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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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वाराणसी में अगले 24 घंटे में एक्टिव होगा पश्चिमी विक्षोभ:गंगा का जलस्तर 2 सेमी. की रफ्तार से घटा, असि घाट पर सिल्ट की हुई सफाई
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वााणसी में सोमवार सुबह मौसम का मिजाज बदला नजर आया। आसमान में हल्के बादल छाए रहे, जिससे लोगों को धूप से थोड़ी राहत मिली। हालांकि उमस का असर बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के मौसम में और बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी सिस्टम का असर भी उत्तर प्रदेश तक पहुंचने के आसार हैं।
मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) धीरे-धीरे बिहार, झारखंड होते हुए उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। इस सिस्टम के साथ पूर्व-पश्चिम दिशा में बनी द्रोणिका (ट्रफ) और चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय हैं।
इन मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में बादल बनने और कहीं-कहीं बारिश या बूंदाबांदी की स्थिति बन सकती है।
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बदलेगा मौसम
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र जैसे-जैसे उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा, इसका प्रभाव बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के साथ नमी मिलने पर बादलों का विकास तेज हो सकता है।
वाराणसी में फिलहाल आसमान पर हल्के बादल हैं। मौसम में बदलाव के बावजूद तापमान और उमस के कारण दिन में गर्मी महसूस की जा रही है। अगले 24 घंटे मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
गंगा का जलस्तर लगातार घट रहा
उधर, वाराणसी में गंगा का जलस्तर अब तेजी से नीचे जा रहा है। जलस्तर में करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गिरावट दर्ज की जा रही है। पानी घटने के साथ ही लंबे समय से बाढ़ के पानी और गाद से प्रभावित घाटों पर सफाई का काम भी तेज हुआ है।
अस्सी घाट पर जलस्तर घटने के बाद जमा सिल्ट को लगभग साफ कर दिया गया है। हालांकि घाट की सफाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा का पानी घटने के बाद भारी मात्रा में जमा गाद को हटाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन नगर निगम की ओर से अभी तक सफाई के लिए एक भी पंप नहीं लगाया गया।
स्थानीय लोगों ने खुद लगाए पंप
नगर निगम के इंतजार के बजाय स्थानीय लोगों ने खुद पंप लगाकर घाट पर जमा पानी और गाद को हटाने का काम शुरू किया। लोगों का कहना है कि लंबे समय तक गंगा के पानी में डूबे रहने के कारण घाट पर मोटी परत में सिल्ट जम गई थी। इसे हटाने के लिए सामान्य सफाई से काम नहीं चल रहा था, इसलिए पंपों की मदद लेनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यदि समय रहते नगर निगम की ओर से पर्याप्त पंप और सफाईकर्मी लगाए जाते तो घाटों की सफाई और तेजी से हो सकती थी। गंगा का जलस्तर लगातार घटने के साथ अब घाटों को सामान्य स्थिति में लाने की चुनौती सामने है।
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