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यूपी की महिला दरोगा कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतकर रो पड़ीं: कहा-जहां से आती हूं, वहां इतना बड़ा सपना देखना आसान नहीं, पिता साइकिल मैकेनिक थे - Ghaziabad News

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bhaskar.com के अनुसार1 अगस्त 2026 को 09:18 am बजे
यूपी की महिला दरोगा कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतकर रो पड़ीं:  कहा-जहां से आती हूं, वहां इतना बड़ा सपना देखना आसान नहीं, पिता साइकिल मैकेनिक थे - Ghaziabad News

सौजन्य से:- bhaskar.com

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यूपी की महिला दरोगा कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतकर रो पड़ीं:कहा-जहां से आती हूं, वहां इतना बड़ा सपना देखना आसान नहीं, पिता साइकिल मैकेनिक थे

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गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता डे ने शुक्रवार को कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने जूडो में कनाडा की खिलाड़ी को मात दी। गोल्ड जीतने के बाद वह भावुक हो गईं। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

उन्होंने आंसू पोछते हुए कहा-

मैं जहां से आती हूं, वहां लोग इतने बड़े सपने नहीं देखते कि कोई इस ऊंचे स्तर तक पहुंच सके। माता-पिता ने मेरा बहुत साथ दिया। हालांकि, मां खेलों के बारे में थोड़ा कम समझती हैं। जब मेरे घुटने में चोट लगी थी, तब मेरे पिता मेरे लिए दिल्ली आए, दवाइयां दिलाईं और हर चीज में मेरी मदद की। दिसंबर 2025 में ब्रेन स्ट्रोक से उनका निधन हो गया।

अस्मिता डे त्रिपुरा की रहने वाली हैं। साल 2023 में स्पोर्ट्स कोटे से यूपी पुलिस में भर्ती हुई थीं। पिता साइकिल मैकेनिक थे। उन्होंने कहा, "मैं सीएम योगी जी का धन्यवाद करना चाहती हूं, क्योंकि उन्होंने मुझे यूपी पुलिस में नौकरी दी। इस नौकरी से मुझे सहारा मिला। इसी की बदौलत मैं यहां तक पहुंची और गोल्ड मेडल जीत सकी।"

2 तस्वीरें देखिए-

2023 में कॉन्स्टेबल के पद पर ज्वाइन किया गाजियाबाद के एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजकरण नेयर ने बताया- अस्मिता डे ने 28 जुलाई 2023 को गाजियाबाद में कॉन्स्टेबल के पद पर ज्वाइन किया। उन्हें पुलिस लाइन में पोस्टिंग मिली। इस दौरान अस्मिता की ट्रेनिंग भोपाल में चलती रही।

उन्होंने बताया- नेशनल में गोल्ड जीतने के बाद अस्मिता को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया और 23 मार्च 2026 को दरोगा बन गईं।

शुरुआत में पिछड़ीं, फिर शानदार वापसी की

फाइनल मुकाबले की शुरुआत अस्मिता डे के लिए आसान नहीं रही। कनाडा की हेडी क्वाच ने पहले ही युको अंक हासिल कर बढ़त बना ली। अस्मिता को एक शिदो पेनल्टी भी मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।

निर्धारित समय तक कोई भी खिलाड़ी निर्णायक अंक नहीं बना सका, इसलिए मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंच गया। यहां अस्मिता ने सही मौके पर शानदार दांव लगाया और दूसरा युको अंक हासिल कर मैच के साथ-साथ गोल्ड मेडल भी जीत लिया।

800 मीटर दौड़ छोड़ जूडो चुना

त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता डे पहले 800 मीटर दौड़ की एथलीट थीं। जिला स्तरीय ट्रायल के दौरान उनकी रुचि जूडो में बढ़ी। इसके बाद उन्होंने एथलेटिक्स छोड़कर जूडो को अपना खेल बना लिया। अस्मिता ने भोपाल के भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) रीजनल सेंटर में कोच यशपाल सोलंकी की देखरेख में प्रशिक्षण लिया। फिलहाल वह केंद्र सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के डेवलपमेंट ग्रुप का हिस्सा हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

‘पिता के जाने के बाद लगा कि सब खत्म हो गया’

अस्मिता ने कहा- पिता के जाने के बाद मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है। लेकिन दो महीने बाद एशियन गेम्स के ट्रायल्स हुए, जिसमें मैं नेशनल स्तर पर पहले स्थान पर रही। यह पदक मेरे लिए, मेरे राज्य और मेरे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मैं इसे अपने कोच और अपने पिता को समर्पित करती हूं। मैं इस गोल्ड मेडल से बहुत खुश हूं। यह उन सभी लोगों के लिए है, जिन्होंने मेरा साथ दिया।

‘वजन बनाए रखने के लिए रहना पड़ा भूखा’

अस्मिता ने खिताबी मुकाबले से पहले रैंडम वेट-इन (वजन जांच) के संघर्ष को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह भूखा रहना पड़ा था। मैं ज्यादा कुछ नहीं खा सकती थी क्योंकि रैंडम वेट-इन में आपका वजन 50 किलो से कम होना चाहिए।

जब मैं सुबह उठी, तो मेरा वजन 50 किलो 300 ग्राम था, इसलिए मैंने कुछ नहीं खाया। जब मेरा नाम रैंडम वेट-इन के लिए आया, तब जाकर मैंने औपचारिकता पूरी होने के बाद खाया-पिया और उसके एक घंटे बाद ही मेरी फाइट थी।

डीजीपी बोले- अस्मिता ने बढ़ाया यूपी पुलिस और देश का गौरव

यूपी के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने अस्मिता डे को बधाई दी। कहा- उन्होंने यूपी पुलिस, प्रदेश और पूरे देश का नाम रोशन किया है। यह उनकी सफलता अनुशासन, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का बेहतरीन उदाहरण है। यह उपलब्धि सीएम योगी की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने की नीति का भी परिणाम है। खेल कोटे के जरिए खिलाड़ियों को यूपी पुलिस में नौकरी देने से उन्हें खेल और सेवा, दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका मिला है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत 8वें स्थान पर पहुंचा

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। अब तक भारतीय खिलाड़ी 18 पदक जीत चुके हैं, जिनमें 4 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में नौवें स्थान पर पहुंच गया है।

कॉमनवेल्थ गेम्स की मेडल टैली में भारत 8वें स्थान पर पहुंच गया है। अब तक टीम ने 5 गोल्ड, 10 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज समेत कुल 19 मेडल जीत चुका है।

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