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यूपी में नए लिंक एक्सप्रेस-वे, स्कूटी योजना को अनुपूरक में मिलेगा वित्तीय बल, चार अगस्त को बजट होगा पेश

यूपी में चार अगस्त को पेश होने वाले अनुपूरक बजट के जरिए योगी सरकार बुनियादी ढांचे और जनकल्याण योजनाओं पर फोकस करेगी। अनुपूरक बजट का आकार 50,000 करोड़ रुपये से अधिक रहने की उम्मीद है। लखनऊ: मानसून सत्र में पेश होने वाले अ…

navbharattimes.indiatimes.com के अनुसार1 अगस्त 2026 को 03:18 am बजे
यूपी में नए लिंक एक्सप्रेस-वे, स्कूटी योजना को अनुपूरक में मिलेगा वित्तीय बल, चार अगस्त को बजट होगा पेश

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com

यूपी में चार अगस्त को पेश होने वाले अनुपूरक बजट के जरिए योगी सरकार बुनियादी ढांचे और जनकल्याण योजनाओं पर फोकस करेगी। अनुपूरक बजट का आकार 50,000 करोड़ रुपये से अधिक रहने की उम्मीद है।

लखनऊ: मानसून सत्र में पेश होने वाले अनुपूरक बजट के जरिए बुनियादी ढांचे और जनकल्याण योजनाओं पर फोकस रहेगा। 4 अगस्त को पेश होने वाले अनुपूरक बजट में विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश सरकार कुछ लोकलुभावन और कुछ नई योजनाओं की घोषणा कर सकती है। अनुपूरक बजट का आकार 50,000 करोड़ रुपये से अधिक रहने की उम्मीद है। बजट में जीरो पॉवर्टी स्कीम को और भी विस्तार दिया जा सकता है।

तीन लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए होगा बजट आवंटन

अनुपूरक बजट में प्रदेश में बनने वाले तीन नए लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए बजट आवंटन हो सकता है। अनुपूरक बजट में फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू करने के लिए धनराशि का आवंटन हो सकता है। राज्य सरकार की कोशिश है कि विधानसभा चुनावों से पहले इन लिंक एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास कर दिया जाए। इसके अलावा मौजूद एक्सप्रेस-वे की मरम्मत एवं रखरखाव, सड़क निर्माण परियोजनाओं के विस्तार के लिए अनुपूरक में व्यवस्था की जाएगी।

स्कूटी योजना के लिए भी बढ़ सकता है बजट

चुनावों से पहले राज्य सरकार स्कूटी योजना को रफ्तार देगी। हाल ही में कैबिनेट ने रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की मंजूरी दे दी है। योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक पास करने वाली टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दी जाएगी। स्कूटी हर जिले में आयोजित समारोह के दौरान वितरित जी जाएगी। इस स्कूटी को लाभार्थी किसी भी स्थिति में बेच नहीं सकेंगी। इस योजना के लिए भी बजट का आवंटन बढ़ाया जा सकता है।

परियोजनाएं पूरी करने पर रहेगा जोर

अनुपूरक बजट में सबसे अधिक जोर बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं पर रहने की संभावना है। फरवरी में पेश किए गए 9.12 लाख करोड़ रुपये के मूल बजट में भी सरकार ने अवसंरचना, रोजगार और स्वास्थ्य क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी थी। ऐसे में अनुपूरक बजट के माध्यम से गंगा एक्सप्रेस-वे पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र की संपर्क परियोजनओं, नए औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स पार्क और शहरी विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि दी जा सकती है।

रोजगार सृजन पर है सरकार का जोर

इसके आलावा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र के विकास, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क और औद्योगिक निवेश परियोजनाओं के लिए भी अतिरिक्त प्रावधान की संभावना जताई जा रही है। सरकार निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करना चाहती है।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी नजर

स्वास्थ्य क्षेत्र में जिला स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के लिए भी नई धनराशि का प्रावधान संभव है। इसी तरह विद्यालयों के आधुनिकीकरण, डिजिटल शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास से जुड़ी परियोजनाओं को भी अनुपूरक बजट में जगह मिलने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से यह बजट इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के विकास एजेंडे की दिशा तय करेगा।

संकल्प पत्र के वादों को जमीन पर उतारने की रहेगी प्राथमिकता

अनुपूरक बजट के जरिए राज्य सरकार की कोशिश संकल्प पत्र के बचे वादों को जमीन पर उतारने की होगी। सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच आने वाला यह अनुपूरक बजट महज अतिरिक्त वित्तीय प्रावधानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बीजेपी के चुनावी संकल्प पत्र में शामिल कुछ प्रमुख वादों और सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं को भी नई गति देने का माध्यम बन सकता है।

लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें

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