यूपी चुनाव से पहले BKU संग नया आंदोलन छेड़ने के मूड में CJP? आशुतोष और राकेश टिकैत की मुलाकात के मायने समझिए
साझा मोर्चा बनाने की रणनीति पर चर्चा टिकैत से मुलाकात करने वालों में सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका और पार्टी के कई अन्य नेता शामिल थे। इस मुलाकात में सीजेपी नेताओं और टिकैत के बीच साझा मोर्चा बनाने और आगे की…

सौजन्य से:- Navbharat Times
साझा मोर्चा बनाने की रणनीति पर चर्चा
टिकैत से मुलाकात करने वालों में सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका और पार्टी के कई अन्य नेता शामिल थे। इस मुलाकात में सीजेपी नेताओं और टिकैत के बीच साझा मोर्चा बनाने और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। आशुतोष रांका ने कहा कि किसान और देश के छात्र और युवा मिलकर मोदी सरकार को घेरने का काम करेंगे। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब छात्र आंदोलन समाप्त होने के बाद सीजेपी ने अपनी मुहिम को सामाजिक मुद्दों से जोड़ने के संकेत दिए हैं।छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग
बताया जाता है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधिमंडल ने राकेश टिकैत से मुलाकात में उनसे विभिन्न राज्यों में छात्रों के खिलाफ दर्ज की गईं एफआईआर को वापस लेने की मांग के लिए समर्थन मांगा। राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलनकारियों को एकजुट होना चाहिए। टिकैत ने कहा कि वे भी जंतर-मंतर पर सीजेपी के धरने में गए थे और उसे समर्थन दिया था। संयुक्त मोर्चा पहले से ही है और इसमें सब साथ हैं।मोदी सरकार के खिलाफ गठबंधन बनाने पर विचार
सीजेपी के नेताओं की टिकैत के साथ बैठक के बाद आशुतोष रांका ने कहा कि वे मोदी सरकार के खिलाफ एक बड़ा गठबंधन बनाने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीजेपी चाहती है कि किसान भी छात्रों और युवाओं के साथ एकजुट हो जाएं। कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने अपने कुछ वादे पूरे नहीं किए हैं। आंदोलन में सहभागी रहे विभिन्न राज्यों के छात्रों के खिलाफ उनके राज्यों में कार्रवाई की जा रही है। बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में छात्रों पर केस दर्ज किए गए हैं।टिकैत ने कहा- एकजुट हों आंदोलनकारी
राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में सीजेपी के कुछ प्रतिनिधि भी पहुंचे थे। उन्होंने आंदोलन को समर्थन देने के लिए किसान मोर्चा का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को एकजुट होना चाहिए। किसानों, युवाओं और छात्रों के संयुक्त मोर्चा के सीजेपी के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि मोर्चा तो पहले से बना ही हुआ है। किसानों और छात्रों के अपने-अपने मोर्चे है। ये सब साथ हैं।सक्रियता बनाए रखना चाहती है सीजेपी
दिल्ली में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन के साथ देश में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का नाम तेजी से उभरा है। सीजेपी शायद अब अपनी सक्रियता बनाए रखना चाहती है। यही कारण है कि उसने पार्टी को बड़े सामाजिक मुद्दों से जोड़ने के संकेत दिए हैं। सीजेपी का कहना है कि वह अब शिक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ किसानों और युवाओं से जुड़े मामलों को भी साझा मंच पर उठाएगी। सीजेपी नेताओं की राकेश टिकैत से मुलाकात के बाद संभावना जताई जा रही है कि बीकेयू और सीजेपी मिलकर निकट भविष्य में कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन कर सकती हैं।अभिजीत दिपके की सरकार को चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि यदि छात्रों का उत्पीड़न नहीं रुका और उनके खिलाफ दर्ज किए गए केस वापस नहीं लिए गए तो पार्टी जल्द ही फिर से आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि, 20 जुलाई को छात्रों पर पुलिस ने की लाठियां बरसाई थीं। अब यदि सरकार नहीं चेतती है और छात्रों का उत्पीड़न करती है, तो सीजेपी जल्द ही फिर से सड़कों पर उतरेगी और आंदोलन करेगी।बीकेयू की राष्ट्रीय किसान महापंचायत
एक तरफ जहां सीजेपी सरकार के खिलाफ नया आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दे रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन राष्ट्रीय किसान महापंचायत आयोजित करने की तैयारी कर रही है। प्रयागराज के शंकरगढ़ में बुधवार को बीकेयू की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के लिए 8 अगस्त को होने वाली राष्ट्रीय किसान महापंचायत की तैयारियों पर चर्चा की गई।बीकेयू का उत्तर प्रदेश में खासा प्रभाव
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) का पश्चिमी यूपी में खासा प्रभाव है। बुंदेलखंड में भी इस संगठन का प्रभाव बढ़ गया है। अवध, गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी सहित पूर्वोत्तर के विभिन्न इलाकों में भी किसान बड़ी संख्या में बीकेयू से जुड़े हैं। कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली में हुए आंदोलन से काफी चर्चा में आई है। आंदोलन की सफलता के साथ उसकी पहचान में वृद्धि हुई है। यह दोनों संगठन यदि एकजुट होते हैं तो वे केंद्र के साथ उत्तर प्रदेश सरकार के लिए भी परेशानी का कारण बन सकते हैं।बीकेयू गैर राजनीतिक संगठन है और सीजेपी ने भी अब तक खुद को राजनीतिक संगठन नहीं बताया है। लेकिन आने वाले समय में जब यूपी में विधानसभा चुनाव होगा तब इन संगठनों के आंदोलन का विपक्ष के दल फायदा लेने की कोशिश कर सकते हैं। इसके साथ यह भी संभव है कि सीजेपी स्वयं एक राजनीतिक दल बनकर मैदान में उतर जाए।
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