'27 में अखिलेश का राज', लखनऊ में फिर गरमाया पोस्टर वार! सपा कार्यालय के बाहर लगे चंदा चोरी और आरक्षण के पोस्टर
लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगे नए राजनीतिक पोस्टरों ने प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचलें तेज कर दी हैं। हाइलाइट्स सपा के प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगे नए राजनीतिक पोस्…

सौजन्य से:- Navbharat Times
लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगे नए राजनीतिक पोस्टरों ने प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचलें तेज कर दी हैं।
हाइलाइट्स
सपा के प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगे नए राजनीतिक पोस्टर
प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचलें तेज
यूपी विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव के लिए भी संकेत
हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में जुबानी जंग के बीच अब पोस्टर वॉर ने सियासी रफ्तार पकड़ ली है। लखनऊ में भाजपा, सपा और कांग्रेस की ओर से अलग अलग मुद्दों पर पोस्टर लगाकर बड़ी ही खामोशी से दूसरे दलों के बीच एक विवाद का बीज बो दिया जाता है। एक बार फिर लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगे नए राजनीतिक पोस्टरों ने प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचलें तेज कर दी हैं।
सपा ने इन पोस्टरों के जरिए सत्ताधारी भाजपा पर भ्रष्टाचार और आरक्षण के मुद्दे को लेकर सीधा हमला बोला है। आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी के कार्यालय के बाहर अलग अलग पोस्टरों में राममंदिर चंदा चोरी के मुद्दे का भी जिक्र किया गया है। ये सभी विवादित और आक्रामक पोस्टर प्रतापगढ़ के सपा नेता व खुद को समाजवादी सेवक कहने वाले हल्लू राम सुंदर यादव की ओर से लगवाए गए हैं।
'चंदा चोरी' और 'आरक्षण' के मुद्दे पर लगाया पोस्टर
शुक्रवार सुबह समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टरों में लिखा है कि चंदा चोरी से नहीं चला जिनका घर, अब आरक्षण पर कर रहे हैं प्रश्न-उत्तर। अखिलेश यादव और डिम्पल यादव की तस्वीर के साथ इस पोस्टर में सत्ता पक्ष को घेरते हुए ये भी संदेश दिया गया है कि 'चंदा चोरी से जिनका नहीं भरा मन, अब आरक्षण पर कर रहे हैं मनमानापन'।
इन पोस्टरों को लगवाने वाले सपा नेता ने एक अन्य पोस्टर में राममंदिर की तस्वीर जोड़ते हुए लिखवाया है कि 'महापाप की श्रेणी में आते हैं- चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी और गुप्तदान की चोरी'। इसके आगे लिखा गया है कि 'जो भगवान के नाम पर विश्वास की कमाई लूटते हैं, श्रीराम उन्हें कभी क्षमा नहीं करेंगे।' समाजवादी पार्टी ने इन नारों के जरिए भ्रष्टाचार के आरोपों और सामाजिक न्याय के मुद्दे को एक साथ जोड़कर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।
पोस्टर के जरिए सियासी संदेश
भ्रष्टाचार और आरक्षण के मुद्दे पर लगवाए गए इन पोस्टरों के अलावा एक अन्य पोस्टर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव की तस्वीरें एक साथ लगाई गई हैं। इस पोस्टर पर लिखा गया है कि ' 27 में अखिलेश का राज , 29 में डिंपल यादव का ताज।' इस नारे के जरिए सपा ने न केवल 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव, बल्कि 2029 के आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भी अपनी सियासी बिसात बिछाने का स्पष्ट संकेत दे दिया है।
लेखक के बारे मेंपवन नौटियालपवन नौटियाल नवभारत टाइम्स में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सेक्शन के लिए बतौर कंसलटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का व्यापक पत्रकारीय अनुभव है। मूल रूप से उत्तराखंड (उत्तरकाशी) के रहने वाले पवन को दोनों राज्यों की राजनीति, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, क्राइम और यूटिलिटी खबरों की गहरी समझ है।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2012 में देहरादून से एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के साथ की, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग और कई एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए। उन्होंने 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा की भी क्रेडिबल ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इसके बाद, उन्होंने 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में 5 वर्षों तक डेस्क और फील्ड की दोहरी जिम्मेदारी संभाली। डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए उन्होंने वनइंडिया-डेलीहंट के साथ करीब 5 साल काम किया, जहां उन्होंने उत्तरकाशी के ऐतिहासिक सिलक्यारा टनल हादसे और धराली आपदा जैसी बड़ी घटनाओं को मौके पर जाकर कवर किया। दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले पवन विज्ञान के छात्र रहे हैं, जिससे उनकी खबरों में तार्किक और डेटा-आधारित सटीकता दिखती है।मुख्य विशेषज्ञता (Areas of Expertise)क्षेत्रीय कवरेज: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति, समसामयिक मुद्दे और सामाजिक सरोकार।बीट्स: पॉलिटिकल एनालिसिस, क्राइम, हेल्थ, यूटिलिटी न्यूज और ग्राउंड डिजास्टर रिपोर्टिंग।अनुभव: 14+ वर्ष (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)।पेशेवर यात्रा (Professional Experience)करियर की शुरुआत (2012): देहरादून में न्यूज चैनल से शुरुआत; उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और केदारनाथ आपदा (2013) की लाइव कवरेज। 'लोकस्वामी' मैगजीन के लिए अहम कवर स्टोरीज।प्रिंट मीडिया (5 वर्ष): 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर/रिपोर्टर डेस्क और फील्ड रिपोर्टर के तौर पर काम।डिजिटल मीडिया (5 वर्ष): 'वनइंडिया-डेलीहंट' में यूपी-उत्तराखंड के चुनाव और बड़ी घटनाओं की कमान। उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल रेस्क्यू और धराली आपदा की ग्राउंड रिपोर्टिंग।शिक्षा और क्रेडेंशियल (Education & Credentials)पोस्ट ग्रेजुएशन: मास कम्युनिकेशन (नई दिल्ली)।ग्रेजुएशन: साइंस स्ट्रीम (जो उनकी खबरों को एक विश्लेषणात्मक और सटीक दृष्टिकोण देता है)।स्थानीय जुड़ाव: मूल निवासी उत्तरकाशी (उत्तराखंड), जिससे उन्हें पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों की स्वाभाविक और प्रामाणिक समझ है।... और पढ़ें
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