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कॉमनवेल्थ की उपलब्धि से खिलाड़ियों को मिलेगा बॉक्सिंग-रिंग में फायदा: वाराणसी SAI सेंटर के बॉक्सर बोले - रिंग में होगा प्रतिद्वंदी पर मनोवैज्ञानिक दबाव, ओलिंपिक लक्ष्य - Varanasi News

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Dainik Bhaskar के अनुसार5 अगस्त 2026 को 03:18 am बजे
कॉमनवेल्थ की उपलब्धि से खिलाड़ियों को मिलेगा बॉक्सिंग-रिंग में फायदा:  वाराणसी SAI सेंटर के बॉक्सर बोले - रिंग में होगा प्रतिद्वंदी पर मनोवैज्ञानिक दबाव, ओलिंपिक लक्ष्य - Varanasi News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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कॉमनवेल्थ की उपलब्धि से खिलाड़ियों को मिलेगा बॉक्सिंग-रिंग में फायदा:वाराणसी SAI सेंटर के बॉक्सर बोले - रिंग में होगा प्रतिद्वंदी पर मनोवैज्ञानिक दबाव, ओलिंपिक लक्ष्य

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हाल ही में ग्लास्गो में संपन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय बॉक्सरों ने रिंग में अपनी बादशाहत का एलान किया। कॉमनवेल्थ के इतने पुराने इतिहास में पहली बार किसी एक खेल में एक देश के इतने खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीता। जिसके बाद भारतीय बॉक्सिंग विश्व पटल पर चमक रही है। वाराणसी में खुले SAI के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग ले रहे बॉक्सर और उनके कोच ने हर्ष जताया है।

साथ ही खिलाड़ियों ने कहा इस जीत से अब रिंग में हमें मनोवैज्ञानिक फायदा मिलेगा। और हम पदक आसानी से जीतेंगे। वहीं उन्होंने यह भी कहा की उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान की अटैकिंग बॉक्सिंग के बीच भारत ने अपने टैंलेंट को दिखाया है और कीर्तिमान बनाया है। वहीं NCOE के बॉक्सिंग कोच अभिषेक मालवीय ने SAI और सरकार के प्रयासों का इसे परिणाम बताया और कहा की जो फेसिलिटी और सम्मान खिलाडियों को दिया जा रहा है। उसका ही परिणाम कॉमनवेल्थ गेम में पदक है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय बॉक्सिंग की शानदार प्रदर्शन के बाद दैनिक भास्कर ने वाराणसी के SAI सेंटर पर बॉक्सर और उनके कोच से बात की। पढ़िए रिपोर्ट…

देखिये SAI सिगरा के NCOE में बॉक्सिंग की ट्रेनिंग की तस्वीरें…

भारत के मुक्केबाजों ने बनाया कीर्तिमान

SAI के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में सीनियर कोच और हाई परफोर्मेसन मैनेजर खेलो इंडिया अभिषेक मालवीय ने बताया - कॉमवेल्थ गेम्स में रिकार्डतोड़ हमारा परफोर्मेसन रहा है। ये अनुभव बहुत बेहतरीन रहा है। अगर हम 1930 से कॉमनवेल्थ गेम्स की हिस्ट्री देखें तो आज तक किसी भी खेल में किसी भी देश ने इतने मेडल नहीं जीते। 10 मेडल भारत ने जीता जिसमें से 7 गोल्ड और तीन रजत पदक है। मतलब हमारे 10 खिलाड़ी फाइनल में पहुंचे। 7 स्वर्ण जीतना वाकई में एक कीर्तिमान है।

सिर्फ टैलंट का निखार नहीं मिलता है साइंटिफिक विकास

अभिषेक मालवीय ने बताया - उत्तर प्रदेश का भविष्य इस नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से टैलेंट सामने आएगा और उत्तर प्रदेश का नाम ऊंचा होगा। क्योंकि यहां है प्रोफाइल फेसिलिटी है। यहां टैलेंट निखरता नहीं बल्कि यहां स्पोर्ट्स साइंस के तहत उन्हें विकसित भी किया जाता है। उसके लिए यहां टीमें हैं। जो उन्हें समय-समय पर टिप्स देती हैं।

पहले माइग्रेट हो जाता था टैलेंट

अभिषेक मालवीय ने बताया - पूर्वांचल में पहले भी बॉक्सिंग का टैलेंट अच्छा रहा है। पहले हमारा जो टैलेंट था वह माइग्रेट हो जाता था। मतलब हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, चला जाता था। क्योंकि यहां फेसिलिटी नहीं थी। वो बहार जाकर ट्रेनिंग करते थे और वहां से ही खेलते थे। लेकिन सरकार ने जिस तरह से खिलाड़ियों को सम्मान और प्रोत्साहन देना शुरू किया है। और यह जो सेंटर खुला है। इससे खिलाड़ी यहीं से खेलेंगे और उत्तर प्रदेश का नाम रौशन करेंगे।

कॉमनवेल्थ में कमाल कर गए बॉक्सर

राजस्थान के दक्ष ने बताया - मुझे 8 साल हो गया है बॉक्सिंग खेलते हुए। पहली बार SAI सेंटर में चुना गया हूं। यहां की फेसिलिटी इतनी अच्छी है की अब लग रहा है की लगातार मेडल आएगा। हमारी तैयारी कॉमनवेल्थ जो अगली बार भारत में होने जा रहा है। उसमें गोल्ड लेकर आना है। भारतीय मुक्केबाजों ने हम सभी मुक्केबाजों का विश्व पटल पर सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

अब हम किसी भी फाइट में जाएंगे तो अगला बॉक्सर हमारे इस परफॉर्मेंस को जरूर याद करेगा। जिससे हमें फायदा होगा।

भारतीय मुक्केबाजों से मिली प्रेरणा, लक्ष्य ओलिंपिक

सागर हाल ही में जकार्ता में एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर आये हैं। उन्होंने बताया - कॉमनवेल्थ में भारत ने 10 पदक जीता है। इंडिया अब उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान से आगे निकल रही है बॉक्सिंग में और हमारा लक्ष्य ओलिंपिक में गोल्ड लाना है।

उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान की बक्सिंग अटैकिंग

हरियाणा के सागर ने बताया - उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान के मुक्केबाज अटैकिंग फाइट करते हैं। पर हमारी फाइट कई जगहों पर अटैकिंग नहीं होती। लेकिन जो भारतीय मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ में किया है उससे हमारा मनोबल बढ़ गया है और अब हर प्रतियोगिता में पदक आएगा।

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