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संघर्ष से सफलता: अपनों ने जताई असमर्थता तो बुआ ने पढ़ाया, अब यूपी पुलिस में दारोगा बनीं तारांकिता - up police si success story bus drivers daughter tarankita

संघर्ष से सफलता: अपनों ने जताई असमर्थता तो बुआ ने पढ़ाया, अब यूपी पुलिस में दारोगा बनीं तारांकिता बस चालक की बेटी तारांकिता ने परिवार की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी बुआ के सहयोग से पढ़ाई पूरी की ...और पढ़ें HighLi…

Jagran के अनुसार26 सितंबर 2026 को 04:04 pm बजे
संघर्ष से सफलता: अपनों ने जताई असमर्थता तो बुआ ने पढ़ाया, अब यूपी पुलिस में दारोगा बनीं तारांकिता
 - up police si success story bus drivers daughter tarankita

सौजन्य से:- Jagran

संघर्ष से सफलता: अपनों ने जताई असमर्थता तो बुआ ने पढ़ाया, अब यूपी पुलिस में दारोगा बनीं तारांकिता

बस चालक की बेटी तारांकिता ने परिवार की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी बुआ के सहयोग से पढ़ाई पूरी की ...और पढ़ें

HighLights

- बचपन में अपनों से हुईं दूर, बुआ के परिवार ने पढ़ाया, उपनिरीक्षक (गोपनीय) पद पर हुआ चयन

संवाद सहयोगी, शाहबाद (रामपुर)। प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक पद पर चयनित तारांकिता की सफलता संघर्ष और अपनों के सहयोग की कहानी है। बस चालक की बेटी तारांकिता को बचपन में ही परिवार की परिस्थितियों के चलते बरेली निवासी बुआ के पास भेज दिया गया था। बुआ ने उसे बेटी की तरह पाला और पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई। अब उत्तर प्रदेश पुलिस की भर्ती परीक्षा में चयनित होकर उन्होंने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

तारांकिता के पिता पान सिंह प्रजापति रोडवेज में चालक हैं। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। तारांकिता के जन्म के करीब एक साल बाद छोटे भाई का जन्म हुआ।

परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए पिता ने बेटी को बरेली निवासी अपनी बहन के पास भेज दिया। बुआ ने उसकी परवरिश के साथ पढ़ाई जारी रखी।

बरेली से प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद तारांकिता को बुआ ने अपनी बेटी के पास ठाकुरद्वारा भेज दिया। वहां उन्होंने शार्टहैंड सीखी। उसे प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में जानकारी मिली। कोविड काल के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।

वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश पुलिस की उपनिरीक्षक (गोपनीय) भर्ती परीक्षा दी। परिणाम घोषित हुआ तो उनका चयन हो गया। परिवार में बड़े भाई अधिवक्ता हैं, जबकि छोटा भाई सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है।

पिता के पास लौटने की इच्छा भी नहीं बनने दी बाधा

तारांकिता के मुताबिक, बड़ी होने पर पिता ने उन्हें वापस अपने पास बुलाने की इच्छा जताई थी। बुआ के परिवार ने उन्हें वापस भेजने से इनकार कर दिया।

फुफेरे भाई अवधेश कुमार ने आगे की पढ़ाई और करियर में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। तारांकिता के अनुसार, अवधेश ने उन्हें हमेशा सबसे अधिक प्यार और प्रोत्साहन दिया।

बस चालक की बेटी ने हासिल किया मुकाम

पिता पान सिंह प्रजापति रोडवेज में चालक हैं। सीमित पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद तारांकिता ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। बुआ के परिवार के सहयोग से शिक्षा पूरी की और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर उपनिरीक्षक (गोपनीय) पद हासिल किया।

तारांकिता के दो भाई हैं। बड़े भाई अधिवक्ता हैं, जबकि छोटा भाई सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा है। तारांकिता के चयन के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। परिजनों ने मिठाई बांटकर सफलता का जश्न मनाया।

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