9 साल पुराने फॉर्मूले पर यूपी चुनाव लड़ना चाहती है कांग्रेस, सपा संग सीटों पर फंसा पेच
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है. कांग्रेस राज्य में 2017 के गठबंधन फॉर्मूले की तर्ज पर च…

सौजन्य से:- AajTak
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है. कांग्रेस राज्य में 2017 के गठबंधन फॉर्मूले की तर्ज पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है. उस समय अखिलेश यादव ने कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें दी थीं.
दरअसल कांग्रेस इस बार भी 107 से 120 सीटों के बीच आखिरी समझौता चाहती है और अक्टूबर से पहले समाजवादी पार्टी के साथ सीटों की संख्या तय कर लेना चाहती है. हालांकि, समाजवादी पार्टी सीट बंटवारे को लेकर फिलहाल किसी जल्दबाजी में नहीं दिख रही है.
कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर अक्टूबर से पहले सीटों की संख्या और उम्मीदवारों के नाम तय नहीं हुए, तो बीजेपी से मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा. उनका मानना है कि बीजेपी ने चुनाव को जिस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, वहां लड़ाई बेहद मुश्किल हो चुकी है.
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी को लगता है कि अगर अभी से बातचीत शुरू हुई, तो कांग्रेस दूसरे सहयोगियों के साथ जाने की बात कहकर दबाव बना सकती है. इसी वजह से सपा सीटों का बंटवारा एक तय और व्यवस्थित तरीके से करना चाहती है.
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सपा का स्टैंड: शीर्ष नेताओं की बातचीत के बाद बनेगी कमेटी
अखिलेश यादव ने ये भी साफ कर दिया है कि गठबंधन सिर्फ कांग्रेस के साथ ही होगा और सपा अपने पुराने साथियों को ही साथ लेकर चलेगी. हालांकि, सीटों की संख्या को लेकर सपा में फिलहाल चुप्पी बनी हुई है.
सपा सूत्रों के मुताबिक, जब तक राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच शीर्ष स्तर पर बातचीत शुरू नहीं होगी, तब तक निचले स्तर पर कोई चर्चा मुमकिन नहीं है. दोनों नेताओं की वार्ता के बाद ही सपा अपनी सीट शेयरिंग कमेटी बनाएगी. फिर वही कमेटी कांग्रेस की टीम से बात करके आखिरी फैसला लेगी.
यह भी पढ़ें: दिनेश शर्मा बने अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल, यूपी चुनाव को लेकर बीजेपी ने दिया ये संदेश
बराबरी के दर्जे की मांग पर अड़ी कांग्रेस
वहीं, कांग्रेस ने अपनी आंतरिक बैठकों में आलाकमान को 150 से ज्यादा सीटों की लिस्ट सौंप दी है. कांग्रेस नेताओं का मानना है कि 2027 में यूपी जीतने के लिए अखिलेश यादव को पार्टी को बराबरी का दर्जा देना होगा. कांग्रेस अब दूसरे दर्जे की भूमिका में रहने को तैयार नहीं है. नेताओं का कहना है कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी की स्वीकार्यता और देश में बना माहौल ऐसा है, जिसे सपा नजरअंदाज नहीं कर सकती.
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