क्या 2027 की सियासत को धार देगी समान नागरिक संहिता? अमित शाह के बयान के बाद यूपी में बढ़ी सरगर्मी
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अमित शाह के समान नागरिक संहिता लागू करने के दावे ने यूपी में सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। बता दें कि बीजेपी ने इसे उत्तराखंड, गुजरात और असम में पहले ही लागू कर दिया है। लखनऊ: विधानसभा चुनाव क…

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अमित शाह के समान नागरिक संहिता लागू करने के दावे ने यूपी में सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। बता दें कि बीजेपी ने इसे उत्तराखंड, गुजरात और असम में पहले ही लागू कर दिया है।
लखनऊ: विधानसभा चुनाव के लिए सियासी दलों ने मुद्दों के तीर तराशने शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समान नागरिक संहिता लागू करने के दावे ने सियासी सरगर्मी और बढ़ा दी है।
अमित शाह का दावा है कि 2029 के पहले बीजेपी एवं उसके सहयोगियों के शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर दिया जाएगा। इसमें यूपी भी शामिल है। बीजेपी इसे वादे के अमल के तौर पर पेश कर रही है, जबकि विपक्ष ध्रुवीकरण की कवायद बता रहा है।
बीजेपी के घोषणापत्र में यूसीसी
यूसीसी बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव के संकल्प पत्र में भी बीजेपी ने इसे शामिल किया था। उत्तराखंड, गुजरात और असम में इसे लागू भी कर चुके हैं। वहीं, महाराष्ट्र सरकार ने भी कानूनी परीक्षण के लिए कमिटी गठित कर दी है।
यूपी में 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी
करीब 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी वाले यूपी में यूसीसी को लेकर पहले से ही सुर मुखर रहे हैं। 1986 में शाहबनों प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जब राजीव गांधी सरकार ने पलटा था तो उसके खिलाफ कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले आरिफ मोहम्मद खान भी यूपी के ही थे।
कोर एजेंडे का एक और संदेश
यूपी बीजेपी के राजनीतिक प्रयोग और उत्थान की जमीन रही है। राममंदिर का निर्माण बीजेपी का सबसे बड़ा एजेंडा था, जिसकी जड़ें यही हैं जिसे पार्टी पूरा कर चुकी है। इसके अलावा कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और तीन तलाक खत्म करने का एजेंडा भी बीजेपी पूरा कर चुकी है। ऐसे में यूसीसी के मुद्दे को फिर से आगे बढ़ाकर बीजेपी अपने कोर एजेंडे को पूरा करने के एक और संदेश की ओर आगे बढ़ती दिख रही है।
सीएम योगी की अमित शाह से होनी है मुलाकात
यूपी में यह मुद्दा भावनात्मक सियासी उबाल ला सकता है, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव के एजेंडे को और धार मिलने के आसार हैं। अहम बात यह है कि इन चर्चाओं के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ की मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी होनी है।
हाईकोर्ट से चुनावी मंचों तक मुखर रहा मुद्दा
बीजेपी संविधान के अनुच्छेद 44 को आधार बनाकर हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक समान नागरिक संहिता लागू करने की वकालत कर चुकी है। 2021 में अंतरधार्मिक विवाहों से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को समान नागरिक संहिता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों पर विचार करने को कहा था।
‘एक समान नागरिक व्यवस्था समय की मांग’
कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि विवाह और पारिवारिक कानूनों की बहुलता के बीच एक समान नागरिक व्यवस्था समय की मांग है। यूसीसी लागू होने से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक संपत्ति जैसे मामलों में नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू होगी, अभी विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून है।
यूपी में इसलिए उम्मीदें
केंद्र की मंशा के बाद यूपी में योगी की अगुवाई वाली सरकार के इस पर आगे बढ़ाने को लेकर उम्मीदें यूं ही नहीं है। पिछले साल एक इंटरव्यू में सीएम ने कहा था कि प्रशासनिक कामकाज में हम समान नागरिक संहिता की भावना लागू कर चुके हैं। अलग-अलग कानूनों के जरिए योगी सरकार मान्यताओं के कानूनी विभाजन के कई रास्ते पहले ही बंद कर चुकी है। चाहे वह तीन तलाक के कानून पर कड़ाई से अमल हो या धर्मांतरण विरोधी कानून लागू करना हो।
डिप्टी सीएम ने गृहमंत्री के बयान का किया स्वागत
इन मामलों में यूपी ने कार्रवाइयों की नजीर पेश की है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक केंद्रीय गृहमंत्री के बयान का स्वागत करते हुए कहते हैं 'नेतृत्व के निर्देशों की दिशा में स्वाभाविक तौर पर आगे बढ़ा जाएगा। 'उधर, कुछ संगठनों की ओर से इस ऐलान के बाद विरोध-प्रदर्शन की रणनीति भी बनाए जाने लगी है।
लेखक के बारे मेंप्रशांत सिंहप्रशांत सिंह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कंसल्टेंट राइटर हैं। पत्रकारिता में उनका 1.5 साल का अनुभव है। वह अभी उत्तर-प्रदेश और उत्तराखंड टीम का हिस्सा हैं। इससे पहले उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र-प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब-हरियाणा, गोवा समेत नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की खबरों पर काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरूआत नवभारत टाइम्स अखबार से की थी।प्रशांत सिंह को देश-विदेश की राजनीति के बारे में लिखना बेहद पसंद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को अपनी टीम के साथ कवर किया है। इसके साथ ही उन्हें हिंद-प्रशांत महासागर और वेस्ट एशिया की जियोपॉलिटिक्स को समझने और उस पर लिखने में गहरी दिलचस्पी है।प्रशांत सिंह ने दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ युनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली की साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने अपनी मास्टर्स खत्म होने के बाद मीडिया जगत में कदम रखा।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by CM Sarkar Geeta Reporter
संबंधित ख़बरें

Lucknow News: अयोध्या-वाराणसी के आचार्यों ने किया गणपति बप्पा का पूजन

गोरखपुर में भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ, CM योगी बोले- श्रीमद्भागवत दिखाती है सत्य का मार्ग - yogi adityanath bhagwat katha guides amidst social media halftruths

गोरखपुर में सड़क हादसे और कैंसर पीड़ित परिवारों से मिले सीएम योगी, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सौंपे आर्थिक मदद के चेक - cm yogi provides aid to bereaved families in gorakhpur


