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गोरखपुर बालिका हत्याकांड: कमरे से ही बांका लेकर निकला था बर्खास्त सिपाही, पीसीआर में खुली दरिंदगी की परतें - gorakhpur minor murder dismissed cop planned attack with weapon

गोरखपुर बालिका हत्याकांड: कमरे से ही बांका लेकर निकला था बर्खास्त सिपाही, पीसीआर में खुली दरिंदगी की परतें पुलिस कस्टडी रिमांड में बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव ने कबूला कि वह कमरे से ही बांका लेकर किसी महिला या बच्ची को न…

Jagran के अनुसार5 अगस्त 2026 को 05:18 am बजे
गोरखपुर बालिका हत्याकांड: कमरे से ही बांका लेकर निकला था बर्खास्त सिपाही, पीसीआर में खुली दरिंदगी की परतें - gorakhpur minor murder dismissed cop planned attack with weapon

सौजन्य से:- Jagran

गोरखपुर बालिका हत्याकांड: कमरे से ही बांका लेकर निकला था बर्खास्त सिपाही, पीसीआर में खुली दरिंदगी की परतें

पुलिस कस्टडी रिमांड में बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव ने कबूला कि वह कमरे से ही बांका लेकर किसी महिला या बच्ची को निशाना बनाने निकला था। उसने बच्ची की ह ...और पढ़ें

HighLights

- बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव बांका लेकर निकला था।

- उसका उद्देश्य किसी महिला या बच्ची को निशाना बनाना था।

- पुलिस पुराने अपहरण मामले में भी कड़ी पैरवी करेगी।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर)के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है। विवेचक की पूछताछ में सामने आया कि बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव ने अचानक वारदात नहीं की,बल्कि पुलिस लाइन स्थित अपने कमरे से ही बांका (धारदार हथियार) लेकर निकला था। उसका उद्देश्य पहले से किसी महिला या बच्ची को निशाना बनाना था। अब पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उसने बांका कब और कहां से खरीदा था।

मंगलवार सुबह छह बजे जब पुलिस अभिषेक यादव को जिला कारागार से कस्टडी रिमांड पर लेकर निकली तो पूरे रास्ते वह चुप रहा। सबसे पहले पुलिस उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां से उसने 29 जुलाई की रात दस वर्षीय बच्ची को बहला-फुसलाकर बाइक पर बैठाया था।

वहां से विवेचक उसी मार्ग से उसे चिउटहा पुल के पास स्थित श्मशान घाट और फिर उस स्थान पर ले गए, जहां बच्ची का शव मिला था। जैसे ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, विवेचक ने उससे एक-एक कर सवाल पूछने शुरू किए। शुरुआत में वह चुप्पी साधे रहा, लेकिन बाद में उसने वारदात स्वीकार करते हुए पूरी घटना का क्रम बताया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसने कहा कि बच्ची के शोर मचाने पर उसे लगा कि आसपास के लोग पहुंच जाएंगे। पकड़े जाने के डर से उसने पहले बच्ची का गला दबाया और फिर साथ लाए बांके से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने और साक्ष्य मिटाने की नीयत से शव को क्षत-विक्षत कर नदी में फेंक दिया।

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आरोपित की निशानदेही पर पुलिस ने घटनास्थल के पास झाड़ियों से हत्या में प्रयुक्त बांका भी बरामद कर लिया। अब हथियार को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। विवेचना का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु अब यह है कि अभिषेक यादव यह धारदार हथियार कहां से लेकर आया था। पुलिस उसके खरीदने के स्थान, समय और उससे जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि यह साबित हो जाता है कि वह पहले से हथियार लेकर निकला था, तो यह वारदात की पूर्व नियोजित मंशा को और मजबूत करेगा। पुलिस रिकार्ड के अनुसार, अभिषेक यादव पर इससे पहले भी युवती का अगवा कर छेड़खानी व मारपीट करने का आरोप लग चुका है। फरवरी 2025 में उसने पश्चिम बंगाल की रहने वाली एक युवती और उसके प्रेमी को रेलवे स्टेशन से पूछताछ के बहाने अपनी बाइक पर बैठाया था।

आरोप है कि उसने प्रेमी को गोरखनाथ थाने के पास उतार दिया और युवती को सुनसान स्थान पर ले जाकर छेड़खानी की। पहचान छिपाने के लिए बाइक पर फर्जी नंबर प्लेट भी लगा दी थी। पुलिस अब उस मुकदमे में भी प्रभावी पैरवी कर उसकी जमानत निरस्त कराने और कठोर सजा सुनिश्चित कराने की तैयारी कर रही है।

यह भी पढ़ें- गोरखपुर बालिका हत्याकांड में छह दिन में चार्जशीट, बर्खास्त सिपाही ने बरामद कराया बांका

गाजीपुर का रहने वाला है आरोपित

बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव मूल रूप से ग्राम हंसराजपुर चौरा, थाना सादियाबाद, जनपद गाजीपुर का निवासी है। वह वर्ष 2018 बैच का आरक्षी था और घटना के समय डायल-112 में तैनात था। बालिका हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

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