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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे: 4200 करोड़ की सड़क को 17 दिन में दूसरी बार पड़ी मरम्मत की जरूरत!

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को एक बार फिर से मरम्मत की जरूरत पड़ गई. 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे का दो हफ्ते पहले ही उद्घाटन हुआ था. गुरुवार को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का एक और दौ…

aajtak.in के अनुसार31 जुलाई 2026 को 08:18 am बजे
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे: 4200 करोड़ की सड़क को 17 दिन में दूसरी बार पड़ी मरम्मत की जरूरत!

सौजन्य से:- aajtak.in

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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को एक बार फिर से मरम्मत की जरूरत पड़ गई. 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे का दो हफ्ते पहले ही उद्घाटन हुआ था. गुरुवार को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का एक और दौर चला, जिसमें सड़क के खराब हिस्से को काटकर दोबारा बनाया गया. प्रभावित हिस्से पर मरम्मत का काम करने के लिए कई अधिकारी और सड़क बनाने वाली मशीनें तैनात की गईं. खराब हिस्से को हटा दिया गया और सड़क की सतह को फिर से बनाया गया ताकि उस पर गाड़ियां आसानी से चल सकें.

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आपको बता दें कि मरम्मत का काम कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर, लखनऊ से लगभग 22 किलोमीटर पहले किया गया, जहां टीमें सड़क पर काम करती दिखीं. गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का काम किया गया है. इसके उद्घाटन के बाद से ही, कुछ जगहों पर सड़क की सतह खराब होने और फिसलन की शिकायतें मिली हैं, जिसके बाद सुधार के उपाय किए गए.

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कहा कि बचाव के लिए की जाने वाली मरम्मत (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) नियमित ऑपरेशन और मेंटेनेंस (O&M) गतिविधियों का हिस्सा है.

NHAI ने बताया कि एक्सप्रेसवे 15 साल की 'डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड' (DLP) के तहत आता है, जिसके दौरान समय पर मरम्मत और सुधार का काम करने की जिम्मेदारी कॉन्ट्रैक्टर (कन्सेशनेयर) की होती है. ताजा मरम्मत का काम प्रभावित हिस्से को ठीक करने और एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की आवाजाही को सुचारू बनाने के लिए किया गया.

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पिछले हफ्ते भी 63 किलोमीटर लंबे और 4,200 करोड़ की लागत से बने कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे की मुख्य सड़क का एक हिस्सा बारिश के कारण धंस गया. यह घटना उन्नाव जिले के अचलगंज थाना क्षेत्र में कोरारी के पास किलोमीटर संख्या 63-64 पर हुई थी. निर्माण कार्य पीएनसी (PNC) कंपनी द्वारा किया गया था और इसे एनएचएआई (NHAI) को सौंपा गया था. उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही सड़क के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे. इसके बाद एनएचएआई ने तुरंत मशीनों और अधिकारियों को तैनात कर सड़क की कटाई और पुनर्निर्माण कराकर यातायात बहाल कर दिया.

सपा और कांग्रेस का बीजेपी सरकार पर हमला

सड़क धंसने की घटना का वीडियो समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया था. इसके बाद सपा और कांग्रेस ने अपने एक्स (X) पोस्ट के जरिए वीडियो और फोटो शेयर करते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधा. 13 जुलाई को बड़े जोर-शोर से इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया था और इसकी तुलना जर्मनी की सड़कों से की गई थी.

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NHAI का बयान और मरम्मत की स्थिति

मामले पर संज्ञान लेते हुए एनएचएआई ने एक्स पर जानकारी दी कि कानपुर से लखनऊ की ओर किलोमीटर 64 के पास स्लिपेज की समस्या हुई थी.विभाग ने बताया कि यह निवारक रखरखाव कार्य उनके नियमित ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस (O&M) गतिविधियों का हिस्सा है. एक्सप्रेसवे 15 साल की डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (DLP) के तहत आता है, जिसकी जिम्मेदारी कंसेशनर की होती है. एनएचएआई के अनुसार, किलोमीटर 64 के पास मरम्मत का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और प्रभावित हिस्से को बहाल कर यातायात को पूरी तरह सामान्य कर दिया गया है.

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