सामाजिक गठजोड़ की राजनीति पर जोर देती रही है। ऐसे में राज्यसभा का तीसरा उम्मीदवार इस राजनीतिक संदेश को और धार देने का जरिया बन सकता है।
एनडीए का पलड़ा माना जा रहा भारी
तीसरा प्रत्याशी मैदान में आया तो मुकाबला सीधे अंतिम सीट को लेकर होगा। मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी-एनडीए सात और सपा दो सीटों पर मजबूत स्थिति में हैं। इसके बाद बचने वाली सीट पर एनडीए का पलड़ा भारी माना जा रहा है।
असंतोष वाले विधायकों पर भी सपा की नजर
सपा की नजर विपक्ष से बाहर के विधायकों और सत्तारूढ गठबंधन के भीतर संभावित असंतोष पर भी है। 2024 के पिछले राज्यसभा चुनाव में तस्वीर उलटी थी। उस समय सपा विधायकों की क्रॉस वोटिंग ने उसके तीसरे प्रत्याशी आलोक रंजन का गणित बिगाड़ दिया था और बीजेपी के संजय सेठ जीत गए थे। इस बार सपा यदि तीसरे प्रत्याशी का दांव चलती है तो राज्यसभा का चुनाव महज सीटों की लड़ाई नहीं रहेगा।
लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें
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