दादा के जन्मदिन पर जयंत चौधरी का खास प्रोग्राम, वेस्ट यूपी में मोदी-नितिन संग असली चुनावी बिगुल बजाएंगे
जयंत चौधरी अपने दादा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर हापुड़ में महारैली करेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन कार्यक्रम में शामिल होंगे। शादाब रिज़वी, मेरठ: यूपी में 2027 में होने वाले विधा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
जयंत चौधरी अपने दादा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर हापुड़ में महारैली करेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
शादाब रिज़वी, मेरठ: यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावी सियासी गर्मी को अभी से महसूस की जाने लगी है, लेकिन राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया केंद्रीय मंत्री चौधरी जयंत सिंह वेस्ट यूपी में असली चुनावी बिगुल 23 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन संग बजाएंगे। इस दिन अपने दादा भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री और किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह की जयंती पर हापुड़ जिले की धरती पर राष्ट्रीय लोकदल की ओर से भव्य महारैली करेंगे।
रालोद के नेताओं के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा भारत रत्न चौधरी चरण सिंह का जन्म हापुड़ जिले के ही नूरपुर गांव में हुआ था, इसलिए हापुड़ रालोद के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। चौधरी चरण सिंह की जयंती (23 दिसंबर) को किसान दिवस मनाया जाता है। रालोद हर साल पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित हापुड़ में बड़े स्तर पर कार्यक्रमों, किसान गोष्ठियों और रैलियों का आयोजन करती है।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए रालोद आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों में जनसभाओं के जरिए अपना चुनावी शंखनाद कर रही है। रालोद के प्रदेश पदाधिकारी की माने को 23 को हापुड़ में होने वाली इस महारैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी रहेगी। दरअसल, सियासी जानकारों की नजर में चौधरी चरण सिंह की जयंती पर होने वाला यह आयोजन किसान सम्मान के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से भी खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक विचारक डॉक्टर रविंद्र राणा के मुताबिक, चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति का आपस में गहरा संबंध रहा है। ऐसे में उनकी जयंती पर हापुड़ में प्रस्तावित महारैली को रालोद और भाजपा के बीच राजनीतिक तालमेल के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। हापुड़ में होने वाली इस बड़ी सभा के जरिए गठबंधन की एकजुटता और किसान वर्ग के बीच राजनीतिक संदेश को मजबूती देने की कोशिश दिखाई दे रही है। महारैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित मौजूदगी इसे राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक मंच बना सकती है। रालोद की किसान राजनीति और भाजपा के व्यापक राजनीतिक आधार के बीच यह आयोजन दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण संदेश देने का अवसर होगा।
रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर एमबी जैदी का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान राजनीति का प्रभाव लंबे समय से चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता रहा है। ऐसे में चौधरी चरण सिंह की जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी का हापुड़ पहुंचना किसान वर्ग के साथ संवाद और गठबंधन की राजनीतिक जमीन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
विरासत का केंद्र भी मजबूत वजह
राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं की माने तो महारैली का उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं है, बल्कि चौधरी चरण सिंह के विचारों, सिद्धांतों और किसान हितों के प्रति उनके समर्पण को नमन करना भी है। चौधरी चरण सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में किसानों और ग्रामीण भारत से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनकी जयंती 23 दिसंबर को देशभर में किसान दिवस के रूप में मनाई जाती है।
किसान, नौजवान, कामगार की एकजुटका की कोशिश
पार्टी महारैली में किसानों, मजदूरों, नौजवानों और सर्व समाज के लोगों की बड़ी भागीदारी चाहती है। पार्टी का मानना है कि हापुड़ की धरती से सामाजिक एकजुटता और किसान सम्मान का संदेश पूरे देश तक पहुंचाया जाएगा।
जयंत की सियासत के लिए भी खास
राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के ले भी दादा चौधरी चरण सिंह की जयंती पर होने वाली यह महारैली रालोद के संगठनात्मक विस्तार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी।
लेखक के बारे मेंशादाब रिजवीशादाब रिज़वी 2015 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स से जुड़े हैं। वेस्ट यूपी की खबरों पर नजर रखते हैं। समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं। 34 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों को कवर किया है। ग्राउंड रिपोर्टिंग में ज्यादा वक्त बीता। कुछ समय के लिए डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी भी निभाई।
पत्रकारिता अनुभव
शादाब रिज़वी ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से 1992 में की थी। 1993 में अमर उजाला से जुड़ गए और पॉटरी नगरी खुर्जा के प्रभारी का दायित्व सभांला। 1996 में अमर उजाला हापुड़ प्रभारी का दायित्व मिला। 1998 में मेरठ महानगर में बतौर क्राइम रिपोर्टर जिम्मेदारी संभाली। 2005 में मेरठ से गुड़गाव (हरियाणा) में अमर उजाला ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी मिली।
2007 में वापस मेरठ अमर उजाला आने के बाद 2007 में गोरखपुर अमर उजाला यूनिट में विधानसभा चुनाव कवरेज के लिए कुछ समय के लिए दायित्व निभाया। उसके बाद 2012 तक मेरठ में रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी निभाई। 2012 में मुरादाबाद अमर उजाला में प्रादेशिक इंचार्ज के तौर पर काम किया। 2013 में बुलंदशहर प्रभारी के तौर पर जिम्मा दिया गया।
2015 में अमर उजाला में ही नेशनल ब्यूरो में दिल्ली में नियुक्ति हुई। दिल्ली में चुनाव आयोग,राष्ट्रपति भवन, कांग्रेस, बसपा, यूपी से जुड़े सियासी समाचार पर लेखनी चलाई। करीब सात महीने काम करने के बाद नवभारत टाइम्स दिल्ली का रुख बतौर एसिस्टेंड एडिटर किया। नवभारत टाइम्स में वेस्ट यूपी की खबरों को लिखने का जिम्मा मिला। यह सिलसिला फिलहाल भी नवभारत टाइम्स में जारी हैं।... और पढ़ें
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