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वकालत की आड़ में अपराध करने वालों पर कसेगा शिकंजा; लखनऊ पुलिस की स्पेशल सेल एक्टिव

वकालत की आड़ में अपराध करने वालों पर कसेगा शिकंजा; लखनऊ पुलिस की स्पेशल सेल एक्टिव लखनऊ में वकीलों को लेकर हाईकोर्ट का रुख पिछले कुछ समय से लगातार सख्त दिखाई दे रहा है. By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Published : August…

ETV Bharat के अनुसार8 अगस्त 2026 को 03:18 am बजे
वकालत की आड़ में अपराध करने वालों पर कसेगा शिकंजा; लखनऊ पुलिस की स्पेशल सेल एक्टिव

सौजन्य से:- ETV Bharat

वकालत की आड़ में अपराध करने वालों पर कसेगा शिकंजा; लखनऊ पुलिस की स्पेशल सेल एक्टिव

लखनऊ में वकीलों को लेकर हाईकोर्ट का रुख पिछले कुछ समय से लगातार सख्त दिखाई दे रहा है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 8, 2026 at 8:05 AM IST

लखनऊ: वकालत पेशे की आड़ में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वालों पर अब लखनऊ पुलिस शिकंजा कसने की तैयारी में है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ की सख्ती और अदालत परिसर में वकीलों के व्यवहार को लेकर दिए गए निर्देशों के बाद लखनऊ पुलिस ने वकीलों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों की जांच के लिए बने स्पेशल सेल को सक्रिय कर दिया है.

इस सेल का मकसद हर वकील को शक की नजर से देखना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों की पहचान करना है, जो वकालत के पेशे को कथित तौर पर दबाव और संरक्षण के तौर पर इस्तेमाल कर आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं.

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है. एक बड़ा वर्ग ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन कर रहा है, जो वकील होने का फायदा उठाकर कथित तौर पर दबंगई या आपराधिक गतिविधियां करते हैं.

वहीं, कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि कार्रवाई सिर्फ उन्हीं लोगों तक सीमित रहनी चाहिए जो वास्तव में अपराध में शामिल हैं. किसी व्यक्ति के वकील होने भर से उसे अपराधी मान लेना भी ठीक नहीं है.

हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद क्यों बढ़ी सख्ती: लखनऊ जिला अदालत में 21 जुलाई को हुई मारपीट मामले के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया. 28 जुलाई को सुनवाई के दौरान अदालत ने 4 अधिवक्ताओं सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडेय, यश पांडेय और अभय प्रताप वर्मा के अगले आदेश तक लखनऊ जिले के किसी भी अदालत परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी.

इसके अलावा अदालत ने संबंधित अधिवक्ताओं की पृष्ठभूमि की गोपनीय जांच IB से कराने, पिछले 10 साल के आयकर रिटर्न और संपत्ति से जुड़ी जानकारी समेत कई बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है.

हाईकोर्ट की इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं कोई व्यक्ति वकालत के पेशे का इस्तेमाल दबाव बनाने, धमकी देने, जमीन-जायदाद के विवाद में प्रभाव जमाने या अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए तो नहीं कर रहा.

पहले भी बनाई गई थी स्पेशल सेल: लखनऊ पुलिस के मुताबिक, वकीलों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की जांच के लिए पहले भी एक विशेष सेल बनाया गया था. अब हाईकोर्ट के निर्देशों और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे दोबारा सक्रिय किया गया है.

इस सेल की जिम्मेदारी ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार के पास है. उनका कहना है कि पुलिस का लक्ष्य किसी पेशे को निशाना बनाना नहीं है. कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ होगी जो वकालत की आड़ में आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाए जाएंगे.

वकील बताकर दबंगई तो करें शिकायत: जेसीपी बबलू कुमार ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति खुद को वकील बताते हुए किसी के साथ अभद्रता करता है, दबंगई दिखाता है, जमीन पर कब्जे का प्रयास करता है या किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होता है, तो उसके खिलाफ इस सेल में शिकायत की जा सकती है.

जेसीपी के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद सीधे कार्रवाई नहीं की जाएगी. सबसे पहले संबंधित मामले की जांच की जाएगी. शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, संबंधित व्यक्ति ने वकालत के पेशे का इस्तेमाल किया है या नहीं और उसकी आपराधिक गतिविधियों में कोई भूमिका है या नहीं.

जांच के बाद एक रिपोर्ट तैयार होगी. अगर जांच में शिकायत सही पाई जाती है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता सामने आती है, तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस पर दबाव बनाने के आरोप: जेसीपी बबलू कुमार ने बताया कि कुछ मामलों में ऐसे लोगों के बारे में शिकायतें सामने आती रही हैं, जो वकील होने का फायदा उठाकर पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं.

कोर्ट में पहुंचने के बाद भी कथित तौर पर अभद्रता या दबाव की स्थिति पैदा होने की शिकायतें आती रही हैं. पुलिस का कहना है कि वकील का पेशा अपने आप में सम्मानित पेशा है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस पेशे का इस्तेमाल खुद को कानून से ऊपर समझने या आपराधिक गतिविधियों के लिए संरक्षण हासिल करने के लिए करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जेसीपी के मुताबिक पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई हुई है, लेकिन अब हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद पुलिस ऐसे मामलों को और गंभीरता से ले रही है.

कहीं पेशेवर वकील परेशान न हों: स्पेशल सेल को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर कोई व्यक्ति व्यक्तिगत विवाद के चलते किसी वकील के खिलाफ शिकायत कर देता है, तो क्या उस शिकायत की आड़ में पेशेवर वकील को परेशान किया जा सकता है? इस पर जेसीपी बबलू कुमार ने कहा कि ऐसा नहीं होगा. सेल का मकसद पेशेवर वकीलों को परेशान करना नहीं है.

अगर किसी वकील के खिलाफ व्यक्तिगत विवाद के कारण शिकायत आती है और जांच में यह सामने आता है कि उसने अपने पेशे का दुरुपयोग नहीं किया और किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं है, तो उसके खिलाफ केवल शिकायत के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी. पुलिस पहले तथ्यों की जांच करेगी और जांच के आधार पर ही आगे कोई फैसला लिया जाएगा.

शिकायत से लेकर कार्रवाई तक यह प्रक्रिया: स्पेशल सेल में शिकायत आने के बाद मोटे तौर पर चार स्तर पर जांच की जाएगी. पहला यह कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता की जांच होगी. दूसरा, यह देखना कि संबंधित व्यक्ति ने अपने वकालत के पेशे या उसकी पहचान का इस्तेमाल दबाव बनाने या किसी अपराध में किया या नहीं.

तीसरा, संबंधित व्यक्ति की आपराधिक गतिविधियों और पुराने मामलों से जुड़े तथ्यों की जांच होगी. चौथा, जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि मामला केवल व्यक्तिगत विवाद है या वास्तव में आपराधिक गतिविधि का हिस्सा है.

चैंबरों से लेकर कोर्ट परिसर तक हाईकोर्ट सख्त: लखनऊ में वकीलों को लेकर हाईकोर्ट का रुख पिछले कुछ समय से लगातार सख्त दिखाई दे रहा है. इससे पहले जिला अदालत और आसपास के इलाके में अतिक्रमण कर बनाए गए अधिवक्ताओं के चैंबर और दूसरे निर्माण हटाने को लेकर भी हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे. इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई.

फिर मई में वकीलों के न्यायिक कार्य के बहिष्कार के मामले में भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और संबंधित बार पदाधिकारियों तथा कुछ अधिवक्ताओं को अवमानना की कार्रवाई को लेकर नोटिस जारी किए. अब 21 जुलाई की जिला अदालत की घटना के बाद चार अधिवक्ताओं के कोर्ट परिसर में प्रवेश पर रोक और IB जांच के आदेश ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.

समझिए क्या है उद्देश्य: जेसीपी बबलू कुमार का कहना है कि पुलिस का उद्देश्य साफ है, जो लोग वकालत के पेशे का सम्मान करते हुए काम कर रहे हैं, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. लेकिन अगर कोई व्यक्ति वकालत की पहचान का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों के लिए करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई से पुलिस पीछे नहीं हटेगी.

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