बारिश को लेकर मिलने वाली है खुशखबरी, कब-कहां भिगोएंगे बादल? यूपी को लेकर IMD ने दिया अपडेट
बारिश को लेकर मिलने वाली है खुशखबरी, कब-कहां भिगोएंगे बादल? यूपी को लेकर IMD ने दिया अपडेट यूपी में फिलहाल मॉनसून सुस्त पड़ चुका है। पिछले कई दिनों से प्रदेश के कुछ जिलों में बूंदाबांदी तक नहीं हुई है। इसके चलते उमस भरी…

सौजन्य से:- Hindustan
बारिश को लेकर मिलने वाली है खुशखबरी, कब-कहां भिगोएंगे बादल? यूपी को लेकर IMD ने दिया अपडेट
यूपी में फिलहाल मॉनसून सुस्त पड़ चुका है। पिछले कई दिनों से प्रदेश के कुछ जिलों में बूंदाबांदी तक नहीं हुई है। इसके चलते उमस भरी गर्मी ने बेहाल कर दिया है। सूरज ने भी आग उगलनी शुरू कर दी है। हालांकि मौसम विभाग ने बारिश को लेकर अच्छी खबर सुनाई है।
UP Rain Update: मॉनसून को लेकर यूपी में बड़ी धीमी रफ्तार ने उमस बढ़ा दी है। पिछले कई दिनों से उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बारिश की बूंद तक नहीं गिरी है। जुलाई में मॉनसून ने जिस तरह से एंट्री ली थी, वह महीना खत्म होते होते सुस्त पड़ चुकी है, लेकिन अगस्त को लेकर मौसम विभाग ने खुशखबरी सुनाई है। मौसम विभाग ने बताया कि पहले सप्ताह से एक बार फिर मॉनसून उत्तर प्रदेश में छा जाएगा। इससे किसानों की चिंता जरूर बढ़ जाएगी, लेकिन उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत मिलेगी।
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में गहरा दबाव यानी डीप डिप्रेशन बन गया है। जिसके चलते मध्य छत्तीसगढ़ और उससे सटे उत्तर आंतरिक ओडिशा के ऊपर मॉनसून पहुंच गया है। यही वजह है कि मॉनसून की मुख्य गतिविधियां फिलहाल मध्य भारत की ओर शिफ्ट हो गई हैं। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई के अंतिम दिनों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं, लेकिन जैसे ही यह सिस्टम कमजोर होगा, मॉनसून ट्रफ दोबारा उत्तर की ओर खिसकेगी। जिसके चलते अगस्त के पहले सप्ताह से एक बार फिर यूपी में बारिश का दौर शुरू हो जाएगा।
यूपी में कहां-कितनी हुई बारिश
यूपी में दक्षिण-पश्चिम मानसून में अब तक सामान्य से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मौसम विभाग ने अगस्त की शुरुआत में मानसून के फिर सक्रिय होने का अनुमान जताया है, लेकिन वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और बुआई की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में एक जून से 29 जुलाई के बीच 258.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 342.8 मिलीमीटर होती है। इस प्रकार राज्य में सामान्य से 25 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस अवधि के दौरान राज्य में सबसे कम 252.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 370.4 मिलीमीटर होती है। इस प्रकार पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से 32 प्रतिशत कम बारिश हुई। भदोही, देवरिया, जौनपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, कुशीनगर, रायबरेली, संत कबीर नगर और सीतापुर समेत कई जिलों में बारिश की कमी 50 प्रतिशत से अधिक रही। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में लंबे समय से शुष्क स्थिति बने रहने का संकेत है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जहां सामान्य 304.2 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 267 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस प्रकार बारिश में 12 प्रतिशत की कमी रही। हालांकि, बारिश हर जगह एक समान नहीं हुई। मेरठ, मुजफ्फरनगर और संभल में मानसून के दौरान अत्यधिक बारिश हुई, जबकि गौतम बुद्ध नगर, पीलीभीत, शामली और अमरोहा में लगातार काफी कम बारिश दर्ज की गई।
बारिश को लेकर क्या बोले कृषि विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में धान की रोपाई तथा मक्का, दलहन और तिलहन जैसी फसलों की बुआई के लिए जुलाई महत्वपूर्ण महीना होता है। यहां स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी रामेन्द्र कुशवाहा ने कहा, 'बारिश में लगातार कमी, विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में, फसलों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है क्योंकि इस क्षेत्र में खेती का बड़ा हिस्सा वर्षा पर निर्भर है। इससे सिंचाई पर निर्भरता और किसानों की लागत बढ़ सकती है।' हालांकि, मौसम विभाग ने कहा कि अगस्त के पहले सप्ताह में मानसून के फिर सक्रिय होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरे दबाव का क्षेत्र मध्य छत्तीसगढ़ और उससे सटे ओडिशा के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ा है, जिससे मध्य भारत में मानसून की गतिविधियां तेज हो रही हैं। मौसम विज्ञान ने कहा कि इस मौसम प्रणाली के कमजोर पड़ने के बाद मानसून के उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे अगस्त के शुरुआती दिनों में पूरे राज्य में इसकी गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं। बारिश में कुछ समय के लिए आई कमी के बावजूद इस सप्ताह के अंत तक तापमान में अधिक वृद्धि होने की संभावना नहीं है क्योंकि तेज हवाएं चलने से तापमान नियंत्रित रहेगा।
वाराणसी में बोट संचालन पर रोक
वाराणसी में गुरुवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। तेज हवाओं के साथ शहर के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। वहीं, गंगा का जलस्तर भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए पुलिस प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सभी प्रकार की नावों और बोटों के संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। जल पुलिस के अनुसार, तेज हवाओं के कारण यह निर्णय लिया गया है। यदि शाम तक हवा की रफ्तार कम होती है तो स्थिति की समीक्षा के बाद संचालन की अनुमति दी जा सकती है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को गंगा का जलस्तर 61.84 मीटर दर्ज किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक सुबह से 20 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। मौसम में आए बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। जल पुलिस ने सुबह से ही नाविकों को नावों के संचालन पर रोक की सूचना देना शुरू कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और तेज हवाओं के कारण नदी में नौकायन जोखिमपूर्ण हो गया है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए नाव और बोट संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
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करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।
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