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गोरखपुर में भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ, CM योगी बोले- श्रीमद्भागवत दिखाती है सत्य का मार्ग - yogi adityanath bhagwat katha guides amidst social media halftruths

गोरखपुर में भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ, CM योगी बोले- श्रीमद्भागवत दिखाती है सत्य का मार्ग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सोशल मीडिया के अर्धसत्य से उत्पन्न भ्रम के बीच श्रीमद्भागवत कथा जीवन को सही ...…

Jagran के अनुसार23 सितंबर 2026 को 09:04 pm बजे
गोरखपुर में भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ, CM योगी बोले- श्रीमद्भागवत दिखाती है सत्य का मार्ग
 - yogi adityanath bhagwat katha guides amidst social media halftruths

सौजन्य से:- Jagran

गोरखपुर में भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ, CM योगी बोले- श्रीमद्भागवत दिखाती है सत्य का मार्ग

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सोशल मीडिया के अर्धसत्य से उत्पन्न भ्रम के बीच श्रीमद्भागवत कथा जीवन को सही ...और पढ़ें

HighLights

- मुख्यमंत्री योगी ने श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ किया।

- सोशल मीडिया के अर्धसत्य से बढ़े भ्रम पर चिंता व्यक्त की।

- कथा को जीवन में सत्य और शांति का मार्ग बताया।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान समय में सामान्य व्यक्ति के लिए सत्य और असत्य के बीच अंतर कर पाना चुनौती बन गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने सत्य और असत्य के बीच अर्धसत्य का एक नया तथ्य खड़ा कर दिया है।

अर्धसत्य कभी सत्य नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में पूरी दुनिया की मानवता अवसाद और भ्रम से जूझ रही है। इन चुनौतियों के बीच श्रीमद्भागवत जैसी पावन कथाएं जीवन को सही दिशा देने का कार्य करती हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को गोरखनाथ मंदिर के दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज की 12वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।

व्यासपीठ का पूजन करने के बाद उन्होंने कहा कि विज्ञान ने भले ही अभूतपूर्व प्रगति कर ली हो, लेकिन जीवन में स्थायी शांति की तलाश में आज भी विश्व की मानवता भारत भूमि की ओर देखती है।

उन्होंने कहा कि भारत में पावन कथाओं के वाचन और श्रवण की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है। यह परंपरा कठिन परिस्थितियों और जीवन की चुनौतियों में मनुष्य का मार्गदर्शन करती है। कथाओं के श्रवण के माध्यम से व्यक्ति अपनी विरासत और जीवन मूल्यों को समझने का अवसर प्राप्त करता है। यही कारण है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही है।

मन, वचन और कर्म की एकरूपता से दूर होता है जीवन का भ्रम

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में तब प्रभाव पैदा होता है, जब उसके आचरण और विचारों में समानता होती है। मनसा, वाचा और कर्मणा जब व्यक्ति एक ही दिशा में आगे बढ़ता है तो सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। इसके विपरीत मन, वचन और कर्म में एकरूपता नहीं होने पर व्यक्ति के भीतर भ्रम पैदा होता है। उसे यह तय करने में कठिनाई होती है कि क्या करना है और क्या नहीं करना है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति की दशा ‘न घर की न घाट की’ जैसी हो जाती है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत की कथा इसी भ्रम को दूर करने का माध्यम है। कथा व्यक्ति को जीवन की वास्तविकता से परिचित कराने के साथ अज्ञानता से मुक्ति का मार्ग भी दिखाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को समझने और उसके उद्देश्य को जानने का माध्यम भी रही है।

भक्ति, ज्ञान और निष्काम कर्म की प्रेरणा देती है श्रीमद्भागवत

मुख्यमंत्री ने कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास महाराज का गोरक्षपीठ में स्वागत करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण के वाचन और श्रवण की परंपरा करीब पांच हजार वर्ष पुरानी है। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को ज्ञान, भक्ति और निष्काम कर्म की प्रेरणा मिलती है। जीवन के उद्देश्य और उसके रहस्यों को समझने में यह कथा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि करीब पांच हजार वर्ष पूर्व शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा सुनाई थी। इसके बाद लंबा कालखंड बीत गया, लेकिन सनातन संस्कृति ने अनेक उतार-चढ़ाव और चुनौतियों का सामना करते हुए इस परंपरा को जीवंत रखा। उत्थान और पतन की अनेक घटनाओं के बीच भी श्रीमद्भागवत की कथा पीढ़ियों की स्मृतियों में सुरक्षित रही। यह कथा मनुष्य को जीवन की वास्तविकता का बोध कराते हुए अज्ञान से मुक्ति की दिशा प्रदान करती है।

मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद वृंदावन से पधारे मलूकपीठाधीश्वर श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास जी महाराज ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया। कथा प्रतिदिन अपराह्न तीन बजे से शाम छह बजे तक होगी और 29 सितंबर को इसका विराम होगा।

इससे पहले श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ से पूर्व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मुख्य मंदिर से दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार स्थित कथा स्थल तक शोभायात्रा निकाली गई। शंख ध्वनि और वेदपाठी विद्यार्थियों के वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा स्थल पहुंचने पर अखंड ज्योति स्थापित की गई। पोथी प्रतिष्ठा के बाद कथा व्यास के व्यासपीठ पर विराजमान होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य यजमानों ने व्यासपीठ तथा कथा व्यास का पूजन किया।

इस अवसर पर जगद्गुरु स्वामी सुग्रीव किलाधीश अयोध्या के विश्वेश प्रपन्नाचार्य, रामलला सदन अयोध्या के जगद्गुरु राघवाचार्य, स्वामी श्रीधराचार्य, महंत नारायण गिरी, अवधेश दास, रामलखन दास, राजू दास, रामानंद दास, बालक दास और जयबख्श दास सहित अनेक संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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