होमधर्म-आस्थागोरखपुर में मिलावट का जाल; गाय-भैंसें घटीं, आबादी बढ़ी, फिर भी डेयरी प्रोडक्ट से बाजार गुलजार
धर्म-आस्था

गोरखपुर में मिलावट का जाल; गाय-भैंसें घटीं, आबादी बढ़ी, फिर भी डेयरी प्रोडक्ट से बाजार गुलजार

गोरखपुर में मिलावट का जाल; गाय-भैंसें घटीं, आबादी बढ़ी, फिर भी डेयरी प्रोडक्ट से बाजार गुलजार असली-नकली पनीर, खोवा को कैसे पहचाने? पढ़िए श्वेता मिश्रा के संपादन में संवाददाता मुकेश पाण्डेय की खास रिपोर्ट... By ETV Bharat…

ETV Bharat के अनुसार29 अगस्त 2026 को 12:31 pm बजे
गोरखपुर में मिलावट का जाल; गाय-भैंसें घटीं, आबादी बढ़ी, फिर भी डेयरी प्रोडक्ट से बाजार गुलजार

सौजन्य से:- ETV Bharat

गोरखपुर में मिलावट का जाल; गाय-भैंसें घटीं, आबादी बढ़ी, फिर भी डेयरी प्रोडक्ट से बाजार गुलजार

असली-नकली पनीर, खोवा को कैसे पहचाने? पढ़िए श्वेता मिश्रा के संपादन में संवाददाता मुकेश पाण्डेय की खास रिपोर्ट...

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 29, 2026 at 4:56 PM IST

गोरखपुर: गोरखपुर में दूध का गणित गड़बड़ा गया है. 2019 के मुकाबले जिले में गाय 25% और भैंस 11% घट गईं हैं. जबकि 5 साल में आबादी 10 लाख बढ़ गई. रोज की जरूरत 18 लाख लीटर दूध की है और उत्पादन है सिर्फ 13.6 लाख लीटर. फिर भी हर चौराहे पर चाय की दुकान चल रही है, हर घर में दूध पहुंच रहा है और बाजार पनीर-खोवा-मिठाई से पटा है. फिर सवाल उठता है कि ये दूध आ कहां से रहा है? जवाब है- मिलावट. इस बात की तस्दीक करते हैं मिलावट के खिलाफ हाल ही में लिए गए एक्शन. रक्षाबंधन पर जिले में 5000 किलो नकली मिठाई-पनीर पकड़ा गया है. दरअसल, मांग और उत्पादन के इस गैप को भरने के लिए एनालॉग पनीर और सिंथेटिक खोवा बाजार में उतारा जा रहा है.

आंकड़े बताते सच: मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पांडेय कहते हैं, गोरखपुर से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में दुधारू पशुओं की बात करें तो उनकी संख्या लगातार घट रही है. बावजूद इसके हर दिन की डिमांड के साथ त्योहारी सीजन के में भी मिठास और अन्य डेयरी प्रोडक्ट की डिमांड को बाजार पूरी कर देता है. बात करें गोरखपुर की तो वर्ष 2019 के सापेक्ष 2026 में 74.62% गोवंशीय और 89.19 महिषवंशीय पशु ही बचे हुए हैं और इन 5 वर्षों में जनसंख्या में 10 लाख से अधिक का इजाफा हो गया है फिर भी सबकी डिमांड पूरी हो रही है.

डॉ. धर्मेंद्र के मुताबिक, मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में कुल 1 करोड़ 90 लाख 19641 गोवंश पशुओं की संख्या है तो महिषवंशीय (भैंस की प्रजाति) पशुओं की संख्या 3 करोड़ 30 लाख 16785 है. जबकि गोरखपुर की बात करें तो वर्ष 2019 में 262990 गोवंशीय और 233473 महिषवंशीय पशु थे. यह संख्या घटकर क्रमशः 196253 और 2 लाख 8244 हो गई है.

क्या कहता पशुपालन विभाग: पशुओं की इन्हीं संख्या के बदौलत जिले की 55 लाख आबादी को दूध की आपूर्ति होती है. पशुपालन विभाग का मानना है कि एक समय में 40% से भी कुछ कम ही गाय और भैंस दूध देती हैं. इस हिसाब से अधिकतम 73366 गायें और 7863 भैंसें दूध देंगी.

मंडलीय पशु प्रयोगशाला के अधीक्षक डॉ. संजय कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि पूर्वांचल की गाय और भैंस अधिकतम 8 से 10 और 6 से 8 लीटर ही दूध देती हैं. इससे जिले की खपत पूरी नहीं हो पाती. इसलिए बाहर से विभिन्न डेयरी से लाखों लीटर दूध प्रतिदिन जिले में आता है. गोरखपुर में अधिकतम दूध का उत्पादन 13,64,564 लीटर प्रतिदिन है. ऐसे में प्रति व्यक्ति का हिस्सा 248 मिलीलीटर ही आ रहा है.

अब सवाल ये है कि हर चौराहे पर चाय वालों की थोक मांग और हर घर की जरूरत पूरी करने के बाद इस दूध से पनीर, खोवा और मिठाई भी तैयार की जा रही है, कैसे? मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र पांडे कहते हैं कि पशुओं की संख्या घटी जरूर है, लेकिन लोग दुधारू पशुओं को पालने पर जोर दे रहे हैं.

पशुपालन में आ रही ये समस्याएं: पशुओं को पालने में एक समस्या अभी आ रही है कि जो ऑर्गेनाइज डेयरी है, वह तो संचालित हो रही है, लेकिन जो 2-4 पशु पालने वाले लोग थे, उन्हें मजदूर और आदमी नहीं मिल रहें कि पशुपालन हो सके. घरों में 1-2 पशु पालने की प्रथा जैसे खत्म होती जा रही है, इसलिए ये संकट और सामने आ रहा है. हालांकि, प्रदेश की योगी सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं को जनता के बीच ला चुकी है, जिससे उम्मीद है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन और पशुपालन में नेशनल नार्म्स को पार कर जाएगा.

इन जिलों से आए मिलावटी मामले: रक्षाबंधन से पहले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने मिलावटखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की. यूपी के तमाम शहरों में FSDA की टीम लगातार कार्रवाई कर रही. इस कड़ी में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने हापुड़, मथुरा, शाहजहांपुर, उन्नाव समेत कई जिलों में छापा मारकर मिलावटी क्रीम, दूध, खोवा, पनीर, मिठाई, दही आदि बरामद कर नष्ट कराया. इसके साथ ही देश के कई बड़े शहरों में मिलावटी पनीर, खोवा और मिठाई पकड़ी जा चुकी है.

रक्षाबंधन पर पकड़ाया नकली मिठाई, पनीर, खोवा: गोरखपुर में भी रक्षाबंधन के दौरान करीब 5000 किलो मिठाई, पनीर, खोवा पकड़ा गया, जिसमें ज्यादा से ज्यादा नष्ट कराया गया और उनके नमूने भी जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं. पहले भी यहां पर मिलावटी पकड़े जा चुके हैं, जिसमें पिपराइच में नकली पनीर की फैक्ट्री पकड़ी गई थी. जिसका संचालन हरियाणा से आए हुए लोग करते थे. जहां करीब ढाई हजार किलोग्राम मिलावटी पनीर और 800 लीटर दूध नष्ट कराया गया था. मौके से सिंथेटिक रंग, सैकरीन समेत संदिग्ध सामग्री मिली थी और नमूने जांच के लिए भेजे गए थे जिसमें मिलावट की पुष्टि भी हुई. आरोपी जेल की सलाखों के पीछे हैं.

ऐसे पहचानें असली और मिलावटी पनीर-

- पनीर को पहचानने के लिए इसका छोटा टुकड़ा हाथ में लें.

- अपनी उंगली से मसलें.

- अगर पनीर नरम और दानेदार होकर बिखर जाता है तो असली है.

- एनालॉग पनीर रबड़ की तरह खींचे जा सकते हैं और बिल्कुल चिकना रहेगा.

- पनीर के टुकड़े को उबले पानी में डालें.

- ठंडा होने पर उसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डालें.

- अगर पानी का रंग नीला हो जाता है तो उसमें स्टार्च या उबले आलू की मिलावट हुई है.

- इसके अलावा पनीर का टुकड़ा बिना तेल या घी के तवे पर गर्म करें.

- असली पनीर हल्का सुनहरा हो जाएगा.

- नकली पनीर पिघलने या टूटने लगेगा.

- असली पनीर काटते समय थोड़ा खुरदुरा रहता है और किनारे बिखरते हैं.

- एनालॉग पनीर प्लास्टिक की तरह एकदम सीधा और चिकना रहता है.

गोरखपुर की दुग्ध उत्पादन प्रभारी अधिकारी रेणु कुमारी के अनुसार पंजीकृत विभिन्न समितियां और किसानों के माध्यम से प्राइवेट और सरकारी दुग्ध उत्पादक 8 लाख लीटर दूध रोजाना इकट्ठा कर लेते हैं. जबकि गैर पंजीकृत का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. वहीं प्रति व्यक्ति 300 मिली लीटर दूध की खपत के मानक के अनुसार गोरखपुर में रोजाना 18 लाख लीटर दूध की खपत का अनुमान है.

वहीं अगर यहां पाले गए दुधारू पशुओं से उत्पादन देखें तो ये प्रति व्यक्ति मानक को पूरा करने में काफी कम है. ऐसे में 200 से 250 रुपए किलो तक में पनीर कैसे बेचा जा रहा है ये बड़ा सवाल है? उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 20 से 30 क्विंटल खोवा कानपुर और आसपास के जिलों से ट्रेनों और बस के जरिए गोरखपुर पहुंचता है. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) लगातार जांच कर रही है, दुकानों पर छापेमारी कर कार्रवाई की जा रही है.

ये भी पढ़ें- मिठाइयों में घुली महंगाई और मिलावट की कड़वाहट, रक्षाबंधन पर बिगड़ा लोगों का स्वाद

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें