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यूपी रेरा के आदेश मानने में देरी और अब कम रकम का चेक, हाई कोर्ट ने आवास आयुक्त को किया तलब - allahabad hc summons housing commissioner over up rera order

यूपी रेरा के आदेश मानने में देरी और अब कम रकम का चेक, हाई कोर्ट ने आवास आयुक्त को किया तलब यूपी रेरा के आदेश के अनुपालन में देरी और रिकवरी सर्टिफिकेट से कम रकम का चेक देने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रद…

Jagran के अनुसार24 अगस्त 2026 को 09:55 pm बजे
यूपी रेरा के आदेश मानने में देरी और अब कम रकम का चेक, हाई कोर्ट ने आवास आयुक्त को किया तलब
 - allahabad hc summons housing commissioner over up rera order

सौजन्य से:- Jagran

यूपी रेरा के आदेश मानने में देरी और अब कम रकम का चेक, हाई कोर्ट ने आवास आयुक्त को किया तलब

यूपी रेरा के आदेश के अनुपालन में देरी और रिकवरी सर्टिफिकेट से कम रकम का चेक देने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को कड़ी फटकार लगाई है।

HighLights

- यूपी रेरा आदेश अनुपालन में देरी पर हाई कोर्ट की फटकार।

- रिकवरी सर्टिफिकेट से कम रकम का चेक देने पर नाराजगी।

- आवास आयुक्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का आदेश।

विधि संवाददाता, लखनऊ। यूपी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (यूपी रेरा) के आदेश के अनुपालन में पहले देरी और अब रिकवरी सर्टिफिकेट की निर्धारित रकम से करीब 2.87 लाख रुपये कम का चेक देने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को कड़ी फटकार लगाई है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी यूपी रेरा और हाई कोर्ट की कार्यवाही को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पीठ ने आवास आयुक्त को मंगलवार सुबह 10:15 बजे वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होकर जवाब देने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ला की पीठ अशोक कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यूपी रेरा ने 29 जुलाई 2025 को अशोक के पक्ष में आदेश दिया था।

इसके अनुपालन में 27 मई 2026 को 26,58,806.01 रुपये का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया। वसूली में प्रभावी कार्रवाई न होने पर अशोक ने हाई कोर्ट का रुख किया।

गत सात अगस्त को कोर्ट ने परिषद को दस दिन के भीतर देय राशि जमा करने का आदेश दिया था। सोमवार को परिषद ने हलफनामा दाखिल कर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार, लखनऊ खंडपीठ के नाम 23,71,126 रुपये का चेक तैयार करने की जानकारी दी।

कोर्ट ने सवाल किया कि जब रिकवरी सर्टिफिकेट में 26.58 लाख रुपये से अधिक की रकम निर्धारित है तो 23.71 लाख रुपये का ही चेक क्यों दिया गया। परिषद की ओर से विभागीय गणना का हवाला दिया गया, लेकिन कोर्ट के सामने यह स्पष्ट नहीं किया जा सका कि वैधानिक प्राधिकरण के रिकवरी सर्टिफिकेट के विपरीत अलग गणना किस आधार पर की गई। हलफनामे के साथ गणना का विवरण भी नहीं था।

कोर्ट ने कहा कि याची के आवेदन पर चेक की राशि नियमानुसार जारी की जाए। साथ ही आवास आयुक्त को मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होकर कम राशि का चेक जारी करने का कारण बताने का निर्देश दिया है।

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