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कानपुर की सड़कों पर सिसकता बचपन; ममता का ढोंग, भीख बना धंधा, स्मार्ट सिटी का 'काला सच'

कानपुर की सड़कों पर सिसकता बचपन; ममता का ढोंग, भीख बना धंधा, स्मार्ट सिटी का 'काला सच' दादी गैंग की सक्रियता से कानपुर में भिखारियों की संख्या बढ़ रही है. उम्मीद संस्था के सर्वे में 1000 से अधिक भिखारी मिले. By ETV Bhara…

etvbharat.com के अनुसार7 अगस्त 2026 को 07:18 am बजे
कानपुर की सड़कों पर सिसकता बचपन; ममता का ढोंग, भीख बना धंधा, स्मार्ट सिटी का 'काला सच'

सौजन्य से:- etvbharat.com

कानपुर की सड़कों पर सिसकता बचपन; ममता का ढोंग, भीख बना धंधा, स्मार्ट सिटी का 'काला सच'

दादी गैंग की सक्रियता से कानपुर में भिखारियों की संख्या बढ़ रही है. उम्मीद संस्था के सर्वे में 1000 से अधिक भिखारी मिले.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 7, 2026 at 11:20 AM IST

|Updated : August 7, 2026 at 12:00 PM IST

कानपुर: देश-दुनिया में जिस कानपुर शहर की पहचान औद्योगिक नगरी के तौर पर है, उसी कानपुर को केंद्र सरकार ने बहुत दिनों पहले स्मार्ट सिटी घोषित कर दिया था. अब इस स्मार्ट सिटी में ऐसी तस्वीर उभर रही है, जो न सिर्फ झकझोरती है, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करती है. शहर की सड़कों, चौराहों, रेलवे स्टेशन, अस्पतालों के पास भिखारियों की संख्या हैरान करने वाली है. इनमें ज्यादातर मासूम बच्चे हैं, जिनका भविष्य अंधकार की काली कोठरी में जाता दिख रहा है. कानपुर संवाददाता समीर दीक्षित की रिपोर्ट.

कानपुर जिला प्रशासन से लेकर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, चाइल्ड लाइन समेत कई अन्य संस्थाएं हैं, जो भिखारियों को इनके मूल जीवन में वापस लाने के लिए दिन-रात जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन उतनी सफलता नहीं मिल रही, जितनी मिलनी चाहिए.

शहर में कुछ समय पहले उम्मीद संस्था ने जब भिक्षावृत्ति मांगने वालों को लेकर सर्वे किया, तो हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए. जनवरी से शुरू सर्वे के बाद जुलाई तक भिक्षावृत्ति वालों का आंकड़ा 1000 के पार था. इनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं.

यह बात भी सामने आई कि जो महिलाएं और बच्चें हैं, उनमें अधिकतर मध्य प्रदेश के रीवां से हैं. जो कुछ महीने के लिए कानपुर आते हैं और विभिन्न चौराहों पर भीख मांगते हैं. एक बात की चर्चा और रही कि कानपुर में दादी गैंग सक्रिय है. इसके इशारे पर बच्चे भीख मांगते हैं. गैंग को भीख का मोटा हिस्सा देते हैं.

जमीनी पड़ताल कड़वी हकीकत: ETV भारत की टीम ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की. दोपहर करीब 1:30 बजे का वक्त था और स्थान टाटमिल चौराहा. अफीमकोठी से टाटमिल चौराहा की ओर बढ़ने पर जैसे ही पुल से नीचे उतरे तो भयंकर जाम की स्थिति थी.

चारों ओर गाड़ियों का शोर था और जो बीच में डिवाइडर बना था, वहां पर चौराहा से कुछ पहले ही एक दादी अपने मुंह पर कपड़ा बांध रही थीं. उन्हें देखकर लगा कि जैसे बस अब राहगीरों से भिक्षावृत्ति को लेकर अपना काम शुरू करने वाली हैं.

इसी तरह चौराहा आया और पार किया तो फिर कई बच्चे डिवाइडर पर बैठे मिले. जैसे ही उन्हें कैमरा दिखा और वीडियो बनाते देखा तो वहां से भाग निकले. इसके बाद संवाददाता ने कुछ बच्चों से बात की और उनका नाम पूछा तो वह कुछ नहीं बोले.

सवाल किया कि किसके साथ यहां आते हों, कहां रहते हों...पर कोई जवाब नहीं था. कुछ पल में हाथ छुड़ाकर पीछे हटे और कहा, अगर पैसे देने हों तो दे दो अंकल जी.

रेलवे स्टेशन का हाल: करीब 2 बजे संवाददाता कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर पहुंचा. जैसे ही प्लेटफॉर्म नंबर एक के गेट पर टीम पहुंची तो बाहर रास्ते में ही कुछ बच्चे एक महिला के साथ एक किनारे किसी ताक में बैठे थे. उनकी नजरें आने-जाने वाले यात्रियों पर थीं.

कैमरा ऑन हुआ तो कुछ आपस में खुसफुसाहट की और फौरन ही वहां से हट गए. इसके बाद टीम जैसे ही प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पहुंची तो सामने से जीआरपी प्रभारी ओमनारायण सिंह अपनी फौज के साथ आते दिखे.

टीम ने परिचय दिया और बताया तो उन्होंने खुद कहा अपनी आंखों से यहां का हाल देख लीजिए. उनके कदम जैसे-जैसे आगे की ओर बढ़ रहे थे, वैसे-वैसे न जाने कितनी महिलाएं, बच्चे प्लेटफॉर्म छोड़कर पटरियों से भाग रहे थे.

कई पुरुष सामने से आए, उनकी आंखों में खाकी का डर था. जीआरपी थाना प्रभारी ओम नारायण सिंह ने कहा कि हमारी क्यूआरटी टीम लगातार इन पर नजर रखती है. हालांकि, इनकी संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है.

क्या कोई दादी गैंग सक्रिय है: जीआरपी प्रभारी ओम नारायण सिंह से सवाल किया गया कि क्या कानपुर में कोई दादी गैंग सक्रिय है? जो बच्चों को आगे करके भिक्षावृत्ति का धंधा करवाती है? इस पर उनका जवाब था, ऐसे किसी गैंग के सक्रिय होने की जानकारी नहीं है. कुछ समय पहले सांसी गैंग की जानकारी मिली थी, जिनके कुछ सदस्यों को अरेस्ट करके जेल भेजा गया था.

आप बच्चों की मॉनीटरिंग कैसे करते हैं, खासतौर से उन बच्चों पर जो ट्रेन से आते-जाते हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि हमारी क्विक रिस्पांस टीमें बच्चों पर नजर रखती हैं. अगर किसी की गतिविधि संदिग्ध लगती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए चाइल्ड लाइन समेत अन्य संस्थाओं को जानकारी दी जाती है.

लगातार चलता है अभियान: वहीं, इस मामले पर एएचटीयू थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि अभी तक किसी गैंग के सक्रिय होने की जानकारी नहीं मिली. लेकिन, यह बात सच है कि शहर के टाटमिल चौराहा पर बूढ़ी महिलाएं बच्चों के साथ भिक्षावृत्ति कर रही हैं. जल्द ही इनमें से कुछ को चिन्हित कर हम थाने लाएंगे और फिर सीडब्ल्यूसी के सदस्यों को उन्हें सौंपेंगे.

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