होमसेहतलखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर मरम्मत वाली सड़क भी उखड़ने लगी, हल्की बारिश में ही हालत खराब
सेहत

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर मरम्मत वाली सड़क भी उखड़ने लगी, हल्की बारिश में ही हालत खराब

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर मरम्मत वाली सड़क भी उखड़ने लगी, हल्की बारिश में ही हालत खराब लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे पर जिन सड़कों को मरम्मत किया गया था वह भी दोबारा उखड़ने लगी हैं। एक्सप्रेसवे पर यह हालत हल्की बारिश के बाद ह…

Hindustan के अनुसार11 अगस्त 2026 को 02:18 am बजे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर मरम्मत वाली सड़क भी उखड़ने लगी, हल्की बारिश में ही हालत खराब

सौजन्य से:- Hindustan

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर मरम्मत वाली सड़क भी उखड़ने लगी, हल्की बारिश में ही हालत खराब

लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे पर जिन सड़कों को मरम्मत किया गया था वह भी दोबारा उखड़ने लगी हैं। एक्सप्रेसवे पर यह हालत हल्की बारिश के बाद ही है। इस बार कम बारिश हुई है फिर भी सड़क की हालत खराब है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बारिश को झेल नहीं पा रहा। इस बार अनुमान से कम बरसे बदरा ने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की पोल खोल कर रख दी है। स्थिति यह है कि पूर्व में जहां-जहां सड़क पर हुए गड्ढों के कारण उखाड़ कर फिर से सड़क बनाई गई, रविवार को हुई बारिश के कारण फिर से उखड़ने लगी है। किमी 63.8 और 63.9 के पास मरम्मत की गई सड़क का तारकोल उखड़ने लगा है। वहां दरार भी पड़ने लगी है। किमी 57.5 पर ड्रेनेज की समस्या के कारण बारिश का पानी जमा नजर आया।

मरम्मत के 48 घंटे बाद ही दिखी खामी

एक्सप्रेसवे पर पहले से क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम भी सवालों के घेरे में है। किलोमीटर 63.8 और 63.9 के आसपास सड़क पर दरार दिखी। खास बात है कि शनिवार को ही यहां मरम्मत का काम कराया गया था। महज 48 घंटे के भीतर वहां सड़क का तारकोल उखड़ने लगा। ऐसे में मरम्मत की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे साफ है कि समस्या केवल सड़क की ऊपरी परत की नहीं है, बल्कि उसके नीचे की संरचना और पानी निकासी की व्यवस्था की भी है।

फेल ड्रेनेज सुधारने के लिए ड्रिल मशीन से किए जा रहे छेद-

एक्सप्रेसवे की बदहाली की सबसे बड़ी वजहों में फेल ड्रेनेज सिस्टम भी सामने आ रहा है। बारिश के पानी की निकासी नहीं होने से पानी सड़क के आसपास और उसके नीचे जमा हो रहा है। इसका सीधा असर सड़क की मजबूती पर पड़ रहा है। किलोमीटर 57.5 पर ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने का काम शुरू किया गया है। यहां कर्मचारी ड्रिल मशीन से सड़क के किनारे छेद कर पानी की निकासी का रास्ता बनाने में जुटे दिखाई दिए। कर्मचारियों के मुताबिक पानी की निकासी नहीं होने के कारण यह काम कराया जा रहा है।

पांच किमी तक उल्टी दिशा में चल रहे वाहन, हादसे की आशंका

कोरारी टोल प्लाजा कानपुर लेन पर प्रवेश बंद करने के लिए पत्थर के बोल्डर रखे गए हैं, जबकि आरएचएस टोल प्लाजा लखनऊ लेन से उल्टी दिशा से कानपुर से लखनऊ जाने वाले वाहनों को प्रवेश दिया जा रहा है। इस व्यवस्था के चलते कानपुर से लखनऊ जाने वाले वाहन करीब पांच किलोमीटर तक उल्टी दिशा में चलने को मजबूर हैं। इस दौरान सामने से 80 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आने वाले वाहनों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद कट मिलने पर वाहन सामान्य लेन में पहुंचते हैं। व्यवसायी रुद्र चौहान का कहना है कि नियमों के विपरीत तेज रफ्तार वाहनों के बीच उल्टी दिशा से सफर करना बेहद खतरनाक है। इससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।

दो स्थानों पर अब भी डायवर्जन

एक्सप्रेसवे पर दो और स्थानों पर डायवर्जन के कारण भी वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किलोमीटर 32 से 33.6 तक करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में सड़क को लगभग एक फीट गहराई तक उखाड़कर दोबारा बनाया जा रहा है। बताया गया कि करीब तीन दिन पहले दरार आने के कारण सड़क का यह हिस्सा खराब हो गया था। इसके बाद पिछले 48 घंटे से निर्माण कार्य जारी है। मौके पर काम कर रहे कर्मचारियों के अनुसार सड़क का काम पूरा होने में अभी करीब एक दिन और लग सकता है। इसी वजह से इस हिस्से में वाहनों के लिए डायवर्जन किया गया है। किलोमीटर 30 और 31 के बीच पहले कराई गई लेयरिंग और डामरीकरण के बाद अब सफेद पट्टी बनाने का काम चलता मिला। इसके कारण करीब एक किलोमीटर हिस्से में यहां भी डायवर्जन किया गया है।

खड़गपुर की टीम ने तारकोल और मिट्टी के नमूने लिए

एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर की टीम ने लगातार चौथे दिन भी जांच की। इस दौरान टीम के सदस्यों ने कुल नौ स्थानों से तारकोल और गिट्टी के नमूने एकत्र किए। कुछ स्थानों पर सड़क में तीन से चार फिट गड्ढा करवा कर वहां पानी डलवा कर उसकी निकासी का फ्लो देखा। बताया जाता है कि अधिकतर स्थानों पर पानी की निकासी का फ्लो संतोषजनक नहीं मिला।

आईआईटी खड़गपुर की टीम प्रो. केएस रेड्डी के नेतृत्व में एक्सप्रेसवे की जांच के लिए चार दिन पहले पहुंची थी। प्रो. रेड्डी ने अपनी टीम के साथ 63 किमी लंबे इस एक्सप्रसेवे की विभिन्न स्थानों पर जांच की। रविवार की रात को वह लौट गए, लेकिन उनकी टीम अभी जांच करने के लिए रुकी हुई है। बताया जाता है कि उनकी टीम के चार से छह सदस्यों ने सोमवार को कानपुर से लखनऊ वाली लेन में फिर से कुछ स्थानों पर जांच की। नौ स्थानों से तारकोल और गिट्टी के लिए नमूने लिए।

विस्तार से नमूने लेने में टीम को एक स्थान पर डेढ़ से दो घंटे का समय लगा। लिए गए नमूनों को लेकर प्राथमिक नोटिंग के बाद उन्हें प्रयोगशाला में जांच करवाने के लिए सुरक्षित रखा गया। इस दौरान टीम ने रविवार की रात को हुई बारिश को देखते हुए कुछ स्थानों से पर फिर जलनिकासी की व्यवस्था देखी।

सड़क पर किनारे की तरफ गड्ढे खुदवाए और उसमें पानी भरवा कर देखा कि यह कितनी देर में निकलता है। बताया जाता है कि अधिकतर स्थानों पर इसमें कमी मिली। टीम अभी कुछ दिन और जांच करेगी। की गई नोटिंग पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे एनएचएआई मुख्यालय को सौंपा जाएगा।

लेखक के बारे में

Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें