हाईकोर्ट का फैसला: वाराणसी ट्रांसपोर्ट नगर भूमि अधिग्रहण का अवार्ड वैध, 332 किसानों की याचिकाएं खारिज
हाईकोर्ट का फैसला: वाराणसी ट्रांसपोर्ट नगर भूमि अधिग्रहण का अवार्ड वैध, 332 किसानों की याचिकाएं खारिज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 332 भू-स्वामियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए नए कानून के तहत मुआवजे की मांग को अमान्य कर दिया.…

सौजन्य से:- etvbharat.com
हाईकोर्ट का फैसला: वाराणसी ट्रांसपोर्ट नगर भूमि अधिग्रहण का अवार्ड वैध, 332 किसानों की याचिकाएं खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 332 भू-स्वामियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए नए कानून के तहत मुआवजे की मांग को अमान्य कर दिया.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 7, 2026 at 10:43 PM IST
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए वर्ष 2024 में पारित अवार्ड को वैध ठहराया है. न्यायालय ने कहा कि विशेष भूमि अर्जन अधिकारी द्वारा 10 जनवरी 2024 को पारित अवार्ड पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्देशों और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित विधिक सिद्धांतों के अनुरूप है. इसके साथ ही 332 भू-स्वामियों की तीनों याचिकाएं खारिज कर दी गईं. न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने विजय कुमार सहित 154, राजकुमार सहित 130 तथा कृष्ण प्रसाद सहित 49 भू-स्वामियों की याचिकाओं पर संयुक्त निर्णय सुनाया.
मुआवजे की मांग पर 332 भू-स्वामियों की याचिका: याचिकाकर्ताओं का कहना था कि चूंकि अवार्ड वर्ष 2024 में पारित हुआ है, इसलिए उन्हें वर्ष 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए. उनका यह भी तर्क था कि अधिग्रहण के समय 80 प्रतिशत अनुमानित मुआवजा जमा नहीं किया गया और अधिग्रहित भूमि का उपयोग मूल सार्वजनिक उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है. राज्य सरकार और वाराणसी विकास प्राधिकरण ने अदालत को बताया कि इस अधिग्रहण को लेकर पहले भी तीन चरणों में मुकदमेबाजी हो चुकी है. अधिग्रहण की वैधता तथा 80 प्रतिशत मुआवजा जमा करने जैसे मुद्दों का पहले ही न्यायालय द्वारा निस्तारण किया जा चुका है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अवार्ड: वर्ष 2023 के निर्णय में हाईकोर्ट ने शेष भू-स्वामियों के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप अवार्ड पारित करने का निर्देश दिया था, जिसका पालन करते हुए 10 जनवरी 2024 का अवार्ड पारित किया गया. हाईकोर्ट ने कहा कि जब पूर्व के निर्णयों में भूमि अधिग्रहण की वैधता और मुआवजे से जुड़े विवादों का निस्तारण हो चुका है, तो उन्हीं मुद्दों को दोबारा नहीं उठाया जा सकता.
अदालत ने तीनों याचिकाएं निरस्त कीं: अदालत ने माना कि विशेष भूमि अर्जन अधिकारी ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुरूप ही बाजार मूल्य निर्धारित कर अवार्ड पारित किया है. इसलिए इसमें किसी प्रकार की अवैधता या त्रुटि नहीं है. न्यायालय ने यह भी कहा कि वर्ष 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजे की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती. इन निष्कर्षों के आधार पर अदालत ने तीनों याचिकाएं निराधार बताते हुए खारिज कर दीं.
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