योगी बोले-राममंदिर आंदोलन के समय लोग कफन बांधे रहते थे: निरंकुश सरकार ने गोलियां चलवाईं, अशोक सिंघल शेर की तरह डटे रहे - Lucknow News
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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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योगी बोले-राममंदिर आंदोलन के समय लोग कफन बांधे रहते थे:निरंकुश सरकार ने गोलियां चलवाईं, अशोक सिंघल शेर की तरह डटे रहे
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सीएम योगी ने लखनऊ में कहा कि राम मंदिर आंदोलन के समय लोग कफन बांधे रहते थे। मर-मिटने को तैयार थे। जब तक राम मंदिर नहीं बनता, तब तक के लिए चप्पल और साफा छोड़ दिया। इन सबके बावजूद ताकत बिखरी हुई थी।
उन्हें एक नेतृत्व की जरूरत थी। वह नेतृत्व अशोक सिंघल ने दिया। शासन-सत्ता निरंकुश थी। राम मंदिर के लिए आंदोलन करने वालों पर गोलियां चलवाईं। उस निरंकुश सत्ता के सामने अशोक सिंघल की शेर की तरह डटे रहे।
जो काम उस समय की सरकारें नहीं कर सकीं, उसे अशोक सिंघल किया। उन्होंने एकल विद्यालय बनवाए। उन विद्यालयों में आदिवासियों के बच्चे पढ़ते हैं। योगी राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।
3 तस्वीरें देखिए-
योगी बोले- गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराना चाहते हैं कुछ नकलची
सीएम योगी ने कहा- हमने अशोक सिंघलजी के सान्निध्य में गोसेवा का जो काम सीखा था, उसे धरातल पर उतार रहे हैं। अरे गो-संरक्षण का सवाल करना है, तो उन लोगों से करो, जिन्होंने अवैध बूचड़खाने चलवाए थे।
कुछ नकलची कभी-कभी ज्ञापन देने निकलते हैं। वो कहते हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। अरे, पशुवत तुम्हारी सोच है, जो गाय को पशु घोषित कराना चाहते हो। गाय तो हमारी माता है। वह पशु नहीं है।
उद्घाटन समारोह के अपडेट्स जानने के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
अपडेट्स
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अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष उद्घाटन समारोह में विश्व हिंदू परिषद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरक्ष पीठाधीश्वर के रूप में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया था। उनके मंच पर पहुंचने पर ऑडिटोरियम जयश्रीराम के नारे लगने लगे।
समारोह में विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे भी शामिल हुए। इनके अलावा, लखनऊ के मनकामेश्वर महादेव मंदिर की महंत देव्या गिरि और मंदिरों-गुरुद्वारों के प्रमुख भी बुलाए गए थे।
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सीएम योगी ने कहा- हमने अशोक सिंघलजी के सान्निध्य में गो सेवा का जो कार्य सीखा था, उसे धरातल पर उतार रहे हैं। अरे गो-संरक्षण का सवाल करना है तो उन लोगों से करो जिन्होंने अवैध बूचड़खाने चलवाए थे।
कुछ नकलची कभी-कभी ज्ञापन देने के लिए निकलते हैं। वो कहते हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। अरे, पशुवत तुम्हारी सोच है, जो गाय को पशु घोषित कराना चाहते हो। गाय तो हमारी माता है।
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सीएम योगी बोले- हमने 2017 के बाद यूपी में 7700 गोशालाएं बनवाईं। उन गोशालाओं में 16 लाख से अधिक गाय रखकर उनका संरक्षण कर रहे हैं। हर गाय के ऊपर 1500 रुपये हर महीने उपलब्ध यूपी सरकार की ओर से कर रहे हैं, जिससे गोमाता का संरक्षण हो सके।
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सीएम योगी ने कहा- याद रखना बजरंगियो, आप सबसे कहना चाहता हूं कि गोरक्षा भाषण या सड़कों पर आंदोलन का विषय नहीं है। उत्तर प्रदेश के अंदर अवैध बूचड़खानों में गोमाता कटती थीं। हम लोगों ने 2017 में अवैध बूचड़खाने पूरी तरह बंद कराए।
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योगी ने कहा- अशोक सिंघल का ध्येय एक ही था, सनातन धर्म को आंच नहीं आने देंगे, उसकी सुरक्षा से किसी को छेड़छाड़ नहीं करने देंगे। यह वर्ष हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण वर्ष है। सन 1528 ने अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर प्रभु राम के मंदिर को तोड़कर एक विदेशी आक्रांता ने वहां गुलामी का ढांचा बना दिया।
500 वर्षो ने कोई कालखंड ऐसा नही बीता जब हिंदू समाज चुप बैठा हो,धर्माचार्य लड़ते रहे, बलिदान देते रहे। संतों, नागाओं, सिक्ख वीरों, भारत के राजाओं, नागरिकों, नारियों ने निरंतर सिर पर कफन बांधे रखा। श्रीरामजन्मभूमि के मुक्ति के लिए टूट पड़ते थे।
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सीएम योगी ने कहा- अयोध्या के लिए न कांग्रेस ने कुछ किया, न सपा ने। हमेशा राम का द्रोह किया। इसी वजह से वामपंथी राम जन्मभूमि के लिए तरह-तरह की बातें करते हैं। रामद्रोहियों को आज की अयोध्या अच्छी नहीं लगती।
रामद्रोही अयोध्या के विकास को स्वीकार नहीं कर सकते, इसलिए वे लगातार अयोध्या को बदनाम करने का प्रयास करते हैं। जो लोग पहले रामभक्तों पर गोलियां चलवाते थे और राम मंदिर का विरोध करते थे, आज वे भी अपने को रामभक्त साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। याद करिए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दिया था कि राम का अस्तित्व नहीं है।
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सीएम योगी ने कहा राम जन्म भूमि पर मंदिर के लिए लोग कफन बांधे रहते थे। अवध क्षेत्र के दर्जनों गांवों में लोग बिना चप्पल, बिना साफा चलते थे। मंदिर के लिए हर पल तैयार रहते थे लेकिन ताकत बिखरी थी। लोगों को नेतृत्व की जरूरत थी। वह नेतृत्व दिया श्रद्धेय अशोक सिंघल ने।
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विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि समाज में जो विषमताएं और आचरण के दोष आए हैं, वे धर्म की सीख नहीं हैं। पूज्य संतों ने इन दोषों को दूर करने के लिए प्रयास किए। अशोक सिंघल इस काम के अग्रदूत थे। उन्होंने सामाजिक समरसता को केवल प्रतीकात्मक विषय नहीं रहने दिया, बल्कि व्यवहार में उतारने का प्रयास किया।
उन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास का प्रसंग याद करते हुए कहा कि सैकड़ों वर्षों के संघर्ष और बलिदान के बाद जब शिलान्यास का अवसर आया, तब अनेक जगद्गुरु और धर्माचार्य उपस्थित थे। इसके बावजूद अशोक सिंघल ने आग्रह किया कि शिलान्यास कामेश्वर चौपाल के हाथों से कराया जाए। यह हिंदू समाज की सोच और आचरण में बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण था।
- अशोक सिंघल ने महिलाओं के प्रति सम्मान मजबूत करने का प्रयास किया
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने महिलाओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा का भाव मजबूत करने का भी प्रयास किया। वेदों के अध्ययन और पाठ में महिलाओं की भागीदारी को लेकर जब सवाल उठे, तब अशोक जी की प्रेरणा से नासिक की धर्म संसद में महिलाओं ने वेद पाठ करके दिखाया। यह उन रूढ़ियों को दूर करने का प्रयास था, जो धर्म के मूल ज्ञान से मेल नहीं खाती थीं।
- राम जन्मभूमि आंदोलन से युवाओं को जोड़कर खड़े किए संगठन
परांडे ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान राम-जानकी यात्रा की सुरक्षा को लेकर चुनौती आई थी। अशोक सिंघल ने युवाओं से आह्वान किया कि क्या भगवान राम की आस्था से जुड़ी यात्रा की सुरक्षा के लिए देश के युवक आगे आएंगे? इसके बाद उत्तर प्रदेश के हजारों युवा सामने आए और यात्रा सुरक्षित संपन्न हुई।
उन्होंने कहा कि इसी प्रेरणा से बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी जैसे युवा संगठन खड़े हुए। अशोक सिंघल का उद्देश्य केवल युवाओं में शौर्य और पराक्रम जगाना नहीं था, बल्कि उन्हें समाज सेवा के लिए भी तैयार करना था। वे चाहते थे कि युवा समाज के दुख और कष्ट दूर करने के लिए आगे आएं।
- सेवा कार्य और जनजातीय क्षेत्रों में विस्तार पर जोर
मिलिंद परांडे ने कहा कि अशोक सिंघल ने विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से सेवा कार्यों को बढ़ावा दिया। जनजातीय क्षेत्रों में एकल विद्यालय जैसे प्रयासों को विस्तार देने के लिए उन्होंने देश-विदेश में प्रवास किया और लोगों को इन कार्यों से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि धर्म से दूर हो रहे लोगों को समझाने और उन्हें वापस अपने धर्म से जोड़ने के लिए भी अशोक सिंघल ने व्यापक प्रयास किए। उनके लिए धर्म, समाज और संस्कृति की रक्षा केवल भाषण का विषय नहीं था, बल्कि वे स्वयं मैदान में उतरकर काम करते थे।
- गोवंश की रक्षा से लेकर संगठन निर्माण तक सक्रिय रहे
परांडे ने अशोक सिंघल के कानपुर में प्रचारक रहने के समय का एक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि रेलवे से गोवंश ले जाए जाने की जानकारी मिलने पर अशोक सिंघल स्वयंसेवकों के साथ पहुंचे और गोवंश को मुक्त कराया।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ओजस्वी वक्ता होने के साथ अच्छे गायक भी थे, लेकिन उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे अपने विचारों को व्यवहार में उतारते थे। संगठन खड़ा करना और समाज को सक्रिय करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
- युवाओं को देश और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरित किया
मिलिंद परांडे ने कहा कि अशोक सिंघल का मानना था कि भारत का युवा धर्मनिष्ठ, आध्यात्मिक और समाज के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। आज युवा स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, मंदिरों में जा रहे हैं, माता-पिता की सेवा कर रहे हैं और देश के लिए काम कर रहे हैं। यह युवा जागरण भी उनके प्रयासों की प्रेरणा से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने जीवनभर हिंदुत्व, धर्म, संस्कृति और समाज की रक्षा के लिए काम किया। उनका जीवन समाज के लिए आदर्श है।
- अशोक सिंघल के विचारों को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि
परांडे ने कहा कि अशोक सिंघल का विचार था कि पुनर्जन्म में विश्वास रखने वाले व्यक्ति को अपना जीवन देश, धर्म और संस्कृति के लिए समर्पित करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक महामंत्री के उस विचार का भी उल्लेख किया कि प्रतिक्रिया के डर से क्रिया करना कभी नहीं भूलना चाहिए।
परांडे के मुताबिक, अशोक सिंघल ने इस संकल्प को पूरी सक्रियता से जीवनभर निभाया। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल के जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म, संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र की रक्षा के लिए काम करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से धातुकर्म इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। बाद में संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बने। 1980 में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में जिम्मेदारी मिली। 1984 में वे संगठन के महासचिव बने और बाद में अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभाई। अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती थी। आंदोलन के दौरान कारसेवा और राम मंदिर निर्माण के लिए जनसमर्थन जुटाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम में उनका निधन हो गया था।
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