होमशिक्षा-करियरCJP आंदोलन दिल्ली में हुआ, यूपी की राजनीति में बहुत कुछ बदल रहा, अब BSP भी युवाओं पर डोरे डालने की तैयारी में जुटी
शिक्षा-करियर

CJP आंदोलन दिल्ली में हुआ, यूपी की राजनीति में बहुत कुछ बदल रहा, अब BSP भी युवाओं पर डोरे डालने की तैयारी में जुटी

दिल्ली में सीजेपी के नेतृत्व में हुए छात्रों के आंदोलन में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी ने सक्रिय भागीदारी निभाकर युवाओं में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की। अब मायावती की बहुजन समाज पा…

Navbharat Times के अनुसार31 जुलाई 2026 को 01:18 pm बजे
CJP आंदोलन दिल्ली में हुआ, यूपी की राजनीति में बहुत कुछ बदल रहा, अब BSP भी युवाओं पर डोरे डालने की तैयारी में जुटी

सौजन्य से:- Navbharat Times

दिल्ली में सीजेपी के नेतृत्व में हुए छात्रों के आंदोलन में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी ने सक्रिय भागीदारी निभाकर युवाओं में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की। अब मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी युवाओं को पार्टी से जोड़ने की कवायद में जुट गई है।

हाइलाइट्स

यूपी में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होने की संभावना

बीएसपी प्रमुख मायावती ने प्रचार की जिम्मेदारी आकाश आनंद को सौंपी

युवा वोटरों में बीएसपी को मजबूत बनाएंगे पार्टी के युवा नेता आकाश आनंद

लखनऊ: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में किए गए छात्रों के आंदोलन ने राजनीतिक दलों को नई दिशा में सोचने में मजबूर कर दिया है। इस आंदोलन में जहां कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बढ़-चढ़कर भाग लिया वहीं आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी इसमें सक्रिय भागीदार रहे। यह युवा और छात्रों का आंदोलन था और देश में इस वर्ग के मतदाता सबसे ज्यादा हैं। जब विपक्ष के करीब सभी प्रमुख दल युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए होड़ लगा रहे हैं तो बहुजन समाज पार्टी इसमें पीछे कैसे रह सकती है। बीएसपी प्रमुख मायावती की भी नजर अब जेन-जेड (GEN-Z), यानी युवा वर्ग पर है। यही कारण है कि उन्होंने अब पार्टी के युवा राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद के कंधों पर अहम जिम्मेदारी डाल दी है।

बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पार्टी प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद इन दिनों पार्टी की सोशल मीडिया टीम को मजबूत करने में जुटे हैं। वे उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। आकाश आनंद सोशल मीडिया के जरिए यूपी में बीएसपी की सरकार के दौर में हासिल की गईं उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने वाले हैं।

मायावती ने आकाश आनंद को दी अहम जिम्मेदारी

बताया जाता है कि आकाश आनंद को यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार के साथ युवाओं में पार्टी की जनाधार बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। वे विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। पार्टी के प्रचार अभियान को गति देने के लिए वे जल्द ही दिल्ली में सोशल मीडिया की कोर टीम के साथ मंथन करने वाले हैं। बीएसपी के प्रचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद भी लेने की तैयारी की जा रही है। ऐसा इसलिए है, ताकि युवा वर्ग को बीएसपी के विचारों और यूपी में मायावती की सत्ता के दौर की उपलब्धियों को आसानी से समझाया जा सके।

सीजेपी आंदोलन का सपा, एएसपी ने उठाया फायदा

दिल्ली में सीजेपी के आंदोलन में युवाओं की अपूर्व भागीदारी ने राजनीतिक पार्टियों का ध्यान आकर्षित किया है। इसमें कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी ने भी सक्रिय भागीदारी की और इससे राजनीतिक लाभ लेने की भरपूर कोशिश की। अखिलेश यादव की सपा और चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (एएसपी) ऐसे दो दल हैं जो यूपी के विधानसभा चुनाव में मायावती की बीएसएपी के प्रतिद्वंद्वी हैं। इन दलों का वोट बैंक एक ही है। सपा जहां पीडीपी (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) का राग आलाप रही है, वहीं चंद्रशेखर आजाद दलितों को केंद्र में रखकर ही राजनीति करते रहे हैं। बीएसपी का मूल जनाधार हमेशा से दलित वर्ग रहा है।

जेन-जेड के पास चुनावों को प्रभावित करने की ताकत

सीजेपी के आंदोलन में कोई जातीय समूह नहीं था, बल्कि आयु समूह था। वह आयु समूह जिसमें बड़ा वर्ग जेन- जेड (GEN-Z) का था। जेन- जेड सन 1997 से 2012 के बीच जन्मी वह पीढ़ी है जिसमें शामिल किशोर और युवाओं की उम्र 14 से 29 साल की है। यह उन लोगों की पीढ़ी है जो या तो शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं या फिर नौकरियां, व्यवसाय कर रहे हैं। यह पीढ़ी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

खास बात यह भी है कि राजनीतिक पार्टियों की जिस जेन-जेड पर नजर है वह किसी जाति तक सीमित नहीं है। यह बात अलग है कि चंद्रशेखर आजाद की नजर दलित जेन-जेड पर ही है। वे दलित युवाओं को एएसपी के प्रभाव क्षेत्र में लाने की कवायद कर रहे हैं।

बहुजन समाज पार्टी के सामने बड़ी चुनौतियां

दिल्ली के आंदोलन में युवाओं के बीच पैठ बनाने की सबसे कामयाब कोशिश अखिलेश यादव ने की। चंद्रशेखर आजाद भी आंदोलन को समर्थन देने के बाद संसद परिसर में धरना देकर चर्चा में आए। बहुजन समाज पार्टी, जिसे यूपी में सपा से तो दो-दो हाथ करना ही है, चुनाव में आजाद की एएसपी भी उसके सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। दिल्ली आंदोलन के जरिए युवाओं के बीच पहुंचने में पिछड़ी बीएसपी को अब शायद अपनी गलती का अहसास हो गया है।

समय बदला, राजनीति की शैली भी बदली

मायावती 1995 में पहली बार सत्ता में आई थीं। वे चार बार मुख्यमंत्री रहीं और उनका अंतिम कार्यकाल 2012 में खत्म हुआ था। यानी मायावती 12 साल से सत्ता से दूर हैं और इस बीच समय काफी बदल गया, पीढ़ियां भी बदल गईं। अब शायद वे यह समझ गई हैं कि समय के साथ राजनीति के तौर-तरीके भी बदल गए हैं। सिर्फ जातियों की सियासत के जरिए चुनावी वैतरणी पार नहीं की जा सकती है। यही कारण है कि उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए अपने भतीजे आकाश आनंद को आगे कर दिया है।

लोकसभा चुनाव में मायावती ने आकाश को किया था परे

यह वही आकाश आनंद हैं जिनसे दो साल पहले ही साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मायावती ने दूरी बना ली थी। तब आकाश आनंद युवाओं के बीच काफी चर्चित हो गए थे। वे आक्रामक शैली में भाषण देते थे जिससे बीएसपी से जु़ड़े युवाओं में वे लोकप्रिय हो रहे थे। सोशल मीडिया पर भी उनका अच्छा प्रभाव देखने को मिला था। हालांकि बीच चुनाव में ही मायावती ने उन पर बंदिशें लगा दी थीं। उनको पार्टी के तमाम पदों से भी हटा दिया गया था।

युवाओं में लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश

अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेता युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं तब मायावती ने प्रचार की कमान आकाश आनंद को सौंप दी है। आकाश अपनी टीम को मजबूत करने की कवायद में जुट गए हैं। वे युवाओं तक पार्टी की पहुंच कायम करने की कोशिश कर रहे हैं। बीएसपी युवाओं को संदेश देना चाहती है कि उसे उनके भविष्य की चिंता है और अन्य दलों की तरह वह उन्हें भड़काकर उन्हें कानूनी पचड़े में नहीं फंसाना चाहती है। बीएसपी आजाद समाज पार्टी पर युवाओं को दिशाहीन बनाने का आरोप भी लगाती है। आकाश आनंद 10 अगस्त से अपनी चुनावी मुहिम शुरू करने वाले हैं।

लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।

सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।

सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।

पत्रकारिता अनुभव

सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।

सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।

सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।

अवॉर्ड/अचीवमेंट्स

बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें

कन्वर्सेशन शुरू करें

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

Powered by CM Sarkar Geeta Reporter

संबंधित ख़बरें