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जीबीयू लॉ स्टूडेंट अक्षत की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में 28 सितंबर को सुनवाई, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेण्ड ईयर के लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी ने कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन से जुड़े 5 लाख रुपये के निजी बांड नोटिस मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की है। मनीष सिंह, ग्रेटर नोएडा: कॉकरोच ज…

Navbharat Times के अनुसार27 सितंबर 2026 को 07:04 pm बजे
जीबीयू लॉ स्टूडेंट अक्षत की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में 28 सितंबर को सुनवाई, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप

सौजन्य से:- Navbharat Times

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेण्ड ईयर के लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी ने कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन से जुड़े 5 लाख रुपये के निजी बांड नोटिस मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की है।

मनीष सिंह, ग्रेटर नोएडा: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जुड़े प्रकरण में कानून के छात्र अक्षत त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अक्षत त्रिपाठी का आरोप है कि 5 लाख रुपये के बॉन्ड नोटिस के संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत के समक्ष की गई कार्रवाई की गलत जानकारी प्रस्तुत की। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई निर्धारित है।

अक्षत त्रिपाठी की याचिका पर 10 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई की थी। यही पीठ जुलाई में जंतर-मंतर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शनों से संबंधित मामलों की भी सुनवाई कर रही है।

कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने जारी किया था नोटिस

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश सरकार से प्राप्त निर्देशों का हवाला देते हुए अदालत को बताया था कि 5 लाख रुपये के बॉन्ड का नोटिस जिलाधिकारी की ओर से नहीं, बल्कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने जारी किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि इस मामले में संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।

एक खबर का अक्षत ने हवाला दिया

अक्षत त्रिपाठी ने अपनी नई अर्जी में इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर का उल्लेख किया है। खबर के अनुसार, बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने साफ किया कि केवल सब-इंस्पेक्टर शिवा पांडे को निलंबित किया गया था। आरोप है कि शिवा पांडे की रिपोर्ट के आधार पर ही 5 लाख रुपये के बॉन्ड का नोटिस जारी किया गया था।

कहा- कोर्ट के सामने भ्रामक जानकारी दी गई

अर्जी के अनुसार, नोटिस जारी करने वाले सहायक पुलिस आयुक्त, जो कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत थे, के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई। अक्षत त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भ्रामक जानकारी दी।

4 सितंबर को नोटिस भेजा था

ग्रेटर नोएडा के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 4 सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 130 के तहत अक्षत त्रिपाठी को नोटिस भेजा था। इसमें उनसे जवाब मांगा गया था कि बीएनएसएस की धारा 126 और 135 के प्रावधानों के तहत उन्हें 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम की दो जमानतों के साथ पाबंद क्यों न किया जाए। नोटिस में आरोप लगाया गया था कि अक्षत ने अन्य छात्रों को कथित तौर पर सीजेपी के धरने में भाग लेने के लिए प्रेरित किया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तीन दिन बाद जारी हुआ नोटिस

अक्षत त्रिपाठी के अर्जी के अनुसार, उन्हें भेजा गया नोटिस सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश के महज तीन दिन बाद जारी हुआ। शीर्ष अदालत ने उस आदेश में पेपर लीक के विरोध में सीजेपी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को समाप्त कर दिया था। 9 सितंबर को जब यह मुद्दा अदालत के सामने आया, तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल उठाया था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कार्यवाही रद्द किए जाने के बाद भी मजिस्ट्रेट ने नोटिस किस आधार पर जारी किया।

रिकॉर्ड में शामिल करने का अनुरोध किया

अक्षत ने अब निलंबन कार्रवाई से जुड़े बाद में जारी हुए स्पष्टीकरण को सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में शामिल करने का अनुरोध किया है। उनका तर्क है कि मामले में आगे हुए घटनाक्रम को समझने के लिए यह जानकारी अहम है। अर्जी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मीडिया रिपोर्ट को फिलहाल सिर्फ बाद की परिस्थितियों से अदालत को अवगत कराने के सीमित उद्देश्य से पेश किया गया है। जरूरत पड़ने पर संबंधित सरकारी दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति भी मांगी गई है।

प्रयागगराज के निवासी हैं अक्षत

अक्षत मूल रूप से प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं और गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी से बीए-एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं। वे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं। उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल हुए थे और उस समय विश्वविद्यालय परिसर में नहीं थे। मामले में पहले एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के निलंबन की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में डीजीपी मुख्यालय की सफाई से स्थिति अलग बताई गई। अक्षत की नई अर्जी इसी विसंगति को लेकर है। मामला आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

लेखक के बारे मेंविवेक मिश्राविवेक कुमार मिश्रा (Vivek Kumar Mishra) नवभारत टाइम्स ऑनलाइन (NBT.Com) में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक-सियासी हलचल पर नजर रखते हैं। यूपी राजनीतिक विश्लेषण, उत्तर प्रदेश में हो रही घटनाओं पर नजर रखते हैं। उत्तर प्रदेश में अपराध, प्रशासन, डेवलपमेंट, यूपी सरकारी योजनाओं पर फोकस रखते हैं। उत्तराखंड की राजनीति हलचल, विश्लेषण, अपराध और घटनाक्रम पर भी विवेक कुमार मिश्रा फोकस रखते हैं।

अनुभव

यूपी के लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा और नोएडा में हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक जागरण जैसे प्रिंट मीडिया में काम कर चुके हैं। दिसंबर 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के साथ जुड़े हैं। पत्रकारिता में 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसमें डेस्क और फील्ड दोनों में काम किया है।

शिक्षा

राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) में परास्नातक किया हुआ है। विवेक कुमार मिश्रा मूल रूप से यूपी के बाराबंकी जिले के रहने वाले हैं।... और पढ़ें

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