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प्रयागराज में जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- 24 घंटे में निचले इलाकों से पानी निकालें, नगर आयुक्त को दी चेतावनी

प्रयागराज में जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- 24 घंटे में निचले इलाकों से पानी निकालें, नगर आयुक्त को दी चेतावनी अदालत ने नगर आयुक्त को चेतावनी दी कि यह सुनने को नहीं मिलना चाहिए कि निचले इलाकों में अभी भी जलभराव बना हुआ ह…

ETV Bharat के अनुसार20 अगस्त 2026 को 05:55 pm बजे
प्रयागराज में जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- 24 घंटे में निचले इलाकों से पानी निकालें, नगर आयुक्त को दी चेतावनी

सौजन्य से:- ETV Bharat

प्रयागराज में जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- 24 घंटे में निचले इलाकों से पानी निकालें, नगर आयुक्त को दी चेतावनी

अदालत ने नगर आयुक्त को चेतावनी दी कि यह सुनने को नहीं मिलना चाहिए कि निचले इलाकों में अभी भी जलभराव बना हुआ है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 20, 2026 at 9:33 PM IST

प्रयागराज : शहर में लगातार बारिश के बाद जलभराव की गंभीर स्थिति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने नगर निगम प्रयागराज को निर्देश दिया है कि शहर के सभी जलभराव वाले निचले इलाकों से अगले 24 घंटे में पानी निकालकर सफाई और सैनिटेशन का काम पूरा कराया जाए. कोर्ट ने कहा कि जलभराव के कारण किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न नहीं होनी चाहिए.

यह आदेश प्रयागराज में जल निकासी की व्यवस्था और ड्रेनेज मास्टर प्लान लागू न किए जाने के संबंध में स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया. नगर आयुक्त प्रयागराज सीलम साई तेजा कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए.

पर्याप्त संख्या में पंप लगाने का निर्देश : पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नगर आयुक्त को 24 से 48 घंटे के भीतर जलभराव वाले निचले क्षेत्रों को जलमुक्त कराने का निर्देश दिया था. आपात स्थिति में मोरी गेट, दारागंज के रास्ते पानी पंप कर निकालने के निर्देश भी दिए गए थे. सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि विभिन्न स्थानों पर पर्याप्त संख्या में पानी के पंप लगाए गए हैं.

उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), प्रयागराज के सहयोग से जल निकासी का काम चल रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले चार से आठ घंटे में निचले इलाकों में जमा बारिश का पानी निकाल दिया जाएगा. इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी खतरे से बचने के लिए सैनिटेशन का काम भी कराया जाएगा.

वरिष्ठ अधिवक्ता टीपी सिंह, अमरेंद्र नाथ सिंह और अरुण कुमार गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि शहर की स्थिति अभी भी गंभीर है. कई इलाकों में जलभराव बना हुआ है और पर्याप्त पंप लगाए बिना लोगों को राहत नहीं मिल सकती. उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में अधिवक्ताओं के चैंबर और आवास भी हैं तथा कई स्थानों पर बारिश का पानी भवनों के अंदर तक पहुंच गया है. ऐसे में नगर निगम की जिम्मेदारी है कि भवनों के अंदर से भी पानी निकाला जाए और सफाई कराई जाए.

पंप कम पड़े तो 12 घंटे में उपलब्ध कराए राज्य सरकार : राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने नगर विकास एवं नियोजन विभाग के सचिव का व्यक्तिगत हलफनामा कोर्ट में दाखिल किया. इसके साथ 20 दिसंबर 2024 को जारी शासनादेश के तहत जलभराव नियंत्रण और वर्षाजल प्रबंधन के लिए तैयार दीर्घकालिक योजना से संबंधित निर्देश भी प्रस्तुत किए गए.

कोर्ट को बताया गया कि योजना के क्रियान्वयन के लिए शासन स्तर पर सचिव की अध्यक्षता में शीर्ष स्तरीय समिति गठित की गई है. बैठक की कार्यवाही भी रिकॉर्ड पर रखी गई. हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता आपातस्थिति से निपटने की है. नगर आयुक्त यह सुनिश्चित करें कि जहां भी जलभराव है, वहां पर्याप्त पंप तत्काल लगाए जाएं. यदि

नगर निगम के पास पर्याप्त पंप उपलब्ध नहीं हैं तो उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), प्रयागराज से पंप लिए जाएं. यदि वहां भी पर्याप्त पंप उपलब्ध न हों तो राज्य सरकार को 12 घंटे के भीतर आवश्यक संख्या में पंप उपलब्ध कराने होंगे.

अगली सुनवाई में वार्डवार देना होगा पूरा ब्योरा : कोर्ट ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि वह अगले दो से तीन घंटे में शहर की स्थिति का आकलन कर आवश्यक पंपों की संख्या सुनिश्चित करें. अगली सुनवाई में उन्हें व्यक्तिगत हलफनामे के माध्यम से अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी. रिपोर्ट में वार्डवार और क्षेत्रवार यह जानकारी देनी होगी कि किन इलाकों में जलभराव हुआ, कहां से पानी निकाला गया और कहां सैनिटेशन का काम कराया गया. उन नालों का भी ब्योरा देना होगा जो अभी जाम हैं और किन कारणों से जल निकासी प्रभावित हुई.

कोर्ट ने यह भी पूछा है कि मानसून शुरू होने से पहले नालों की सिल्ट सफाई यानी डी-सिल्टिंग कराई गई थी या नहीं. जिन खुले नालों में अभी भी सिल्ट जमा है, उनकी तत्काल सफाई की स्थिति भी हलफनामे में बतानी होगी.

भूमिगत नाले की सफाई की योजना भी बतानी होगी : हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू रोड, जॉर्ज टाउन और सोहबतियाबाग क्षेत्र के नीचे से गुजरने वाले भूमिगत नाले में जमा सिल्ट को हटाने की नगर निगम की योजना का भी विवरण मांगा है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल तत्काल पानी निकाल देना पर्याप्त नहीं है. भविष्य में हर मानसून में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए नालों की डी-सिल्टिंग, नए नालों का निर्माण और वर्षाजल निकासी की केंद्रीय व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है. ये सभी दीर्घकालिक और व्यापक जनहित से जुड़े विषय हैं.

वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडे अमिकस क्यूरी नियुक्त : व्यापक जनहित को देखते हुए हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पांडेय को इस मामले में अमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया है. कोर्ट ने कहा कि प्रयागराज के नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले इस मामले में जिन लोगों के पास सुझाव या बेहतर योजना है, वे अमिकस क्यूरी के माध्यम से अपनी बात कोर्ट के समक्ष रख सकते हैं.

अदालत ने नगर आयुक्त को चेतावनी दी कि अगली सुनवाई में यह सुनने को नहीं मिलना चाहिए कि शहर के निचले इलाकों में अभी भी जलभराव बना हुआ है. अनुपालन न होने की स्थिति में नगर आयुक्त को स्वयं कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा. मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को दोपहर दो बजे होगी.

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