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CM योगी ने बताया रामायण और महाभारत का UP हैंडलूम से कनेक्शन, 1000 वर्षों पुरानी है विरासत, जानिए इसके बारे में

सीएम योगी ने वाराणसी के रेशम को इस विरासत का अहम हिस्सा बताया, जिसकी चर्चा भारतीय परंपरा और धार्मिक ग्रंथों में भी मिलती है। रामायण में प्रभु श्रीराम के विवाह के समय रेशमी और पीतांबर वस्त्रों का उल्लेख मिलता है, तो माता…

Navbharat Times के अनुसार10 सितंबर 2026 को 01:04 am बजे
CM योगी ने बताया रामायण और महाभारत का UP हैंडलूम से कनेक्शन, 1000 वर्षों पुरानी है विरासत, जानिए इसके बारे में

सौजन्य से:- Navbharat Times

सीएम योगी ने वाराणसी के रेशम को इस विरासत का अहम हिस्सा बताया, जिसकी चर्चा भारतीय परंपरा और धार्मिक ग्रंथों में भी मिलती है। रामायण में प्रभु श्रीराम के विवाह के समय रेशमी और पीतांबर वस्त्रों का उल्लेख मिलता है, तो माता जानकी के वनवास वाले वस्त्रों का नाता भी यूपी से ही है। यही नहीं उन्होंने महाभारत की भी बात की। ऐसे में चलिए इसके बारे में जानते हैं।

रामायण को लेकर क्या बोले सीएम योगी?

प्रदेश के कपड़ा कारोबार के इतिहास को लेकर बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं, 'वाराणसी के रेशम की चर्चा करें, तो वैदिक साहित्य में हिरण्यवस्त्र यानी सोने के तारों से बुने हुए वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। रामायण में भी श्रीराम के विवाह के समय और अन्य राजसी प्रसंगों में भी रेशमी और पीतांबर वस्त्रों की बात कही गई है।'

वह कहते हैं, 'जब भगवान राम 14 साल के वनवास पर गए थे और चित्रकूट में लगभग 12 साल बिताने के बाद दंडकारण्य के लिए निकले, तो माता जानकी को एक ऋषि के आश्रम से दिव्य वस्त्र प्राप्त हुए थे, जैसे कि हमारे धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है।' (फोटो साभार: pexels)

महाभारत में रेशम- सूती कपड़ों का जिक्र

यही नहीं सीएम योगी कहते हैं, 'राजसूय यज्ञ में युधिष्ठिर को काशी के राजा की ओर से उपहार में दिए गए वस्त्रों का उल्लेख भी महाभारत में मिलता है, जिसमें रेशमी और सूती वस्त्र शामिल थे। भारत में बनने वाले कपड़े, खासकर उत्तर प्रदेश में बनने वाले कपड़ों की मांग न सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के बाजारों में थी। अगर आप रोमन या ग्रीक संस्कृति को देखें, तो वहां भी भारत और उत्तर प्रदेश में बने इन कपड़ों की बहुत मांग थी। इसका मतलब है कि यहां से इन उत्पादों को दूसरी जगहों पर भेजने की परंपरा उस समय भी मौजूद थी।' (फोटो साभार: pexels)

राजघरानों में पहना जाता था रेशम

प्राचीन भारत में रेशम की चमक, मजबूती और महीन बुनाई के कारण इसका इस्तेमाल राजघरानों, धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष अवसरों पर होता था। वहीं, पीतांबर यानी पीले रंग के कपड़े की बात करें, तो धार्मिक साहित्य और कला में भगवान श्रीकृष्ण और विष्णु को अक्सर पीतांबर धारण किए दिखाया जाता था। यह रंग पवित्रता, ज्ञान, समृद्धि से जुड़ा माना जाता है।

बता दें कि 2024 में रामलला के लिए बनारस में भारतीय सिल्क से पीतांबर दुपट्टा भी तैयार किया गया था, जिससे पता चलता है कि धार्मिक उपयोग के लिए आज भी चुना जाता है।

कैसे होती है पीतांबर की बुनाई

- रेशम का धागा तैयार करना- सिल्क यार्न को साफ करके बुनाई के लिए तैयार किया जाता है।

- धागों को रंगना- पीतांबर पीले रंग का होता है, इसलिए इसे बुनने से पहले रंगा जाता है।

- ताना- बाना तैयार करना- रंगे हुए रेशमी धागों को करघे पर ताने और बाने के रूप में लगाया जाता है।

- हथकरघे पर बुनाई- पारंपरिक पीतांबर हैंडलूम तरीके से बुना जाता है। पुराने पैठणी पीतांबर में सिल्क के साख दरी का भी इस्तेमाल होता था।

- किनारे की डिजाइन- पारंपरिक पीतांबर के बॉर्डर पर ज्यादा चौड़ा डिजाइन नहीं होता। कुछ पीतांबर में किनारे पर सुनहरे रंग की जरी या हल्की सजावट की जाती है।

राज्य में कहां पर क्या बनता है?

- वाराणसी- बनारसी सिल्क, ब्रोकेड, जरी

- लखनऊ- चिकनकारी, जरी- दरदोजी

- भदोही- हाथ से बुने कार्पेट

- मिर्जापुर- कार्पेट/दरी की पारंपरिक बुनाई

- आजमगढ़- ब्लैक पॉटरी के साथ टेक्सटाइल

- बाराबंकी- सूती कपड़े की बुनाई, हैंडलूम

- गोरखपुर- टेराकोटा के साथ स्थानीय क्राफ्ट क्लस्टर

- कानपुर- टेक्सटाइल/ लेदन बेस्ड इंडस्ट्रीयल प्रोडेक्शन

- आगरा- फुटवियर

- सीतापुर- टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग

- मेरठ- स्पोर्ट्स गुड्स के साथ-साथ टेक्निकल टेक्सटाइल

(फोटो साभार: pexels)

खासियत भी जान लीजिए

- हाथ से बुना कपड़ा: पारंपरिक हैंडलूम में कपड़े को मशीन नहीं, बल्कि करघे पर बुनकर तैयार किया जाता है।

- पारंपरिक तकनीक: कई डिजाइन्स और वीविंग टेक्निक पीढ़ियों से बुनकर समुदायों के बीच आगे बढ़ती आई हैं।

- लोकल क्राफ्ट्समैनशिप: अलग- अलग क्षेत्रों की अपना बुनाई का तरीका, मोटिफ्स और टेक्सटाइल ट्रेडिशन हैं।

- बारीक डिटेलिंग: खासकर बनारसी टेक्सटाइल में इंट्रीकेट मोटिफ्स, ब्रोकेड और जरी वर्क की खूबसूरती दिखती है।

- कारीगरों की विरासत: हैंडलूम सिर्फ टेक्सटाइल नहीं, बल्कि बुनकरों के हुनर और पीढ़ियों से चली आ रही क्राफ्ट्समैन शिफ का हिस्सा है।

(फोटो साभार: pexels)

यूपी है देश का तीसरा सबसे बड़ा कपड़ा उत्पादक

हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग निदेशालय उत्तर प्रदेश सरकार पर मौजूद जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगभग 1.99 लाख हथकरघा बुनकर हैं और यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा कपड़ा उत्पादक राज्य है।

- बुनकरों की संख्या: राज्य में लगभग 1.99 लाख हथकरघा बुनकर और 5 लाख पावरलूम बुनकर हैं।

- उत्पादन में हिस्सेदारी: भारत के कुल कपड़ा उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 13% है।

- रोजगार: राज्य में कपड़ा और परिधान उद्योग लगभग 15 लाख लोगों को रोजगार देता है।

(फोटो साभार: pexels)

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