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वाराणसी पुलिस ने साइबर फ्रॉड करने वाले चार आरोपी गिरफ्तार किए, लोगों के डॉक्यूमेंट पर खुलवाते थे बैंक खाता

वाराणसी पुलिस ने साइबर फ्रॉड करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह लोगों से डॉक्यूमेंट लेकर उनके नाम पर बैंक खाता खुलवा लेते थे और फिर साइबर अपराध करते थे। वाराणसी: उत्तर प्रदेश की वाराणसी पुलिस की साइबर क्राइम…

Navbharat Times के अनुसार23 अगस्त 2026 को 03:55 pm बजे
वाराणसी पुलिस ने साइबर फ्रॉड करने वाले चार आरोपी गिरफ्तार किए, लोगों के डॉक्यूमेंट पर खुलवाते थे बैंक खाता

सौजन्य से:- Navbharat Times

वाराणसी पुलिस ने साइबर फ्रॉड करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह लोगों से डॉक्यूमेंट लेकर उनके नाम पर बैंक खाता खुलवा लेते थे और फिर साइबर अपराध करते थे।

वाराणसी: उत्तर प्रदेश की वाराणसी पुलिस की साइबर क्राइम थाना और चेतगंज थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए देशभर में फैले साइबर ठगी के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी लोगों को कमीशन और पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। बाद में उन्हीं खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन बेटिंग, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और अन्य साइबर अपराधों में किया जाता था। एनसीआरपी पोर्टल पर इन आरोपियों द्वारा संचालित 41 बैंक खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से 143 शिकायतें दर्ज हैं।

ऐसे चलता था ठगी का पूरा खेल

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पहले बेरोजगार या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को फर्जी फर्म के नाम पर खाता खुलवाने के लिए तैयार करते थे। इसके बाद करंट और सेविंग अकाउंट खुलवाकर खाताधारकों से पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी और मोबाइल नंबर अपने कब्जे में ले लेते थे।

गिरोह इसके बाद पीड़ित के मोबाइल में XePay नाम की एक एपीके फाइल इंस्टॉल कराता था। पुलिस के मुताबिक, यह ऐप सिम फॉरवर्डिंग सक्रिय कर देता था, जिससे बैंक का ओटीपी सीधे आरोपियों के मोबाइल पर पहुंच जाता था। इसी तकनीक का इस्तेमाल कर आरोपी दूर बैठे-बैठे खातों से लेनदेन करते और ठगी की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लगातार रोटेट करते थे, जिससे धन का मूल स्रोत छिपा रहता था।

सरगना समेत चार आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने वाराणसी निवासी नीतीश कुमार पांडे को गिरोह का सरगना बताया है। उसके अलावा दुष्यंत सिंह, हिमांशु झा और मोहम्मद रेहान को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं, प्रतीक तिवारी और रोमिल वर्मा अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

भारी मात्रा में सामान बरामद

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने आधा दर्जन से अधिक मोबाइल फोन, लैपटॉप, चेकबुक, पासबुक, डेबिट व क्रेडिट कार्ड, शॉपिंग कार्ड तथा कई वाहन बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम का पता लगाया जा रहा है।

लेखक के बारे मेंविवेक मिश्राविवेक कुमार मिश्रा (Vivek Kumar Mishra) नवभारत टाइम्स ऑनलाइन (NBT.Com) में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक-सियासी हलचल पर नजर रखते हैं। यूपी राजनीतिक विश्लेषण, उत्तर प्रदेश में हो रही घटनाओं पर नजर रखते हैं। उत्तर प्रदेश में अपराध, प्रशासन, डेवलपमेंट, यूपी सरकारी योजनाओं पर फोकस रखते हैं। उत्तराखंड की राजनीति हलचल, विश्लेषण, अपराध और घटनाक्रम पर भी विवेक कुमार मिश्रा फोकस रखते हैं।

अनुभव

यूपी के लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा और नोएडा में हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक जागरण जैसे प्रिंट मीडिया में काम कर चुके हैं। दिसंबर 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के साथ जुड़े हैं। पत्रकारिता में 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसमें डेस्क और फील्ड दोनों में काम किया है।

शिक्षा

राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) में परास्नातक किया हुआ है। विवेक कुमार मिश्रा मूल रूप से यूपी के बाराबंकी जिले के रहने वाले हैं।... और पढ़ें

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