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वाराणसी में ताे गुरुकुल के द्वार पर ही चल रहा नशे का कारोबार, सारे नियम कायदे यहां पर दरकिनार - drug trafficking is going on at the entrance of tae gurukul in varanasi all the rules here darkinar

वाराणसी में ताे गुरुकुल के द्वार पर ही चल रहा नशे का कारोबार, सारे नियम कायदे यहां पर दरकिनार वाराणसी में कोटपा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए मंदिरों और शैक्षणिक संस्थानों के पास शराब व तंबाकू की दुकानें चल रही हैं। प्रशास…

Jagran के अनुसार5 अगस्त 2026 को 06:18 am बजे
वाराणसी में ताे गुरुकुल के द्वार पर ही चल रहा नशे का कारोबार, सारे नियम कायदे यहां पर दरकिनार
 - drug trafficking is going on at the entrance of tae gurukul in varanasi all the rules here darkinar

सौजन्य से:- Jagran

वाराणसी में ताे गुरुकुल के द्वार पर ही चल रहा नशे का कारोबार, सारे नियम कायदे यहां पर दरकिनार

वाराणसी में कोटपा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए मंदिरों और शैक्षणिक संस्थानों के पास शराब व तंबाकू की दुकानें चल रही हैं। प्रशासन और पुलिस की अनदेखी से ...और पढ़ें

HighLights

- वाराणसी में कोटपा अधिनियम का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

- स्कूलों, कॉलेजों और मंदिरों के पास शराब-तंबाकू की दुकानें।

- प्रशासन और पुलिस की अनदेखी से नियम लागू नहीं।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। शासन द्वारा बनाए गए नियम अक्सर पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर लागू नहीं होते। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए कई नियम और अभियान चलाए गए हैं, लेकिन वाराणसी में कोटपा अधिनियम का मजाक उड़ाया जा रहा है। मंदिरों के पास ही नहीं, बल्कि बेटियों के शिक्षालय के सामने भी देसी शराब की दुकानें खुली हुई हैं।

भेलूपुर के एंग्लो बंगाली कॉलेज के सामने अंग्रेजी शराब की दुकान भी सक्रिय है। स्कूल और कॉलेजों के आसपास गुटखा और पान मसाला की दुकानें आम हो गई हैं। प्रशासनिक अधिकारी शायद इन स्थितियों को देख नहीं पा रहे हैं, और पुलिस भी अनजान बनी हुई है।

महावीर मंदिर के निकट कस्तूरबा गांधी बालिका इंटर कॉलेज है, जहां स्कूल के निर्धारित मानक के भीतर ही देसी शराब की दुकान है। यहां से शराब लेकर पीने वाले कभी-कभी मुख्य गेट तक पहुंच जाते हैं। महावीर मंदिर आस्था का केंद्र है, और इसके तालाब के कोने पर यह दुकान स्थित है। विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी के लोग भी इस स्थिति से परेशान हैं।

आबकारी विभाग ने यहां का लाइसेंस कैसे जारी किया, यह एक बड़ा सवाल है। भेलूपुर के एंग्लो बंगाली कॉलेज के निकट भी अंग्रेजी शराब की दुकान है, जहां बच्चे स्कूल जाते हैं और नशीले पदार्थों की दुकानें उनके भविष्य के लिए खतरा बन रही हैं। हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज के गेट के निकट गुटखा और पान की दुकानें हैं।

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भोजूबीर के यूपी कॉलेज गेट के निकट सिगरेट और पान की दुकानें हैं, जबकि विद्यापीठ के प्रशासनिक और मुख्य भवन के बीच में भी नशीले पदार्थों की दुकानें संचालित हैं। महमूरगंज के कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय से महज 50 से 60 मीटर की दूरी पर गुटखा और पान की दुकानें हैं।

तुलसीपुर के पाणिनी कन्या महाविद्यालय के गेट के पास भी गुटखा की दुकानें हैं। तुलसीपुर के निवेदिता शिक्षा सदन के सामने भी नशीले पदार्थों की दुकानें सक्रिय हैं। संकुलधारा क्षेत्र के प्राइमरी स्कूल के निकट भी यही स्थिति है।

केंद्रीय कोटपा अधिनियम क्या है? यह अधिनियम सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक, तंबाकू विज्ञापनों पर प्रतिबंध और नाबालिगों को तंबाकू बिक्री निषेध के नियम तय करता है। यह देशभर में लागू है और होटल, रेस्तरां, दफ्तर और पार्क में धूम्रपान को प्रतिबंधित करता है। शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है। उल्लंघन पर 200 से लेकर 10,000 तक का जुर्माना या जेल की सजा का प्रावधान है।

स्कूल-कॉलेज के निकट पान और गुटखा की दुकानों को हटाने की कार्रवाई कोटपा अधिनियम के तहत पुलिस या खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा की जाती है। शराब की दुकान के स्कूल के निकट होने की स्थिति की जांच की जाएगी। नगर निगम की सीमा में 50 मीटर के बाद दुकान खुल सकती है। यदि इस परिधि में दुकान है, तो अगली कार्रवाई की जाएगी।

कमल किशोर शुक्ल, जिला आबकारी अधिकारी।

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