चंद्रशेखर आजाद की सपा के वोट बैंक पर नजर; यूपी चुनाव को लेकर किया बड़ा खेल, बढ़ेगी अखिलेश की टेंशन
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, आजाद समाज पार्टी के 45 घोषित उम्मीदवारों में 18 अनुसूचित जाति (एससी), 16 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), 10 मुस्लिम और एक सिख समुदाय से हैं। पार्टी ने लखनऊ छावनी, गोविंद नगर, विश्वनाथगंज सहित पा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, आजाद समाज पार्टी के 45 घोषित उम्मीदवारों में 18 अनुसूचित जाति (एससी), 16 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), 10 मुस्लिम और एक सिख समुदाय से हैं। पार्टी ने लखनऊ छावनी, गोविंद नगर, विश्वनाथगंज सहित पांच सामान्य सीटों पर भी अनुसूचित जाति के उम्मीदवार उतारे हैं।
क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि उम्मीदवारों के सामाजिक समीकरण से स्पष्ट है कि आजाद समाज पार्टी ने सपा और कांग्रेस के सामने नई चुनौती पेश करने की रणनीति बनाई है। उनके अनुसार, बसपा के जनाधार में आई गिरावट के बाद आजाद समाज पार्टी अब तक खुद को उसके विकल्प के रूप में पेश कर रही थी।वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि 45 उम्मीदवारों की सूची बताती है कि अब वह बसपा के साथ-साथ सपा और कांग्रेस को भी चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है। 16 ओबीसी, 18 दलित, 10 मुस्लिम और एक सिख उम्मीदवार उतारकर पार्टी ने अपने चुनावी लक्ष्य का स्पष्ट संकेत दिया है।
पीडीए फॉर्मूले के तहत कैंडिडेट
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रतन मणि लाल का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद ने इस बार अपनी चुनावी रणनीति बदलते हुए सीधे समाजवादी पार्टी के राजनीतिक आधार को चुनौती देने की कोशिश की है। शुरुआती दौर में चंद्रशेखर की राजनीति का केंद्र बसपा थी, लेकिन अब उन्होंने खुद को समाजवादी पार्टी के विकल्प के रूप में स्थापित करने की रणनीति अपनाई है।रतन मणि लाल कहते हैं कि जिन सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए हैं, वहां के सामाजिक समीकरण समाजवादी पार्टी के पीडीए फार्मूले से मेल खाते हैं। दलित, पिछड़े और मुस्लिम समुदाय पर फोकस बताता है कि चंद्रशेखर अब बसपा से ज्यादा सपा के वोट बैंक में राजनीतिक हस्तक्षेप करना चाहते हैं।
पैदा की राजनीतिक असहजता
हालांकि, रतन मणि लाल का कहना है कि फिलहाल आजाद समाज पार्टी का संगठन और चुनावी ढांचा इतना मजबूत नहीं है कि वह बड़े पैमाने पर सपा को चुनावी नुकसान पहुंचा सके। इसके बावजूद चंद्रशेखर ने सपा के भीतर राजनीतिक असहजता जरूर पैदा कर दी है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सुनील चितौड़ ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी स्वतंत्र राजनीतिक विचारधारा के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है और किसी दल की 'बी-टीम' नहीं है।सुनील चितौड़ ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना है और उम्मीदवारों की अगली सूची 10 से 12 दिनों के भीतर जारी की जाएगी। सुनील चितौड़ ने कहा कि राजनीति में गठबंधन की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। यदि भविष्य में किसी दल की ओर से बातचीत होती है तो इस पर अंतिम निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद करेंगे।
टिकट बांटने का बताया आधार
सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिए जाने के सवाल पर सुनील चितौड़ ने कहा कि पार्टी टिकट जाति नहीं, बल्कि विचारधारा और संगठन से जुड़ाव के आधार पर देती है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि सपा की लड़ाई पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों के अधिकारों की है। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ मुद्दे उठाने वाली हर राजनीतिक ताकत विपक्ष के संघर्ष को मजबूत करती है।चंद्रशेखर आजाद को लेकर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी उन्हें अपना राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं मानती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजाद समाज पार्टी के साथ फिलहाल गठबंधन को लेकर कोई बातचीत या पहल नहीं हुई है।
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