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यूपी पुलिस के 'बागी' सिपाही सुनील शुक्ला अब कानूनी अखाड़े में, ट्रिब्यूनल में केस

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता नूतन ठाकुर (पूर्व आईपीएस व आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर की पत्नी) की ओर से दाखिल की जाएगी। सुनील शुक्ला का कहना है, मैंने पुलिस विभाग में फैले भ्रष्टाचार को…

navbharattimes.indiatimes.com के अनुसार30 जुलाई 2026 को 05:26 pm बजे
यूपी पुलिस के 'बागी' सिपाही सुनील शुक्ला अब कानूनी अखाड़े में, ट्रिब्यूनल में केस

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता नूतन ठाकुर (पूर्व आईपीएस व आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर की पत्नी) की ओर से दाखिल की जाएगी। सुनील शुक्ला का कहना है, मैंने पुलिस विभाग में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम किया था। इसके बावजूद भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने मुझे ही सेवा से बर्खास्त कर दिया। यह कतई न्यायपूर्ण नहीं है और इसी अन्याय के खिलाफ मैं ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटा रहा हूं।उन्होंने कहा कि, उनके द्वारा पुलिस विभाग की छवि धूमिल नहीं की गई है, बल्कि ऐसे लोग जो भ्रष्टाचार कर रहे हैं उनके द्वारा विभाग की छवि धूमिल की जा रही है।

कौन हैं सुनील शुक्ला?

2015 बैच के कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला मूल रूप से अमेठी जिले की गौरीगंज तहसील अंतर्गत मेदन मवई ग्राम पंचायत के पूरे रामसेवक मिश्र गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 2008 में गौरीगंज के राजीव गांधी साइंस कॉलेज से हाई स्कूल व वर्ष 2010 में अमेठी के श्री रणवीर इंटर कॉलेज से PCM (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) ग्रुप में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास किया। इंटर के बाद वे प्रतापगढ़ से पॉलिटेक्निक करने गए, लेकिन मन न लगने के कारण 4 महीने में पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय का रुख किया और वर्ष 2014 में फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स से बीएससी (B.Sc) की डिग्री हासिल की।परिवार का पुलिस विभाग से गहरा नाता

सुनील शुक्ला के परिवार का पुलिस और सुरक्षा सेवाओं से पुराना जुड़ाव रहा है। सुनील के पिता होमगार्ड सेवा में थे। सेवा के दौरान ही पिता के निधन के बाद उनकी बहन मृतक आश्रित कोटे से होमगार्ड विभाग में नौकरी पाईं और वर्तमान में वन स्टॉप सेंटर, गौरीगंज (अमेठी) में तैनात हैं। उनकी पत्नी भी उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में ही हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। सुनील ने बताया कि उनके परिवार में उनकी माता, पत्नी और अविवाहित बहन हैं और वो अक्सर अपने गांव लखनऊ से आते -जाते हैं।

वीडियो वायरल होने से लेकर बर्खास्तगी तक का सफर

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइंस में तैनाती के दौरान सुनील शुक्ला ने 7 मई 2026 को पहली बार सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया था। उन्होंने पुलिस विभाग में कथित भ्रष्टाचार, ड्यूटी लगाने के नाम पर अवैध वसूली, पुलिस लाइंस की बदहाल व्यवस्था और वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही मुख्यमंत्री से पुलिसकर्मियों की समस्याओं के समाधान की अपील की थी।पुलिस प्रशासन का कहना था कि जांच में उनके आरोपों की पुष्टि नहीं हुई और उन्होंने सेवा नियमों व अनुशासन का उल्लंघन किया। इसके बाद जून 2026 में उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

शंकराचार्य के 1 लाख के ऑफर को ठुकराया

बर्खास्तगी के बाद जुलाई 2026 में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सुनील शुक्ला को अपने साथ ₹1 लाख प्रति माह के वेतन पर काम करने का प्रस्ताव दिया था, जिससे यह मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। हालांकि, सुनील ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि “जब भी पूज्य स्वामी जी को आवश्यकता होगी या राष्ट्र हित में मुझे बुलाया जाएगा, मैं स्वतः ही निःशुल्क सेवा में हाजिर हो जाऊंगा।अंबेडकरनगर में लिया था भ्रष्टाचार से लड़ने का संकल्प

सुनील शुक्ला बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का संकल्प उन्हें अपनी पहली पोस्टिंग अंबेडकरनगर के दौरान मिला था।पहली घटना: सुनील ने बताया कि अंबेडकरनगर जिले के आलापुर थाने में थाना प्रभारी की गाड़ी में ड्यूटी के दौरान SO एक व्यक्ति को फोन पर गालियां दे रहे थे, जबकि गाड़ी में महिला कांस्टेबल भी मौजूद थीं। सुनील ने इस पर आपत्ति जताई, जिसे SO ने स्वीकार भी किया।

दूसरी घटना: अंबेडकरनगर जिले में नियुक्ति के दौरान सुनील ने बताया कि वह एक सांसद के गनर के तौर पर तैनात थे, वहां उन्हें अपना टीए/डीए (TA/DA) पास कराने के लिए एक बाबू के खाते में ₹10,000 भेजने पड़े थे।

सुनील का कहना है कि इन घटनाओं के बाद ही उन्होंने पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प लिया था।

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