उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आखिर क्यों उत्सुक हैं जापानी कंपनियां? जानिए बड़े कारण
उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आखिर क्यों उत्सुक हैं जापानी कंपनियां? जानिए बड़े कारण गवर्नर कोटारो नागासाकी ने UP में स्वच्छ ऊर्जा, अत्याधुनिक तकनीक, ऑटोमोबाइल, कौशल विकास और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभ…

सौजन्य से:- etvbharat.com
उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आखिर क्यों उत्सुक हैं जापानी कंपनियां? जानिए बड़े कारण
गवर्नर कोटारो नागासाकी ने UP में स्वच्छ ऊर्जा, अत्याधुनिक तकनीक, ऑटोमोबाइल, कौशल विकास और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाओं पर सहमति जताई
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 19, 2026 at 7:33 PM IST
|Updated : August 19, 2026 at 8:19 PM IST
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सहयोगियों के साथ बुधवार को दिल्ली में 'उप्र-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 में निवेश पर महामंथन' कार्यक्रम में बड़ी उम्मीदें लेकर पहुंचे हैं. इस मौके पर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि और जापान की कई बड़ी कंपनियों के सीईओ एक साथ बैठेंगे और समझौतों को अंतिम रूप देने पर चर्चा करेंगे.
इस दौरान ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और मेन्युफैक्चरिंग पर विशेष समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे. इसके साथ ही ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश पर भी बातचीत हो रही है. यही नहीं, एस्कॉर्ट्स कुबोटा और मिंडा कंपनियों की 3,191 करोड़ की परियोजनाओं की वर्चुअल ग्राउंड ब्रेकिंग भी हो रही है.
इन योजनाओं से उत्तर प्रदेश में 10 हजार से ज्यादा युवाओं के रोजगार के अवसर मिलने के दावे किए जा रहे हैं. इन दावों के बीच असली सवाल यह है कि 200 से ज्यादा जापानी कंपनियां आखिर उत्तर प्रदेश में ऐसा देख क्या रही हैं? साथ ही उनका निवेश प्रदेश के किन जिलों तक पहुंचेगा. दस्तावेजों और सरकारी बयानों पर नजर डालने से पता चलता है कि जापान की रुचि सिर्फ निवेश तक नहीं है, बल्कि वह एक खास तरह का व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र भी बनाना चाहता है.
सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट में भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. ग्रीन एनर्जी के तहत अक्षय ऊर्जा, क्लीन टेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन के साथ ही मेन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोटिव में ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और डेटा सेंटर बनाने का इच्छुक है.
हालांकि लोगों के मन में एक बात जरूर आती है कि आखिर जापान को उत्तर प्रदेश में ऐसा क्या दिख रहा है कि वह इतना बड़ा निवेश कर रहा है. इसका जवाब है उत्तर प्रदेश के बाजार का बड़ा आकार. 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में जापान के उद्योगपतियों को एक बड़ा उपभोक्ता बाजार दिखाई दे रहा है.
यह कंपनियां यहां मेन्युफैक्चरिंग बेस तक सीमित नहीं रहना चाहती हैं, बल्कि उन्हें उत्पादों की बिक्री के लिए एक बड़ा बाजार भी दिखाई दे रहा है. इसके साथ ही पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के आधारभूत ढांचे के सुधार में काफी काम किया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश की छवि बदली है और निवेशकों का रुझान भी बढ़ा है. तीसरा कारण है कनेक्टिविटी. प्रदेश में देश के सबसे अधिक एक्सप्रेस-वे और हवाई अड्डे हैं. यह भी निवेशकों को आकर्षित करता है.
यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर ने जताई व्यापक संभावनाओं पर सहमति
यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा, अत्याधुनिक तकनीक, ऑटोमोबाइल, कौशल विकास और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त उपक्रम और निवेश की व्यापक संभावनाओं पर सहमति जताई है. यानी टूरिज्म कोई सांकेतिक विषय नहीं, बल्कि जापानी पक्ष की प्राथमिकता सूची में बराबर की जगह रखता है.
यामानाशी के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह से मिलकर आधुनिक पर्यटन अवस्थापना, बेहतर कनेक्टिविटी, हॉस्पिटलिटी और वेलनेस टूरिज्म में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की है. यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा क्षेत्र में जेवर हवाई अड्डे के निकट केंद्र सरकार ने पहले ही 3700 करोड़ के सेमीकंडक्टर प्लांट को मंजूरी दे रखी है. यह प्रोजेक्ट एचसीएल की साझेदारी में चलाया जाएगा.
दरअसल, अभी जमीनी निवेश फिलहाल यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) और ग्रेटर नोएडा तक ही सिमटा दिख रहा है. यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश में जापानी मैन्युफैक्चरिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. वाराणसी और आगरा में उद्योग लगाने और जमीनी स्तर पर पूंजी लगने के बीच अभी काफी काम बाकी है. हालांकि वाराणसी के सारनाथ और कुशीनगर (बौद्ध सर्किट) में जापान की रुचि सिर्फ व्यावसायिक नहीं है, बल्कि इसे जापान के धर्म और संस्कृति से जोड़कर भी देखा जा रहा है.
इसलिए इस क्षेत्र में निवेश की संभावना भी कम नहीं है. यदि रोजगार की बात करें, तो तयशुदा निवेश यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र तक ही सीमिट हैं. ऐसे में जिन 10 हजार से अधिक रोजगार के अवसरों की बात हो रही है, वह सिर्फ दो कंपनियों के माध्यम से इन्हीं क्षेत्रों में पैदा होंगे. शेष 200 कंपनियों की के निवेश और उससे उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों की तस्वीर अभी साफ नहीं है.
ये भी पढ़ें- CM योगी दिल्ली पहुंचे, जापानी उद्यमियों से मुलाकात; UP में निवेश के लिए 6 दिन का कार्यक्रम
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